25 New moral stories in hindi for kids 2020 : Moral kahani

25 New moral stories in hindi for kids 2020 : Moral kahani

Today we are writing 25 moral stories in Hindi for kids. These 25 Moral stories in Hindi for kids inspire you, motivate you. We promise, if you read these Moral stories in Hindi for kids deeply you will proper satisfied.

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Moral stories in hindi

New moral stories in hindi collection

1. मेहनत बड़ी या अक्ल(moral stories in hindi must read)

2. माली काका(moral stories in hindi)

3. कौआ और बूढ़ी औरत(moral stories in hindi for kids)

4. बहादुर चीटी(प्रेरित कर देने वाली कहानी)

5..जादुई कड़ा और पैसो का पेड़ (moral stories in hindi)

6. झूठी दोस्ती(moral stories in hindi for kids)

7.शहरी चूहा और देहाती चूहा(moral stories in Hindi for kids)

8.बफ़ादार कौन (एक भाबुक कर देने बाली कहानी (moral story in hindi for kids)

9. सुआर्थी दोस्त(moral stories in Hindi for kids)

10.सोच हो तो ऐसी(Must read)

Moral stories in hindi with pictures

बहुत समय पहले की बात है_

Moral stories in hindi for kids

एक राजा था।
बह अपने आस पास के राज्य में यात्रा करने गया था।

तब एक राज्य के अधिकारी ने राजा को दो तोतो की जोड़ी उपहार में दी(moral stories in Hindi for kids)….

 

(Moral stories in hindi for kids)

Moral stories in hindi for kids

एक बार की बात है-

एक गांव में एक मूर्तिकार रहा करता था। वो काफी खूबसूरत मूर्ति बनाया करता था और इस काम से वो अच्छा कमा लेता था।

उसे एक बेटा हुुआ(moral stories in Hindi)…

 

(Moral stories in hindi for kids)

                  

बहुत समय पहले-

Moral stories in hindi for kids
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एक महल के पास एक जंगल था उस जंगल मे एक पेड़ पर एक कौए का जोड़ा रहता था।

और उस पेड़ के नीचे ही एक दुष्ट कोबरा साँप रहता था। ये जानकर भी साँप बहाँ रहता…

ये कहानी इसी शदी कि है:-

एक जंगल मे एक आम का पेड़ था।Moral stories in hindi for kids उस जंगल के पास ही एक छोटा सा गांव था।

उस गांव में एक लड़का रहता था जिसका नाम रामु था।

रामु हमेशा ही उस आम के पेड़ के पास आकर खेला करता था।

वो उस पेड़ पर चढ़ता, आम खाता और फिर आराम से उस पेड़ के नीचे एक झपकी लेता(Moral stories in Hindi for kids)…

 

(Moral stories in hindi for kids)

Moral stories in hindi for kids
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एक जंगल मे एक ऊठ रहता था वो काफी सीधा साधा था।
एक दिन वो जंगल मे अकेला घास कहा रहा था तभी सियार बहा आता है और ऊठ से बोलता है- ऊठ भाई क्या कर रहे हो।
ऊठ- कुछ नही भाई घास खा रहा हूँ ।

सियार – क्या तुम अकेले रहते हो?
ऊठ- हां भाई मैं अकेला ही रहता हूं और अकेला ही भोजन करता हूँ।

सियार – मित्र मैं भी अकेला हु और मुझे भी एक मित्र की जरुरत है…

 

एक बार की बात है:-

Moral stories in hindi for kids
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एक बार एक लोमड़ी अपना  रास्ता भटक गई और वो  चलते-चलते एक रेगिस्तान में जा पहुंची।
धूप सर पे थी तो वो चलते-चलते थक गयी।

इतने में उसे एक कुआं दिखा लोमड़ी कुआं के पास पहूंची, और उसमें झाँक कर देखा तो…

 

(Moral stories in hindi for kids)

 

एक समय की बात हैं-

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एक तालाब के पास एक बगुला रहता था वो उस तालाब से मछलियां पकड़ के अपना पेट भरता।
हर एक मछली उससे नफरत करती थीं लेकिन उसे मछलियां बहुत पसन्द थीं।

बगुला कभी भी भूखा नहीं रहता वह शिकार करता और मज़े से खाता दिन बीतते गए अब बगुला कमज़ोर..

 

(Moral stories in hindi for kids)

Moral stories in hindi for kids
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एक घने जंगल के बीच एक विशाल नदी बहती थीं
इस नदी में एक बूढ़ा मगरमच्छ रहता था।
वह बूढ़ा होने की वज़ह से शिकार नहीं कर पाता था

एक दिन उससे ज़ोर की भूख लगी
उसने सोचा नदी के बाहर जाकर तो शिकार करना मुश्किल हैं नदी में ही शिकार कर के पेट भर लेता हूं।

जैसे ही वो मछली पकड़ ने लगा मछली उसके हाथ से निकल गई। तो वो भूखा थक हारा जामुन के पेड़ के नीचे आराम करने लगा उस पेड़ पर एक बंदर… (moral stories in hindi)..

