Top 10 best hindi short stories with moral - moral kahani

Top 10 best hindi short stories with moral – moral kahani

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Hindi short stories with moral

(Hindi short stories with moral)

एक बार एक भेड़िये ने एक बकरी को दूर पहाड़ पर घास चरते देखा।

बह बकरी से बोला-

बकरी बहन क्या तुम्हे उचाई से डर नही लगता कही गिर गई तो?

बकरी ने जबाब न दिया बह अपने काम मे लगी रही। भेड़िया बोला-बहाँ तो खूब ठंड है और कही बचाव की जगह भी नही।

बकरी फिर भी चुप रही और बही पे घास चरती रही।

भेड़िया आखिर ज़ोर से बोला- बहाँ से  यहाँ की घास ज्यादा मीठी है।

इस पर बकरी बोली- भाई एक बात तो बताओ, तुम्हे मेरे भोजन की फिक्र है या अपने भोजन की।

शिक्षा : –  दुसरो के बेहकाबे में ना आये

 

(Hindi short stories with moral)

Hindi short stories with moral

क गांव में एक युवक रहा करता था-

बह युबक बहुत मेहनती था और अपने जीवन मे बहुत सफल व्यक्ति बनना चाहता था।
परंतु बह युवक किसी भी कार्य को करना शुरू करता तो बोह कार्य थोड़ा बहुत बढ़ने के बाद बन्द हो जाता था।

इस तरह अपने कई कार्यो में असफल होने के कारण बह युवक बहुत परेशान रहने लगा था।
और बह उस रहस्य का पता लगाने लगा था जिससे लोगों को सफलता मिल जाती हो।

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सबसे बड़ा ज्ञान( a inspirational story)

त्यागी पेड़( a ugly truth)

काफी समय तक उस युवक को सफलता पाने का रहस्य नही मिल पाया तब बह बड़े ही आधयात्मिक गुरु सुकरात के पास गया।

और उसने गुरु सुकरात को सारी बात बताई। सारी बात सुनने के बाद गुरु सुकरात ने अपने सामने बैठे हुए कई भक्तो को देखते हुए कहा- मैं तुमको ये राज़ सब के सामने नही बता सकता हूँ।

मैं शाम को अकेला नदी में स्नान(नहाने) के लिए जाता हूँ तुम मुझे बहाँ आकर मिलो, तब मैं तुम्हे सफलता का रहस्य अवश्य बताऊंगा।

युवक बहुत खुश हुआ और शाम को नदी के किनारे पहुच कर सुकरात से बोला- गुरु जी कोई यहां आए इससे पहले मुझे सफल होने का रहस्य बतला दीजिये।

सुकरात उस युवक को नदी के अंदर ले गए जहां पानी गले तक गहरा था।
युवक कुछ समझ पाता इससे पहले सुकरात ने युवक का सर पकड़कर पानी मे डुबो दिया।(hindi short stories with moral)

युवक अपना सर पानी से बाहर निकालने के लिए बुरी तरह झटपटने लगा, उसने सर बाहर निकलने के लिए अपनी पूरी जान लगा दी।

फिर कुछ देर बाद सुकरात जी ने युवक का सर पानी से बाहर निकाला। युवक हांफता हुआ बहुत तेज तेज सांस लेने लगा।
युवक के शांत होने के बाद सुकरात जी ने उससे पूछा-
जब मैंने तुम्हारा सर पानी मे डुबोया था तब तुम सर को बाहर निकालने के लिए इतना जोर क्यों लगा रहे थे ?

क्योकि मैं कैसे भी करके सांस लेना चाहता था, मैं चाहता था कि मुझे कैसे भी बस सांस मिल जाये।

तब सुकरात जी ने युवक से कहाँ बस यही सफलता का रहस्य है।

जब तुम अपनी सफलता को अपनी सांसो की तरह जरूरत बना लोगे की वो तुम्हे कैसे भी करके चाहिए
तब तुम जरूर सफल होंगे।

युवक के सबकुछ समझ आ जाता है और वो खुशी खुसी बहाँ से चला जाता है।

शिक्षाहमे अपने लक्ष्य की तरह बिना रुके और जी जान से बढ़ना चाहिए, उसे पाने की पूरी कोसिस करनी चाहिए।

 

(Hindi short stories with moral)

बहुत पहले की बात हैं-

Hindi short stories with moral

एक आदमी गुब्बारे बेंच कर जीवन-यापन करता था।
वह आस-पास के गांव के मेलों में जाता और ग़ुब्बारे बेचा करता था।

बच्चों को पसन्द आएं इस तरह के वो गुब्बारे रखता, लाल, पीले, हरे, लीले, और जब कभी उसे लगता बिक्री कम हो रही हैं। वह झट से एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता।

जिसे उड़ता देख बच्चे खुस हो जाते और गुब्बारे ख़रीदने आ जाते।

इसी तरह वह एक दिन मेले में गुब्बारे बेंच रहा था। और बिक्री बढ़ाने के लिए वीच-वीच गुब्बारे उड़ा रहा था पास ही खड़ा एक बच्चा बड़े शौक के साथ ये सब देख रहा था।

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इस वार जैसे ही गुब्बारे वाले ने एक सफ़ेद गुब्बारा हवा में उड़ाया वह बच्चा तुरंत उसके पास पहुँचा और बड़ी मासूमियत से बोला– अगर आप ये काला वाला गुब्बारा छोड़ेंगे तो क्या ये भी ऊपर जायेगा ?