 

(Moral stories in hindi for kids)

एक गांव में रामू नाम का एक किसान रहता था-

Moral stories in hindi for kids
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रामू के पास में एक खेत था। एक दिन रामू बाज़ार में खेत के लिए बीज़ ख़रीद रहा होता था तभी उसकी नज़र दो बड़े और सुन्दर घड़ो पर पड़ती हैं।

रामू बोला- वाह ये तो बड़े और सुन्दर घड़े हैं

ये तो नदी से पानी भर कर लाने के लिए बिल्कुल सही रहेंगे। रामू बोला वैसे भी घर के छोटे बर्तन में बहुत कम पानी आता हैं।

रामू बीज़ छोड़ कर उन दो घड़ो को ख़रीद लेता हैं और घर की ओर चल देता है..

(Moral stories in hindi for kids)

बहुत समय पहले की बात है:-

Moral stories in hindi for kids
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एक जंगल मे अपने बच्चो के साथ एक शेरनी रहती थी उसका पति शेर जंगल का राजा था वो बहोत ही दयालु ओर अच्छे ब्यबहार वाला था एक दिन शेेरनी…

(Moral stories in hindi for kids)

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Moral stories in hindi for kids
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एक बार एक स्कूल में क्लास चल थी और बाहर वारिस हो रही थी।
तभी टीचर ने बच्चों से पूछा- अगर तुम सभी को 100, 100 रुपये दिए जाए तो तुम क्या करोगे ?

किसी ने कहा- मैं वीडियो गेम खरीदूंगा।
किसी ने कहा- मैं क्रिकेट बैट खरीदूंगा।
किसी ने कहा- मैं साईकल खरीदूंगा
और किसी ने खिलौने ख़रीदने को कहा

और एक बच्चा गहरी सोच में था।
टीचर में पूछा– तुम क्या सोच रहे हो ?
तुम क्या खरीदोगे ?..

बच्चा बोलाटीचर जी मेरी मां को थोड़ा कम दिखाई देता है, तो मैं अपनी मां के लिए एक चश्मा खरीदूंगा

टीचर में कहा- तुम्हारी माँ के लिए चश्मा तो तुम्हारे पापा भी खरीद सकते हैं, अपने लिए कुछ बताओ।

बच्चा– सर मेरे पापा अब इस दुनिया मे नही है।
मेरी माँ लोगो के कपड़े सिलकर मुझे पड़ती है,
और उसे कम दिखाई देने की बजह से वो ठीक से कपड़े सिल नही पाती है।

इसलिए सर मैं अपनी मां को चश्मा देना चाहता हूँ।

ताकि मैं अच्छे से पढ़ सकूं और बहुत बड़ा आदमी बन सकूं, और अपनी मां को सारे सुख और सुविधा दे सकूं।

टीचर– बेटा तेरी सोच ही तेरी कमाई है, ये 100 रुपए मेरे बादे के अनुसार और ये 100 रुपये और उधर दे रहा हूँ
जब कभी कमाओ तब लौटा देना।

और मेरी इच्छा है तू इतना बड़ा आदमी बने की तेरे सर में हाथ फेरते समय मैं धन्य हो जाऊं।

20 वर्ष के बाद स्कूल बाहर बारिश हो रही थी और अंदर क्लास चल रही थी।
अचानक स्कूल के आगे एक जिला कलेट्टर की गाड़ी आकर रुकती है।

स्कूल स्टाफ चौकन्ना से रहे जाता है, स्कूल में सन्नाटा छा जाता है।
पर सभी देखते है कि जिला कलेट्टर एक बिर्द्ध टीचर के
पैरो में गिर पड़ता है और कहता है-

सर मैं उधार के 100 रुपये लौटाने आया हूँ।
टीचर उसे लगे से लगा लेते हैं।
पूरा स्कूल स्टाफ दंग रहे जाता है।

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एक समय की बात है-

Moral stories in hindi for kids
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पेड़ पर से एक चींटी तालाब में गिर गई।
एक कबूतर ने उसे अपना जीवन बचाने के लिए जी तोड़ कोसिस करते हुए देखा।

कबूतर ने एक पत्ते को तोड़ा और चींटी के पास फेंक दिया। चींटी झट से

Moral stories in hindi for kids
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पत्ते पर चढ़ गई।(Moral stories in Hindi)

और उसने कबूतर का धन्यवाद किया।

कुछ हफ़्तों के बाद एक शिकारी जंगल मे आया –

शिकारी का तो काम ही होता हैं पंछियो को पकड़ना।शिकारी ने कुछ दाने जमीन पर फेंके और उस पर अपना जाल बिछा दिया।

वह चुपचाप किसी पंछी के जाल में फसने का इन्तज़ार करने लगा।

बहाँ से चींटी गुज़र रही थी उसने जब वह सारी तैयारी देखी तो क्या देखती कि वही कबूतर जिसने उसकी जान बचाई थी।

कबूतर उड़ता हुआ जाल में पड़े दाने खाने के लिए नीचे उतर रहा है। चींटी ने एक दम आगे बढ़ के शिकारी के पैर पर इतनी बुरी तरह काटा के शिकारी के मुंह से चीख निकल गई।

आह तेरी ऐसे की तैसी ओह परमात्मा।

कबूतर ने एक दम देखा के शोर किधर से आ रहा हैं और शिकारी को देखते ही सब कुछ उसकी समझ आ गया वो दूसरी दिशा में उड़ गया।

और उसकी जान बच गयी चींटी भी अपने काम पे चल दी

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बहुत पहले की बात हैं:-

Moral stories in hindi for kidsएक भेड़िया भोजन की तलाश में जंगल छोड़ शहर की ओर निकल पड़ा। कुत्ते उसके पीछे पड़ गए कुत्तो ने उससे ख़ूब भगाया।

अपनी जान बचाने के लिए वह एक दीवार से दूसरी ओर कूद गया। वह घर किसी रंगसाज़ का था वह धड़ाम से एक नीले रंग के पानी के टब में आ गिरा।

वह रंग रंगसाज़ ने कपड़ो को नीला रंग देने के लिए पानी में घोल रखा था। सारी रात वह उस टब में पड़ा रहा सुबह वह टब से निकला वह पूरी तरह से भीग चुका था।

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क्योकी कुत्ते बहाँ से लौट चुके थे उसने भी बापिस जंगल जाने में भलाई समझी। बह एक दरिया के पास पहुचा तो  यह देख कर हैरान रह गया  की उसका रंग बिल्कुल नीला हो गया है।

उसने सोचा क्यू ना इसका फ़ायदा उठाया जाए उसने जंगल के सभी जानवरो को इकट्टा किया और

बोला- मुझे तुम्हारे पास परमात्मा ने तुम्हारा राजा बनाकर भेजा हैं आज से तुम सब मेरे हुक्म को अपना फ़र्ज़ समझते हुए पूरा करोगे बरना तुम सब को मार दूंगा।

सभी जानवर घबरा गए उसका रंग विचित्र था ना जाने परमात्मा ने इसे कितनी ताक़त देकर भेजा हैं उन सभी ने

यहाँ तक के शेर और चीता ने भी उसे अपना राजा मानने में ही भलाई समझी। सभी उसकी आज्ञा मानने लगे लेकिन कहते हैं ना सौ दिन चोर के एक दिन साध का ।

हुआ यूं के एक दिन उसने बहुत से भेड़ियो की आवाज़ सुनी अ……….ऊ……..अ……. ऊ……।

Moral stories in hindi for kids
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वह अपने आप को रोक ना पाया और वह भी ऊंची आवाज़ से चिल्लाने लगा। अ…… ऊ….. अ….. ऊ.. ।

क्योकि पुरानी आदतें और  ब्यबहार जल्दी कहा छूटते हैं जब शेर और चीता ने उसकी आवाज़ सुनी तो बो झट से समझ गए यह कोई परमात्मा का भेजा हुआ राजा नहीं बल्कि धूर्त भेड़िया हैं शेर ने उस पर हमला कर दिया और बही उसका काम तमाम हो गया

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एक समय की बात हैं-

Moral stories in hindi for kidsएक कुए में एक मेंढक रहता था। उसके पास समुन्द्र से एक बड़ी मछली आई।
उसने मेंढक से बोला- मैं अभी-अभी समुन्द्र से आई हूं।

उस मेंढक ने पूछा- ये समुन्द्र क्या होता हैं ?
मछली बोली- समुन्द्र मतलब जहां पे बहुत पानी हैं। मेंढक बोला-बहुत पानी मतलब क्या बहुत पानी हैं।

फिर मेंढक ने एक चौथाई कुएं की छलांग मारी और बोला क्या इतना पानी है ?

मछली बोली- अरे नहीं मेंढक!
इतना नहीं बहुत पानी हैं। मेंढक ने फिर आधे कुंए की छलांग मारी और बोला-क्या इतना पानी हैं?

मछली बोली-अरे नहीं ये तो कुछ भी नहीं हैं। इससे भी ज़्यादा पानी होता हैं।

फिर मेंढक ने परेशान होकर पूरे कुंए की छलांग मारी और बोला-क्या इतना पानी होता हैं समुन्द्र में ?