गुब्बारे वाले ने थोड़ा अचरच के साथ उसे देखा और

बोला- बिल्कुल जाएगा बेटे।

गुब्बारे का ऊपर जाना इस बात पर निर्भर नहीं करता के वो किस रंग का हैं। बल्की इस बात पर निर्भर करता हैं के उसके अन्दर क्या हैं

शिक्षा :- दोस्तो ठीक इसी तरह ये बात हम लोगों पे भी लागू होती हैं। कोई अपनी ज़िन्दगी में क्या कामयाबी हासिल करेगा ये वात बाहरी रंग रूप पे निर्भर नहीं करती हैं। निर्भर करता है कि हमारे अन्दर क्या हैं।

Hindi short stories with moral

Hindi short stories with moral

एक बार चार मित्र अपने कॉलेज के समय के प्रोफेसर से मिलने के लिए पहुचे। प्रोफेसर अब बूढ़े हो चुके थे।

बे उन चारों को देख कर बहुत खुश हुए।
कुछ देर बातें कर ने के बाद प्रोफेसर उनके लिए चाय बनाने के लिए अंदर गए।

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जैसे को तैसा

मेहनत बड़ी या अक्ल

बे चारो अपनी अपनी परेशानियां एक दूसरे को बताने लगे- कोई बोल रहा था कि मेरी सैलरी बहुत कम है,
कोई बोल रहा था मेरे पास गाड़ी नही है,
कोई कह रहा था कि मुझ पर बहुत कर्ज़ है।

बे अपने जीवन से खुश नही थे।

प्रोफ़ैसर उनकी बातें बहुत ध्यान से सुण रहव थे
उन्होंने 4 सुंदर कप लिए-
1. सोने का
2. चांदी का
3. काच का
4. साधारण

प्रोफेसर से चारो को आगे चाय रखी तो चारो ने एक एक कप उठा लिया।

प्रोफेसर ने देखा कि सोने का कप सबसे पहले उठा लिया गया, फिर चांदी का, फिर काच का और आखिर में जब कोई चॉइस न बची तो साधारण

प्रोफेसेर ये देख कर मुस्कुराने लगे।
चारो ने उनके मुस्कुराने का कारण पूछा।
प्रोफेसर ने बताया कि मैं तुम्हारी बातें सुन रहा था।

इसी लिए मैने चारों कप अलग अलग लिए थे।
बे कुछ समझें नही तो प्रोफेसर ने उन्हें विस्तार में समझाया-

की ये चाय जीवन की तरह है और ये कप चाय पीने नज़रिया मात्र है। सबको पीना तो चाय ही है लेकिन
पहले सोने का कप उठाया गया फिर चांदी का।

जबकि मिट्टी के कप में भी बही चाय है जो सोने के कप में है।
उसी तरह जीवन भी एक चाय है जो सबके लिए समान है। लेकिन लोग सांसारिक चीजो जैसे- अच्छी जॉब, बड़ी गाड़ी, बड़ा बंगला, आदि के पीछे भागते हुए सारा जीवन दुख में ही निकाल देते हैं।

और जीवनरूपी चाय का आनंद नही उठा पाते।

इसी तरह क्या फर्क पड़ता है कि कप मिट्टी का है या सोने का पीना तो हमे आखिर चाय ही है

शिक्षाइसी तरह सांसारिक चीजो के मोह में क्यों जीवन बर्बाद करते हो जीवन का आनंद लो। अपने लक्ष्य की और पूरा एफर्ट दो लेकिन खुश रहकर।

 

(Hindi short stories with moral)

बहुत दिनों पहले की बात हैं-

Hindi short stories with moral

अजय अपनी माँ बाप के साथ एक गांव में रहता था।
एक दिन अजय स्कूल से घर लौटा तो।
माँ ने पूछा आज बेटा क्या बात है ? परीक्षा में प्रशन-पत्र ठीक नहीं था क्या?