मछली बोली-अरे नहीं….. मेरे प्यारे मेंढक कैसे समझाऊ मैं तुम्हें, इससे भी ज़्यादा पानी होता हैं।

मेंढक बोला-तुम झूठ बोल रही हो क्योंकि इससे ज़्यादा पानी तो हो ही नहीं सकता।
क्योंकि मेंढक की सोच और उसकी दुनिया यही से शुरू होती हैं। और यही पे खत्म होती हैं।

इससे ज़्यादा उस मेंढक ने कभी देखा नहीं था।
सुना नहीं था। जब सुना नहीं था। देखा नहीं था। तो इससे ज़्यादा सोचेगा कैसे।

Moral stories in hindi for kids
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तो उस मछली ने क्या किया मेंढक से बोली-आ बैठ मेरे पीछे और उसको ले गई समुन्द्र में।

मछली ने बोला- ले देख कितना पानी हैं समुन्द्र में।
जैसे ही मेंढक ने समुन्द्र में इतना पानी देखा तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गई। अरे ये क्या हैं इतना पानी तो मैंने आज तक नहीं देखा।
मेंढक की बोलती बंद हो जाती हैं।

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Moral stories in hindi for kidsएक बार की बात है-

एक राजा अपने काफ़िले के साथ शिकार के लिए निकला। दूर – दूर तक कोई शिकार नज़र नहीं आ रहा था। वह धीरे-धीरे घने जंगल में पहुँच गए।

अभी कुछ दूर ही गए थे, के कुछ डाकूओं के छुपने की जगह दिखाई दी।

जैसे ही वह उसके पास पहुंचे, पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा-
पकड़ो-पकड़ो एक राजा आ रहा है। इसके पास बहुत सारा सामान हैं।                                                  तोते की आवाज़ सुनकर सभी डाकू राजा की ओर दौड़ पड़े…

डाकुओं को अपनी ओर आता देख राजा और उसके सैनिक भाग खड़े हुए। भागते-भागते कोसो दूर निकल गए।
सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया। कुछ देर रुकने के लिए उस पेड़ के पास चले गए।

लेकिन जैसे ही उस पेड़ के पास पहुंचे। उस पेड़ पे बैठा तोता बोल पड़ा। आओ राजन हमारे साधु महात्मा की कोठी में आपका स्वागत हैं। अन्दर आईए पानी पीजिए और आराम कीजिए।

तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया।
और सोचने लगा। एक ही जाती के दो तोतो के व्यवहार में इतना अलगपन, ऐसे कैसे हो सकता हैं ?

राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो तोते की बात मानकर अन्दर साधु के पास गया। साधु महात्मा को नमस्कार कर उनके पास ही बैठ गया। और अपनी सारी कहानी सुनाई।

और धीरे से बोला-साधु महात्मा इन दोनों तोतो के अन्दर इतना अन्तर क्यों है ?

साधु महात्मा पूरे धैर्य के साथ उसकी सारी बात सुनते रहे।

साधु महात्मा बोले- ये कुछ नहीं राजन। ये सब संगति का असर है। डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करता है। और उनकी भाषा बोलने लगता है।

जो जिस वातावरण में रहता हैं। वो वैसा ही बन जाता है।
कहने का मतलब ये हैं की-

मूर्ख भी समझदार लोगो के साथ समझदार बन जाता है और अगर समझदार इन्सान मूर्खों की संगत करता है उनके साथ रहता है। तो वो भी मूर्खों की तरह बन जाता है।

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बहुत समय पहले की बात है

Moral stories in hindi for kidsएक गांव में एक लड़का रहता था। बह बहुत ही ग़ुस्सैल था। छोटी-छोटी बात पे अपना आपा को बैठता और लोगों को बुरा भला कहता।

उस लड़के से परेशान होकर उसके पिता ने कीलो से भरा थैला दिया और कहा-अब जब भी तुम्हें गुस्सा आये तो तुम इस थैले में से एक कील निकलना और बाड़े में ठोक देना।

अगले दिन उस लड़के को चालीस बार गुस्सा आया इतनी ही कीले उसने उस बाड़े में ठोक दी। धीरे धीरे थैले में कीलो की संख्या घटने लगी।

फिर उस लड़के ने सोचा इतनी मेहनत करने से बेहतर हैं अपने गुस्से पे काबू पा लिया जाए। उसने कुछ ही हफ़्तों में अपने गुस्से पे बहुत हद तक काबू करना सीख लिया।

और फिर एक दिन ऐसा आया उस लड़के ने दिन में एक भी बार गुस्सा नहीं किया। जब उसने अपने पिता को ये बात बताई तो उसके पिता ने उसको फिर एक काम दे दिया।