अजय ने बोला माँ. मै स्कूल देर से पहुँचा। मेरी बस छूट गई थी।
पिता जी ने कहां बेटा. समय की परवाह करनी चाहिए। समय का बड़ा महत्व है।

अजय ने कहां पिता जी. समय ना रहते मैं पूरा प्रशन-पत्र हल ना कर पाया। आखरी प्रशन रह गया। पिता जी ने बोला तुम्हें मालूम है। अगर वक़्त पर स्टेशन ना पहुँचे तो रेलगाड़ी छूट जाती हैं।

माँ ने बोलाअजय ये सच है। की समय के आभाव में अच्छे-अच्छे मौके निकल जाते हैं।
पिता जी ने बोला। इसीलिए बड़े-बूढ़े कहते हैं। समय ही धन हैं। वह अनमोल हैं।

अजय ने बोला – माँ. अब मैं वादा करता हूं। की अपना हर काम ठीक समय पर करूँगा। माँ ने बोला अजय बेटा। सभी महापुरुष समय के पाबंद थे. जैसे महात्मा गाँधी. लाल बहादुर शास्त्री.
डॉ. राजेंद्र प्रसाद. आदि नेता समय के बड़े पाबंद थे।

वे अपना-अपना काम ठीक समय पर किया करते थे।
उनके जीवन मे आलस्य के लिए कोई जगह नहीं थीं।
इसीलिए उन्हें जीवन में सफलता मिली थी।

पिता जी ने बोला-ठीक है जो हुआ सो हुआ। अजय तुम जाओ हाथ-मुँह धोकर नास्ता कर लो।

शिक्षासमय ही धन है इसे बर्बाद न करें बरना ये आपको बर्बाद कर देगा

 

(Hindi short stories with moral)

एक समय की बात हैं-

Hindi short stories with moralएक चींटी जंगल में रहती थीं वो बहुत मेहनती थीं।।       वो रात दिन मेहनत करके अपने परिवार के लिए चीज़े इकट्टा करती चाहें गर्मी हो या सर्दी।

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चींटी अपने बच्चो का पेट भरने के लिए बहुत मेहनत किया करती थीं और सिर्फ इतना नहीं वो ज्यादा खाना लाती और उसे बचा कर रखती।

उसी जंगल में एक अलसी टिड्डा रहता था वो पूरा दिन खाली घूमता जैसे हम कहते हैं खाली घर शैतान का घर होता हैं ऐसे ही टिड्डा, चींटी से जलता था।

क्योंकि वो मेहनत किया करती थीं। और एक दिन वो चींटी के रास्ते मे आ गया और बोला- ये खाना लेकर कहां जा रही हो।

चींटी बोली हट जाओ मेरे रास्ते से तुम्हें इससे क्या लेना देना मुझे अपना काम करने दो।

टिड्डा बोला– तुम्हें इतनी मेहनत करने की क्या ज़रूरत हैं चींटी? और वैसे भी तुम्हारे पेट मे कितना खाना आ जायेगा।

चींटी बोली– टिड्डे तुम्हें काम करने की महत्त्व बिल्कुल नहीं पता हैं ना।

टिड्डा बोला– मैं काम क्यू करू मैं जब चाहता हु मुझे मेरा खाना बड़े आराम से मिल जाता हैं।

चींटी बोली– बुरा वक़्त कब आ जाये तुम्हें क्या पता बुरे वक़्त के लिए खाना बचाना चाहिए।

टिड्डा बोला– तुम सच मे पागल हो।                          चींटी– तुम जो भी कहो। चींटी ये कहकर वहां से चली गयी।

फिर कुछ दिनों बाद वहां अकाल पड़ गया और वारिश भी नहीं हुई और सब कुछ सूखने लगा पूरा जंगल सुख गया।धीरे धीरे जानवर मरने लगे।

क्योंकि ज़मीन पर सूखा होने की वजह से खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा। टिड्डे की भी हालत ख़राब हो गई।

टिड्डा– मुझे खाना चाहिए अगर मुझे जल्दी खाना नहीं मिला तो मैं भी बाकी जानवरो की तरह मर जाऊंगा।    अब मैं क्या करूँ और टिड्डा रोने लगा।                      फिर उसने देखा चींटी खाना खा रही हैं।

फिर वह बोला- ये तुम्हें कहां से मिला चींटी बोली ये मुझे बहुत समय पहले मिला था इसे मैंने बचा के रखा था।  तुम्हें याद हैं जब तुम मुझे चिड़ा रहे थे।

तब मैं यही कर थीं।टिड्डा बोला- तुम्हारे पास और हैं चींटी बोली मेरे साथ आओ फिर चींटी टिड्डे को अपने घर ले गई।

और वहां जाके टिड्डा खाना देख के बोला- यहां तो बहुत खाना हैं फिर चींटी ने टिड्डे को खाना खिलाया और टिड्डे ने चींटी का सुक्रिया अदा किया।

फिर चींटी बोली- अब तुम समझ गए होंगे के खाना बचा के रखना कितना जरूरी होता हैं।

शिक्षा : – हमे अपना काम पूरी मेहनत और लगन के साथ करना चाहिए।

 

(Hindi short stories with moral)

बहुत समय पहले की बात है-
एक गांव में दो मित्र रहा करते थे, जिनमे से एक अंधा था और एक लंगड़ा