उन्होंने कहा- अब जिस दिन तुम्हें एक बार भी गुस्सा ना आए बाड़े में से एक कील निकाल देना। लड़के ने ऐसा ही किया।

और बहुत दिन बाद एक ऐसा दिन आया जब लड़के ने बाड़े में लगी आख़री कील को भी निकाल दिया और तब वो पिता के पास खुस होकर गया। उसने पिता को ये बात बताई।

तब पिता जी उसका हाथ पकड़ कर उस बाड़े के पास ले गए और बोले- बेटे तुमनें बहुत अच्छा काम किया लेकिन क्या तुम बाड़े में हुए छेदों को देख पा रहे हो।

पिता जी बोले-अब वो बाड़ा पहले जैसा नहीं बन सकता जैसे वो पहले था
तुम गुस्से में कुछ ऐसा कह जाते हो। के वो शब्द इसी तरह सामने वाले इंसान के दिल पे गहरा घाव छोड़ जाते है।

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एक समय की बात हैं-

Moral stories in hindi for kids
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एक तालाब में तीन मछलियां रहती थीं। बे बहुत अच्छी दोस्त थे। बे तीनों तालाब में अपना समय ख़ुसी ख़ुसी बिताते थे।

और वो अच्छी अच्छी चीज़े खाया करती थीं।              जो पास के गांव से बह कर आतीं थी।

एक बार दो मछुआरों ने तालाब के पास से गुज़रते हुए मछलियों को देखा…

एक मछुआरा बोला- वो देखो मेरे ख़्याल से इस तालाब में बहुत सारी मछलियां होंगी।

दूसरा मछुआरा बोला- चलो कल को अपना जाल लेके आतें हैं जितनी चाहें उतनी मछलियां पकड़ेगें।          पहला मछुआरा बोला- ठीक है ये अच्छा सुझाब हैं। इन्हें बाज़ार में बेंचकर ढेर सारा पैसा कमा सकते हैं।।

जब तीनो मछलियों ने ये बात सुनी तो वो तीनो घबरा गए।फिर तीनों आपस में बात करने लगी।

पहली वाली बोली- मुझे लगता हैं हमें ये तालाब छोड़ देना चाहिए।।                                                          दूसरी वाली मछली बोली- नहीं मैं इस तालाब से नहीं जाऊँगी।।                                                           मेरा परिवार बहुत सालो से यही पे रहता हैं और मैं भी यही चाहूंगी मेरा बच्चा भी इस तालाब में रहकर बड़ा हो।

फिर पहली वाली दूसरी मछली से बोली- अच्छा मैं चली जाऊंगी तुम क्या सोंचते हो।

दूसरी वाली बोली- मैं यही रहूंगी फिर पहली वाली ठीक है फिर मज़े करो मैं जा रहीं हु। फिर वह  एक छोटे से झरने से कूद कर दूसरे तालाब में चली गई।

अब इस तालाब में दो दोस्त मछलियां रह गई दूसरे दिन मछुआरे बड़ा सा जाल लेकर तालाब में पहुँच गए ।।

दोनों मछुआरे आगे बड़े दोनों ने मछलियां पकड़ने के लिए जाल लगा दिया सभी मछलियां उस जाल में फस गई। पहला वाला मछुआरा झटपटाने लगा।

वह जल्दी पानी से बाहर आया।                            दूसरा दोस्त जाल में चुप चाप पड़ा रहा जैसे वो मर गया हो।

जब मछुआरे ने उसे देखा तो उसे लगा वो मछली मर गई हैं

और बोला- अरे ये मरी हुई मछली मैं इसे नहीं ले जाऊंगा उसने बापस उसे तालाब में फेंक दिया।Moral stories in hindi for kids

इस तरह मछुआरे ने दूसरे दोस्त को वाकी मछलियों के साथ पकड़ लिया दूसरा दोस्त अपना दिमाग लगा के मछुआरों से बच निकला।

शिक्षा :- हमें मुस्किल घड़ी में समझदारी से काम लेना चाहिए ना के घबराना चाहिए।

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बोनस में एक कहानी और ले जाओ

मछुआरा और उसकी पत्नी पहाड़ी पर रहते थे-

Moral stories in hindi for kidsएक सागर के करीब। हर रोज मछुआरा पहाड़ी पर जाता और रोजगार के लिए मछली पकड़ता। उससे पता था उसकी बीबी खुश नही है। बह हमेशा क्रोधित रहती।

एक रोज जब मछुआरा घर आया तब उसकी पत्नी उससे बोली- इस गन्दी कुटिया को देखो। मैं इसे दिन रात साफ करती हूं पर ये होती ही नही।

मछुआरा अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था इसलिये बह उससे कुछ नही कहता और हमेशा उसे खुश रखने की कोसिस करता।                                                   जब मछुआरा दो मछली पकड़ता तब उसकी पत्नी तीन की माग करती, जब मछुआरा आम लाता तब वह आडुओं की माँग करती।

वो कुछ भी नही कर पाता उसे खुश करने के लिए।
मछुआरा- ओ प्रिये! मैं तुम्हे खुश रखने के लिए क्या करूं?