दोनों में गहरी मित्रता थी।
एक दिन गांव में बहुत भयंकर आग लग गयी।
सभी गांवबासी अपने घर छोड़ कर भागने लगे।

लगड़ा ये देख कर बहुत डर गया, उसने अंधे को बताया कि गाँव मे बहुत तेज आग लग गयी है।

बे दोनों बहुत घबरा गए कि अब क्या करें क्योंकि-
लगड़ा भाग नही सकता था और अंधा आखिर कहां जाता।

दोनो ने लोगो को बहुत आवाज़ दी पर किसी ने उनकी ओर ध्यान नही दिया, क्योंकि सब अपनी जान बचा रहे थे।
धीरे धीरे आग और तेज बड़ रही थी, और गांव कर लोग गांव छोड़ कर भाग चुके थे।

अब केवल अंधा और लगड़ा ही बचे थे।
तब अंधे ने एक तरकीब लगाई उसने लगड़े से कहा-
मित्र अब बचने की एक ही तरकीब है तुम मेरे काँधे पर बैठ जाओ।

Hindi short stories with moralमैं चलूंगा और तुम मुझे रास्ता बताना।
फिर बे दोनों भी अपनी जान बचा लेते है।

शिक्षामुसीबत के समय घबराना नही चाहिए और हमेशा समझदारी से काम लेना चाहिए।

 

(Hindi short stories with moral)

एक बार एक लड़का एक खिलौने बचने वाले के पास खड़ा था
Hindi short stories with moralतभी बहाँ एक कार आकर रूकती है, उसमे से एक आदमी निकलता है।
बो खिलौने खरीदता है और कार में बैठ जाता है।
तभी उस आदमी का ध्यान खिलौने वाले के पास खड़े उस लड़के के पास जाता है।

बह लड़का उसकी कार को बहुत गौर से देख रहा था,
तभी आदमी उसे अपने पास बुलाता है और कार में बैठने के लिए बोलता है।

लड़का जल्दी से कार में बैठ जाता है।
आदमी कहता है तुम इस कार को इतनी गौर से क्यों देख रहे थे ?
क्या ये तुम्हे बहुत अच्छी लग रही है ?

लड़का हाँ ! बहुत अच्छी लग रही है।
आदमी- तो तुम्हे आगे तक ले चलो इसमे बैठ कर चलोगे।
लड़का खुसी से- हां साहब ले चलिए।

चलने के बाद आदमी ने कहा- तुम को एक बात बताऊ ये गाड़ी मुझे मेरे बड़े भाई ने गिफ्ट की है।

लड़के ने खुसीें से मुस्कुराते हुए सर हिलाया।

आदमी ने कहा- मैं समझ रहा हूँ कि तुम क्या सोच रहे होंगे।
लड़के ने कहा- बताइये साहब।

आदमी– तुम ये सोच रहे होंगे कि काश तुम्हारा भी कोई अमीर बड़ा भाई होता जो तुम्हे कार गिफ्ट करता।

लड़के ने कहा- नहीं साहब!

मैं ये सोच रहा था कि काश में एक अमीर आदमी होता जो अपने छोटे भाई को कार गिफ्ट करता।

शिक्षाहमेशा बड़ा सोचना चाहिए

 

(Hindi short stories with moral)

बहुत पुरानी बात है_

Hindi short stories with moral
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कहा जाता है के प्राचीन समय में एक गांव था। और उस गांव के मेन गेट के बाहर हर (पूर्णिमा) की रात ( full Moon Night) एक बहुत भंयकर (राक्षस) आया करता था।

जो आकर (गांव) वालों को ये चुनौती देता। आप अपना सबसे बलवान लड़का मुझसे (युद्ध) करने के लिए भेजो।
नहीं तो मैं सारे गांव वालों को तवाह कर डालूँगा।

(दोस्तो) ये हर (पूर्णिमा) की रात राक्षस का आना ये (सिलसिला) काफ़ी समय से चल रहा था।(Hindi short stories with moral)

जैसे ही (पूर्णिमा) की रात नज़दीक आती
सभी (गांव) वाले डर जाते क्योंकि वो उस (राक्षस) से डरते थे।

और आजतक जो भी नौजबान जो भी (राक्षस) से लड़ने गया कोई भी जीता नहीं था सभी मारे गए थे।

अब हालात ये हो चुके थे के कितने सालो से ये चलता आ रहा था। ये मान लीजिए एक (वलिदान) की एक रीत एक प्रथा बन के रह गई थी।

और (गांव) वाले सहमे हुए थे। कोई भी (नौजवान) ये हिम्मत नहीं कर पाता के उससे मुकाबला किया जाये (गांव) वाले मन ही मन हार मान चुके थे। और जो वियक्ति मन में हार मान जाए

उसका वास्तविकता (reality) में जीत पाना बड़ा मुश्किल है।

ये (गांव) वाले उस (राक्षस) का मुकाबला करने मे खुद को बड़ा असमर्थ (Unable) समझते थे।
(नौजवान) लड़ने नहीं बल्कि बलि का बकरा बन के निकलते थे।
और आज भी ऐसे ही (पूर्णिमा) की रात थीं। सारे (गांव) वाले बड़े सहमे बैठे हुए थे। और दुःख में थे। आज फिर से उनके (गांव) से एक (वलबान) बच्चा मारा जाएगा।

फिर कुछ देर बाद गांव के गेट पे जहाँ ये भीड़ इकट्ठा थीं। वहाँ से एक (घुड़सवार) निकल रहा था। (घुड़सवार) ने भीड़ इकट्ठा देख अपना (घोड़ा) रोका। (घोड़े) से नीचे उतरा (गांव) के (बुजुर्ग) जो बात कर रहे थे उनसे पूछने लगा क्या बात है। ये इतनी भीड़ क्यो इकट्ठा हैं।

Hindi short stories with moral
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(बुज़ुर्गों) ने उस (घुड़सवार) को जो देखने में एक (योद्धा) लग रहा था। अपनी (दुःख) भरी कहानी सुनाई और  उन्होंने बताया हर (पूर्णिमा) की रात उनका एक बच्चा (बलिदान) होता हैं।

और आज फिर एक (नौजवान) की मरने की मरने की बारी है। इसलिए वे सब (दुःखी) है।

तो उस (योद्धा) ने इन सबकी बात बहुत ही ध्यानपूर्वक (Carefully) सुनते हुए बाद में उनसे पूछा उनसे इज़ाज़त मांगी क्या आज मैं इस (राक्षस) का मुकाबला कर सकता हूँ।

(गांव) के लोगों ने हैरान हुते हुए कहा जी ज़रूर।

अब ये (योद्धा) गांव के मैन दरबाजे के बाहर इन्तज़ार कर रहा है। (राक्षस) का ।
और उसने देखा के दूर सामने लंबा और भयानक एक

(राक्षस) नज़र आ रहा है। जो लगभग बीस फुट का हैं।
(योद्धा) अपने (घोड़े) पे सवार हुआ और ये देख रहा है। (गांव) वालों को (ललकार) रहा है।

(योद्धा) ने पूरे जोश के साथ उस दिशा में जाना शुरू किया जिस दिशा में (राक्षस) नज़र आ रहा है।
वो जैसे ही अपनी तेज़ी पकड़ता गया इसने एक बहुत ही (दिलचस्प) चीज़ देखी दोस्तों………
जैसे जैसे (योद्धा) (राक्षस) की तरफ़ बड़ रहा था। वेसे वेसे उसकी लम्बाई कम होती नज़र आ रही थीं।

(राक्षस) जो बीस फुट का नज़र आ रहा था क्योंकि अब (योद्धा) उसके आधा रास्ता उसके क़रीब पहुँचा तो सिर्फ दस फुट का नज़र आ रहा था।

और उस(योद्धा) को और जोश मिला और उर्जा (Energy) मिली वो आगे बढ़ता गया।

उसने देखा उस (राक्षस) की लंबाई और कम होती नज़र आ रही है।

और उसके पास पहुँच कर ये देखने पर हँस पड़ा। के वो (राक्षस) नहीं एक बौना था जो रेत के डीले पे चढ़ा था। (घुड़सवार) अपने घोड़े से उतरा अपनी तलवार निकालकर उसने एक वार से बौने का सर धड़ से अलग कर दिया।

दोस्तो ये बौना जो (राक्षस) बनकर पूरे गांव को मुट्ठी में लिए हुए था। इसका नाम सायद आप भी जानते हैं।
और मैं भी जानता हूँ। इसका नाम है (डर) भय (Fear)
(That’s A Name Of This Particular Evil)

ये डर दोस्तो एक ऐसी चीज़ है। जो हमारी छोटी सी मुश्किल को एकाधिक (Multiple) कर के उसे बहुत बड़ा बना देता है।

(Actual) में परेशानी इतनी बड़ी होती नहीं है।

चूंकि हम उससे दूर से देख रहे हैं। और हम डर गए हैं उस चीज़ से हमें कई गुना ज्यादा नज़र आती हैं।

और हमारे ऊपर हावी हो जाती हैं। हमारी सोचने की शक्ति को ब्लॉक कर देती हैं। वो परेशानी इस (बौने) के साइज की होती हैं।
और हमें वो (राक्षस) बीस फुट का नज़र आता हैं। ये गलती हम अक्सर कर देते हैं अपनी (ज़िन्दगी) में।

(मुश्किलों) में भागे मत इस योद्धा की तरह हिम्मत से मुश्किलों का सामना करे। और हम ये पाएंगे के जैसे-जैसे हम हिम्मत के संग अपने कदम अपनी (मंज़िल) या मुश्किल की तरफ़ बढ़ाएंगे
जो चीज़ बीस फुट बड़ा (राक्षस) नज़र आ रहा था।