पत्नी- इस गंदी, बदबूदार कुटिआ से मुझे बाहर निकालो तब मैं खुश हो जाउंगी। फिर एक दिन मछुआरा मछली पकड़ने गया। पानी बहुत शांत और नीला था।

वो बहाँ समुद्दर में अपना कांटा डाले बैठा था। कुछ घंटे बीत गए पर उसके हाथ कुछ न लगा और वो थक गया।
मछुआरा– हम्म! मेरे ख्याल से आज हमें फल खा कर गुजारा करना होगा। ओह रुको! मुझे कुछ महसूस हो रहा है।
उसने मछली पकड़ने की लकड़ी को जोर से पकड़ लिया और जोर से खींचने लगा।

मछुआरा– ओह ये तो बहुत भारी है, लगता है बहुत बड़ी मछली होगी। जब वो कांटा ऊपर आया तब वो हैरान रहे गया, एक छोटी और चमकीली मछली को देख कर। वो बहुत रंगबिरंगी और चमकने वाली मछली थी।

Moral stories in hindi for kids
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मछुआरा– ओ नीली और चमकीली मछली, पर ये इतनी भारी क्यों है? शायद इसने बहुत ज्यादा खा लिया होगा।
मछली– नही मछुआरे मैं इस लिए इतनी भारी नही हु।
मछुआरा– क्या! अभी अभी तुमने मुझसे बात की ये कैसे हो सकता है तुम मेरा नाम कैसे जानती हो?

मछली– मैं तुम्हारे बारे में और भी ज्यादा जानता हूँ। मैं कोई आम मछली नही हूँ। मैं एक जादुई राजकुमार हूँ।
कृपया मुझे जाने दो। बैसे भी मैं तुम्हे सुअदिष्ट नही लगूंगा। कृपया मुझे मत मारो।

मछुआरा– ओ कुछ मत कहो मैं अवश्य बोलने वाली मछली को नही मारूंगा। तुम जा सकती हो।।        मछली- ओह्ह धन्यवाद। फिर मछुआरा उसे पानी मे छोड़ देता है।

मछुआरा ये बात अपनी पत्नी को बताने के लिये बेताब था। वो दौड़ा दौड़ा गया और ये भूल गया कि आज उसके पास अपनी पत्नी को देने के लिए कुछ नही है।

मछुआरा प्रिये मुझे तुम्हे कुछ बताना है
पत्नी- क्या आज कुछ नही लाए।

मछुआरा– नही पर आज मैंने एक बोलने वाली मछली पकड़ी थी, उसने मुझे बताया कि वो एक जादुई राजकुमार है।
पत्नी- क्या! फिर क्या हुआ। मछुआरा– फिर क्या मैने उसे जाने दिए वो अब समुद्र में है। पत्नी- क्या! तुमने एक जादुई मछली पकड़ी और उसे ऐसे ही जाने दिया

तुमने ऐसा क्यों किया। हम गरीब और भूंखे हैं।
हम इस बदबूदार कुटिया में रहते हैं तुम कम से कम एक घर मांग सकते थे।

मछुआरा– वो हमें घर कैसे दे सकता था वो ऐसा कैसे कर सकता है। मछुआरा बोला हमे इसी में खुश रहना चाहिए जो हमारे पास है।

पत्नी- लेकिन मैं तब खुश रहूंगी जब मैं एक बंगले में रहूँ।
क्या तुमनें ये नही कहा कि वो एक जादुई राजकुमार था।
तुमनें उसकी जान बचाई वो कम से कम तुम्हारे लिए इतना तो कर ही सकता था। जाओ जाके उससे एक बंगला मांगो।

मछुआरा– थोड़ा हिचकिचाया और सागर की ओर गया पर वो हैरान हो गया था सागर का पानी थोड़ा हरा और पीला हो गया था।

मछुआरा-जादूई मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो। वो चमकीली मछली तुरंत ऊपर आ गई जैसे के वो उस मछुआरे का ही इन्तज़ार कर रही हो।

मछुआरा- मेरी पत्नी खुश नहीं हैं।

चमकीली मछली – वो चाहती क्या है मछुआरा।

उसे एक बंगला चाहिए।

चमकीली मछली– बापस जाओ उसे ये मिल चुका हैं । मछुआरा वापस गया और उसने देखा उसकी पत्नी एक बहुत ही ख़ूबसूरत लकड़ी के दरवाज़े पर खड़ी थी