वो एक महज छोटा सा बौना बन जायेगा। बड़ी (आसानी) से मुकाबला कर सकते हैं और हम जीत सकते हैं।

यही चीज़ हमें हर वक़्त ध्यान मे रखनी है। के जितना हम अपनी (प्रॉब्लम्स) को करीब आकर देखेंगे आपकी नज़र में वो उतनी ही छोटी लगती जाएंगी

हमें इस कहानी से तीन (शिक्षा) मिलती हैं। जो मैं आप लोगो से शेयर करना चाहूंगा।

(1) शिक्षा:- दूर से हर छोटी (मुश्किल) भी भयंकर संकट लगती हैं। हिम्मत से जब आप आगे बढ़ते हैं एक वली के बकरे की तरह नही एक (योद्धा) की तरह आप ये पाते हैं वो बड़ी मुश्किल भी छोटा होना शुरू हो रही हैं।

 

 

(Hindi short stories with moral)

बहुत समय की बात हैं_

Hindi short stories with moral

एक गांव था वहां एक (मूर्तिकार) रहता था। एक बार उसे (मूर्ति) बनाने के लिए पत्तरों की ज़रूरत पडी।
वह जंगल की ओर जाता है। जंगल में इधर-उधर पत्तरों की तलाश करता है। तो उसे एक पत्थर दिखाई देता है।
जो (मूर्ति) बनाने के लिए सही होता हैं।

वह उस (पत्थर) को उठा के अपनी गाड़ी में रख लेता हैं।
कुछ दूर जाने के बाद उसे एक और पत्थर दिखाई देता हैं।
वह उसे भी उठा के अपनी गाड़ी में रख लेता हैं।
और अपने गांव की ओर चल देता हैं।

जब वह उस (पत्थर) पे चोट मारने लगता हैं तो उस (पत्थर) में से आवाज़ आती हैं।
(पत्थर) बोला- रूक जाओ मुझे मत मारो।

कृप्या करके मुझपर हथौड़ा मत चलाओ। मुझे हथौड़ा से बहुत डर लगता हैं। अगर तुम मुझपर हथौड़ा चलाओगे तो मैं टूट जाऊंगा बिखर जाऊंगा कृप्या करके मुझे छोड़ दो किसी और (पत्थर) से मूर्ति बना लो।

उसे उस (पत्थर) पर दया आ जाती हैं। वह उस (पत्थर) को छोड़कर दूसरा पत्थर उठा लेता हैं।
मूर्तिकार बोला-हु ये पत्थर बढ़िया लग रहा है इससे (मूर्ति) बनाता हूँ। यह सोंचकर वह उस (पत्थर) पर ज़ोर-ज़ोर से चोट करना शुरू करता है।
और इस बार पत्थर से कोई आवाज़ भी नहीं आती है।

कुछ ही देर में (मूर्ति) बनकर तैयार हो जाती हैं।
और फिर गांव के मंदिर में मूर्ति की स्थापना का दिन आता हैं।
कुछ गांव वाले मूर्तिकार के घर जाते हैं।
और बोलते हैं- अरे भैया मोहन क्या तुमनें (मूर्ति) बना दी मंदिर में स्थापना के लिए ?

(मूर्तिकार) बोला- हाँ वो तो मैंने दो दिन पहले ही बना दी थी।
मैं तो आप लोगो का ही इन्तज़ार कर रहा था।
गांव वाले बोले-ये तो बहुत अच्छी बात है मोहन। चलो हम सब ये मूर्ति उठाकर मंदिर में स्थापना के लिए ले चलते हैं।

तभी एक व्यक्ति बोला- अरे भाई रुको मूर्ति के आगे एक (पत्थर) और भी तो रखना पड़ेगा जिससे लोग उस (पत्थर) पर नारियल फोड़ सके। वह व्यक्ति इधर-उधर देखता है ताकि उसे कोई (पत्थर) मिल सके।

तभी उसकी नज़र उस (पत्थर) पे पड़ती हैं जिसे (मूर्तिकार) ने छोड़ दिया था।
और वह व्यक्ति उस (पत्थर) को उठा लेता है।
व्यक्ति बोला- ये (पत्थर) बढ़िया लग रहा है और मजबूत भी हैं। जब लोग इसके ऊपर (नारियल) फोड़ेंगे तो (नारियल) फूट जाएगा।

और सब गांव वाले मंदिर की ओर चल देते हैं।
तभी उस (पत्थर) में से ज़ोर ज़ोर से आवाज़ आती है
अरे रुको मूर्ख लोगों मुझे कहाँ ले जा रहे हों ?
रुक जाओ मुझे कहीं नहीं जाना मुझे तो कठिन परिस्थितियों से डर लगता हैं।

रास्ते भर वह (पत्थर) ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाता हैं।
तभी सब गांव वाले मंदिर पहुँच जाते हैं।
और (मूर्ति) की स्थापना कर देते हैं। और उस (पत्थर) को उसके आगे रख देते हैं। फिर सब लोग उस (मूर्ति) की पूजा करना शुरू देते हैं।

(मूर्ति) बना हुआ (पत्थर) इससे बहुत खुश हो जाता हैं।
लोग इस पत्थर का दूध से इस्नान करते हैं और उसे चंदन का लेप लगाते हैं। और उसके ऊपर फूल चढ़ाते हैं।

दूसरा (पत्थर) ये सब देखकर (मूर्ति) बने हुए (पत्थर) से बोलता है।
अरे भाई तुमहारे तो मज़े हैं तुम्हें तो लोग दूध से स्नान कर रहे हैं। तुम्हारी पूजा कर रहे है।
तुम्हारे ऊपर फूलों की बारिश कर रहे हैं। तुम्हारी ज़िन्दगी तो बढ़िया हैं…. तभी एक व्यक्ति उस (पत्थर) पे नारियल फोड़ता हैं।

पत्थर बोला-अरे मर गया हाय मेरी कमर तो टूट ही गई हे प्रभु मुझे बचाओ अरे मूर्ख व्यक्ति मेरे ऊपर नारियल क्यो फोड़ रहा है।

तभी एक और व्यक्ति उस पत्थर पे नारियल फोड़ता हैं।
(पत्थर) बोला- हाय मर गया हे भगवान आज कहां फसा दिया आपने मुझे…..मैं तो जंगल में पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। यह आपने मुझे कहां फसा दिया ये सारे वियक्ति बारी बारी से मेरे ऊपर नारियल फोड़ फोड़ के मार ही डालेंगे।

ये सब देखकर (मूर्ति) बना (पत्थर) उसपर ज़ोर ज़ोर से हसने लगा।
हँसते देख दूसरा (पत्थर) बोला-तुम तो खुश होगे ही तुम्हारी सेवा जो हो रही हैं। तुम्हें तो मिठाइयां खाने को मिल रही हैं। लेकिन मेरी कमर की हालत विगाड़ दी इन इंसानो ने। हाय बहुत दर्द हो रहा है।

तब मूर्ति बना हुआ (पत्थर) दूसरे पत्थर से बोलता है-
दोस्त अगर तुमने भी थोड़ी परेशानी सह ली होती तो आज तुम मेरी जगह होते और लोग तुम्हारी पूजा कर रहे होते।
तुम्हें भी दूध और मक्खन से स्नान करवा रहे होते।

मूर्ति बना (पत्थर) लेकिन तुम उस दिन डर गए तुमनें आसान रास्ता चुना और आज तुम्हें कठनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
हम जब भी किसी परिस्थिति से डर के कोई भी आसान रास्ता चुनते हैं। उस वक़्त तो बहुत सुकून और आराम मिलता है।
पलभर के लिए खुसी भी मिल जाती हैं और आगे की राह और मुस्किल हो जाती हैं। मेरे (दोस्त)…....

तब उस (पत्थर) को अपनी भूल का एहसास होता हैं।
और वह (मूर्ति) बने (पत्थर) से बोलता है-

मुझसे गलती हो गई मैं समझ गया जो लोग मुस्किल परिस्थितियों से नहीं गबराते और जो उनका सामना करते हैं।
तो लोग उन्हीं का सम्मान करते हैं। आपने उस हथौड़ा की चोट सही कठिन परिस्थितियों का सामना किया इसलिए लोग आपकी पूजा अर्चना कर रहे हैं। मुझे अपनी गलती का एहसास हो चुका हैं। मैं अब किसी भी कठिन परिस्थिति से नहीं घबराऊँगा…….

शिक्षा : – मुस्किल वक़्त सबकी ज़िन्दगी में आता हैं। आज नहीं तो कल ज़रूर आएगा लेकिन क्या आप मुस्किल वक़्त का सामना करने के लिए तैयार है ? अपनी ज़िन्दगी का मज़ा ज़रूर लीजिए लेकिन पहले आने वाले मुश्किल परिस्थिति का सामना करने के बाद।

 

 

(Hindi short stories with moral)

एक सोनपुर गांव में अनाज़ का एक बहुत बड़ा ब्यापारी रहता था।

उसका कारोबार बहुत बड़ा था। कारोबार बड़ा था तो इसलिए उसे एक नौकर की ज़रूरत थीं।

उस ब्यापारी ने एक रामू नाम का नौकर रख लिया।       रामू को गांव में सभी लोग एक चोर की नज़र से देखते थे।

जब गांव वालों को पता चला के ब्यापारी ने रामू को काम पे रखा हैं सभी लोग ब्यापारी के पास पंहुचे और बोले-

सेठ जी ये रामू तो चोर हैं।(Hindi short stories with moral)