वो बंगला बहुत ही सुन्दर और साफ़ सुथरा था और उसमें एक अँगीठी और फर्नीचर भी था। पत्नी बोली प्रिय ये देखो ये बंगला बहुत बड़ा और साफ़ हैं।

मछुआरा – हाँ ।और हमारे पास आग जलाने के लिए एक अँगीठी भी है।।                                              मछुआरा बोला- क्या अब तुम खुश हो हम यहां हमेशा के लिए रह सकते हैं।

पत्नी – हमेशा के लिए देंखेंगे इसके लिए चलो अब खाना खाकर सो जाते हैं।

उस रात पत्नी ठीक से नहीं सो पाई वो ये सोचती रही की  अब क्या मांगू। अगले दिन वो अपने पति का इंतज़ार कर रही थी नास्ते के टेबल पर।

इतने में उसका पति आ गया पत्नी बोली गुड मॉर्निंग पति देव देखो हमें ये घर नहीं चाहिए हमें एक महल चाहिए और मैं एक रानी बनना चाहती हु।

चमकीली मछली के पास जाओ उससे कहो हमें एक महल दें।                                                              मछुआरा बोला- तुम एक रानी क्यो बनना चाहती हो हमारे लिए ये काफी हैं।                                               पत्नी बोली इसका फैसला मुझे करने दो ।
उसके पास जाओ और मुझे एक रानी बनाओ।

मछुआरा हिचकिचाता सागर की तरफ गया उसने देखा नदी में आज पानी बैंगनी था। वह बोला जादू की मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो मछली फिर से बाहर आ गयी

वह बोला- मेरी पत्नी खुश नही है।                        मछली– उसे क्या चाहिए ।

मछुआरा बोला- उससे एक महल चाहिए हैं और रानी बनना चाहती हैं। मछली बोली वापस जाओ उसे मिल चुका हैं।
जब मछुआरा वापस गया तो उसने देखा पहले वाले घर की जगह एक ऊँचा सा महल था और उसके बड़े बड़े पीतल के दरवाज़े थे।

बहुत से नौकर इधर उधर आगे पीछे भाग रहे थे।       उसने अपनी पत्नी को एक सिंघासन पर बैठे देखा और उसके सर पर ताज़ था।

वह बोला- तुम अब एक रानी हो अब तुम खुस हो ना पत्नी बोली नहीं रानी बनना काफी नहीं हैं।

मैं अब समराग्गी बनना चाहती हु।                           पति बोला- क्या!!!                                          मछली तुम्हें समराग्गी नहीं बना सकती ये नामुम्किन हैं।

तुम उस मछली के बारे में नही पता, तुम बहाँ जाओ और मुझे समराग्गी बनाओ।

मछुआरा हिचकिचाता हुआ सागर की तरफ़ गया इस बार पानी भूरा था बह सोचने लगा इसका क्या कारण हो सकता है।

वह फिर से बोला- जादू की मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो।
ये सुनते ही चमकीली मछली फिर से ऊपर आ गई।

मछुआरा बोला- मेरी पत्नी खुस नहीं है मछली बोली अब उसे क्या चाहिए।

वह बोला वो समराग्गी बनना चाहती हैं।
मछली बोली– वापस जाओ वो बन चुकी हैं ।          मछुआरा महल की तरफ़ वापस आया खुद से ये सोंचते हुए क्या अब उसकी पत्नी खुस होंगी।

जब वो महल पे पहुंचा अब वहाँ बड़े बड़े सोने के दरवाज़े थे उन पीतल के दरवाजों की जगह महल अब और भी बड़ा हो गया था। अंदर उसकी पत्नी एक सोने के संघासन पर बैठी थी एक हाथ मे सोने का गोला था और एक हाथ में सोने का डंडा।

मछुआरा बोलाप्रिय अब तुम सच मे समराग्गी हो। उसकी पत्नी बोली- हाँ मैंने तुम्हें बताया था वो मछली सब कुछ कर सकती हैं।

मछुआरा बोला- हाँ तुमनें बोला था क्या तुम अब खुस हो
पत्नी- पता नहीं ख़ैर आज मेरा दिन बहुत बियस्त रहा।

मछुआरा डर रहा था पत्नी अब एक और माँग रखेगी पर वो पूरा दिन भर की भाग दौड़ में थक गया था जैसे ही वो लेटा वो सो गया था । पर पत्नी सो ना सकी वो बैठ कर सोचती रही के उससे क्या खुस करेगा।

एक सफ्ताह गुज़र गया हर रात मछुआरा प्राथना करता था अपनी पत्नी को खुस करने की। हर रात पत्नी बिस्तर पर बैठी रहती चाँद और तारो को निहारती हुई।