गांव में चोरी करता हैं अगर आप इसे काम पर रखोगे तो वह आपका सारा अनाज़ चुरा लेगा।।                        सेट जी ने गांव वालों की सारी बातें सुनी, फिर भी रामू को काम पे रख लिया।

और रामु  दुकान के कामो में उनकी मदद करने लगा।   कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा।

फिर एक दिन वयापारी को काम से दूसरे गांव जाने की ज़रूरत पड़ गई और ब्यापारी ने अपनी दुकान रामू को शौप जाने का निर्णय लिया।

और ब्यापारी बोला- रामू जब तक मैं गांव से बापस ना आ जाऊ तब तक मैं अपनी दुकान तुम्हें शौप कर जा रहा हु।मेरे आने तक दुकान ठीक से संभालना।

ये सुनकर रामू के मन में लालच आ जाता हैं वो पहले ही सोच लेता हैं जब सेट जी गांव से बाहर जाएंगे मैं सारा अनाज़ लेके भाग जाऊगा।।                                    क्योकी आखिर कार था तो वो चोर ही।

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जैसे ही ये बात ब्यापारी की पत्नी को पता चलती हैं वो दुकान पे दौड़ के आती हैं और बोलती हैं आप ये क्या कर रहे हैं इतनी बड़ी दुकान एक चोर के भरोसे कैसे छोड़ के जा सकते हैं।

ये तो सारा अनाज़ चुरा कर भाग जाएगा उनकी बातें रामू चुपके से सुन रहा होता हैं तभी अपनी पत्नी से ब्यापारी बोलता है-

अरे रामू ऐसा नहीं करेगा अगर उससे चोरी करना होती तो वो अब तक कर लेता लेक़िन वो तो बहुत मेहनती हैं मेरी बहुत मदद करता हैं मुझे उसपर पूरा भरोसा हैं।

मेरे आने तक वह हमारी दुकान अच्छे से संभाल लेगा देख लेना तुम।।                                                      ब्यापारी की बातें सुनकर रामू की आंखें भर आती हैं क्योंकि उसने अपने बारे में इतनी अच्छी बातें आज तक नहीं सुनी थी।(Hindi short stories with moral)

रामू को समझ नहीं आ रहा था के सेट जी इतनी बड़ी दुकान मुझे शौप कर क्यों जा रहे हैं ।।                        सेट जी मुझ पर इतना भरोसा करते हैं और एक मैं हूं उनकी गैर मौजूदगी में उनकी दुकान लूटने की सोच रहा हु।

उसे पछताबा होता हैं वह खुद से नज़र नहीं मिला पाता फिर जब ब्यापारी चला जाता हैं तो रामू उनकी दुकान सभाल ने लगता हैं ।

उसके मन मे चोरी करने का विचार तो आता हैं लेकिन उसे सेट जी की बातें याद आती हैं वह बातें याद आतें ही वो चोरी नहीं करता हैं ।

और सारे गांव वाले भी परेशान हो जाते हैं और बोलते हैं के इस रामू ने चोरी क्यों नहीं की ।

जब ब्यापारी बापस आ जाता हैं सारे गांव वाले ब्यापारी के पास जाकर कहते हैं सेट जी इस रामू ने तो आपकी गैर मौजूदगी में दुकान बहुत अच्छे से संभाली।

ये देखकर ब्यापारी और उसकी पत्नी बहुत खुस हो जाते हैं ब्यापारी रामू से बोलता है-

अरे वाह रामू तुमने तो मेरी गैरमौजूदगी में तो  दुकान बहुत अच्छे से संभाली । गांव के लोग भी तुमहारी तारीफ़ कर रहे हैं।

रामू बोलता है- आपकी वज़ह से ही मैं ये कर पाया हूं क्योंकि आपने मुझ पर इतना बिस्वास रखा।

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इसलिये ही मेरे अंदर इतना परिवर्तन आया है लोगो के बताने पर भी की मैं चोर हु फिर भी मुझे आपने काम पे रखा।

इसलिए मैं एक अच्छा इंसान बन पाया हूं मैं आपका दिल से सुक्रिया करना चाहता हु आपकी वज़ह से मै एक अच्छा इंसान बन पाया हूं।

सेट जी बोले- रामू दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं अच्छे और बुरे, बुरे इंसान को ज़िन्दगी एक बार मौका ज़रूर देती हैं ताकी वो अच्छा इंसान बन सके तुम्हें वो मौका मिला

और तुम उसपर खरे उतरे और सबको को दिखा दिया के तुम भी एक अच्छे इंसान हो रामू बोला आपका दिल से सुक्रिया सेट जी

शिक्षा : – कोई भी इंसान कितना भी बुरा क्यो ना हो अगर उसके साथ अच्छा बर्ताव अच्छा शिस्टाचार किया जाए और उसपर भरोसा रखने पे उसका मनो परिबर्तन हो सकता हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

Hindi short stories with moral

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