अंत में एक रात वो सोचते सोचते थक गई । वो आराम करना चाहती थीं पर वो बोली- सुबह भी हो गई सूरज को भी पता होना चाहिए मैं एक सफ्ताह से सोई नहीं उसकी हिम्मत कैसे हुई उगने की।

पतिदेव उठ जाओ मैं सूरज और चाँद को नियंत्रित करना चाहती हु।

मैं नहीं चाहती वो मेरी आज्ञा के बिना हिले भी मैं सर्वशक्तिमान बनना चाहती हूं। पति बोला क्या…. ।  कृपया कर के ये बंद करो । मैं वापस जाकर अपनी जान को जोख़िम में नहीं डालना चाहता।

पत्नी बोली- तुम हमारी जान को जोख़िम में नहीं डालोगे।मैं हम दोनों की ज़िन्दगी की मालिक बनूगी कुछ भी हमे नुकसान नहीं पहुँचाएगा।

मछली के पास जाओ मुझे सर्वशक्तिमान बनाओ ।।     पति बोला- नहीं प्रिय तुम्हें पता नहीं तुम क्या माँग रही हो।

पत्नी बोली- मैं अब इसे और नहीं सह सकती तुम अभी इसी समय नहीं गए तो मैं और परेशान हो जाऊंगी। बहुत ज्यादा परेशान।

मछुआरा अपनी पत्नी को खुस रखना चाहता था पर वो जानता था ये गलत है। बाहर सागर पर बादलो ने घेरा डाल दिया था और हवा दहाड़ रही थी। ओह ये कब खत्म होगा ये बहुत ग़लत हैं।

मछुआरा बोला पानी आज इतना काला क्यो हैं?

मुझे तो बहुत डर लग रहा है। वह बोला जादू की मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो मछली फिर से ऊपर आ गई। मछुआरा बोला- मेरी पत्नी अब भी खुस नहीं है मछली बोली आख़िर अब वो क्या चाहती हैं?

वो सर्वशक्तिमान बनना चाहती हैं।

मछली बोली– वापस जाओ वो ये पा चुकी हैं।

मछुआरा तेज़ी से वापस भागा।।                               वह बोला- मुझे पता नहीं मेरी पत्नी को क्या बना दिया है मुझे जल्दी से जाना चाहिए।

मछुआरा महल में पहुँचा तो उसने देखा उसकी पत्नी वहाँ नहीं थीं। उसने ढूंडा वो कही नहीं मिल रही थी और ढूंडा और ढूंडा।

वो वापस सागर की तरफ़ गया पानी अब सांत था। बादल हट गए थे और सूरज चमक रहा था।

वो फिर से सागर की तऱफ गया और बोला जादू की मछली ओ जादू की मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो। ये सुनते ही मछली फिर से ऊपर आ गई।

मछुआरा बोला- तुमनें मेरी पत्नी के साथ क्या किया है मछली बोली– मैंने उसे वरदान दिया है वो सर्वशक्तिमान और आज्ञयात बनना चाहती थीं हैं ना क्यो मैने सही कहा ना और अब वो वही है।

किसी ने सर्वशक्तिमान को आज तक नहीं देखा अब वो आज्ञयात हैं हर एक के लिए।

मछुआरा बोला- कृप्या उसे मुझे वापस लौटा दो ।    मछली बोली– मैं वरदान पलट नहीं सकता।          मछुआरा बोला- रुको मुझे पता है आज तक मैंने अपनी पत्नी के लिए क्या माँगा हैं।

तुमनें उसकी सारी इच्छाएं पूरी की है लेकिन मैं वो हु जिसने तुम्हारी जान बचाई हैं मुझे मेरा वरदान दो।

मछली बोली हु…. तुम सही हो बोलो तुम क्या चाहते हो। मछुआरे ने गहरी सांस ली और बोला मैं चाहता हूं मेरी पत्नी हमेशा खुस रहे।

मछली बोली– वापस जाओ मित्र उसके पास वो सब कुछ हैं जो कुछ उसे खुस रहने के लिए चाहिए।

पति तेज़ी से घर की तरफ़ वापस आया वो हैरान हो गया उसने अपनी पत्नी को छोटी सी कुटिया के दरवाज़े पे खड़ा देखा।

पर अब वो बदबूदार नहीं थीं वो अपनी पत्नी की तरफ़ दौड़ा और उसे गले लगाते हुए बोला- ओ प्रिय तुम वापस आ गई।

पत्नी बोली हां प्रिय मैंने जान लिया है महल और सिंघासन खुसी नहीं ख़रीद सकते चलो अब घर चले। उस दिन के बाद से मछुआरा और उसकी पत्नी एक दिन भी भूखे नहीं रहे और वो हमेशा राज़ी खुसी रहने लगे।

 

 

 

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