10+ Best Motivational Stories In Hindi for Success

Best Motivational Stories In Hindi for Success ये 10 कहानियों को पढ़ने के बाद आपकी सोच बदल जाएगी ये कहानियां आपको inspire motivate करेगी हम वादा करते हैं, यदि आप इन प्रेरक लघु कथाओं को हिंदी में गहराई से पढ़ेंगे तो आप उचित रूप से संतुष्ट होंगे।

Motivational Stories In Hindi for Success –  किसी बड़े काम को करने के लिये एक बड़ी energy चहिये होती है और वो energy आती है किसी की life story से, किताबों से, या फिर छोटी-छोटी कहानियों से।

Top 10 best Motivational Stories In Hindi For Success

 

》First opportunity

》शिकंजी का स्वाद

》हीरे की खान

》आख़री प्रयास

》आलस्य को छोड़ो

》बिल गेट्स

》Problems Oriented Vs Solutions Oriented

》सफलता का रहस्य

》सफ़ाई कर्मचारी

》Most Powerful Motivational Story – By Sandeep Maheshwari

》एक Lady और जीशान अख़्तर

》बड़ा बनो

》सजा बनी सीख

》बदलाव

》बुद्धि का फल

》हाथी और छह अंधे व्यक्ति

》बुरी आदत

》उबलते पानी और मेंढक 

》सक्सेस पानी है तो तोड़िए कम्फर्ट जोन की जंजीरें

 

 

1. First opportunity #motivational short story in hindi for success

 

First opportunity #motivational short story in hindi for success
First opportunity #motivational short story in hindi for success

एक नौजवान आदमी एक किसान की बेटी सेशादी की इच्छा लेकर किसान के पास गया. किसानने उसकी ओर देखा और कहा, ” युवक, खेत मेंजाओ. मैं एक एक करके तीन बैल छोड़ने वाला हूँ.अगर तुम तीनों बैलों में से किसी भी एक की पूँछपकड़ लो तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर दूंगा.”नौजवान खेत में बैल की पूँछ पकड़ने की मुद्रा लेकरखडा हो गया.

किसान ने खेत में स्थित घरका दरवाजा खोला और एक बहुत ही बड़ा औरखतरनाक बैल उसमे से निकला. नौजवान ने ऐसा बैलपहले कभी नहीं देखा था. उससे डर कर नौजवान ने निर्णय लिया कि वह अगले बैल का इंतज़ारकरेगा और वह एक तरफ हो गया जिससे बैल उसकेपास से होकर निकल गया.दरवाजा फिर खुला. 

आश्चर्यजनक रूप से इस बारपहले से भी बड़ा और भयंकर बैल निकला. नौजवान नेसोचा कि इससे तो पहला वाला बैल ठीक था. फिर उसने एक ओर होकर बैलको निकल जाने दिया.दरवाजा तीसरी बार खुला. नौजवानके चहरे परमुस्कान आ गई. इस बार एक छोटा औरमरियल बैलनिकला. जैसे ही बैल नौजवान के पास आने लगा,नौजवान ने उसकी पूँछ पकड़ने के लिएमुद्रा बना ली ताकि उसकी पूँछ सही समय पर पकड़ ले. पर उस बैल की पूँछ थी ही नहीं.

 
सीख……ज़िन्दगी अवसरों से भरी हुई है. कुछ सरल हैं औरकुछ कठिन. पर अगर एक बार अवसरगवां दिया तो फिर वह अवसर दुबारा नहीं मिलेगा. अतः हमेशा प्रथम अवसर को हासिल करनेका प्रयास करना चाहिए

 

 

2. शिकंजी का स्वाद #motivational stories in hindi for success for students

 

शिकंजी का स्वाद #motivational stories in hindi for success for students
शिकंजी का स्वाद #motivational stories in hindi for success for students

एक प्रोफ़ेसर क्लास ले रहे थे. क्लास के सभी छात्र बड़ी ही रूचि से उनके लेक्चर को सुन रहे थे. उनके पूछे गये सवालों के जवाब दे रहे थे. लेकिन उन छात्रों के बीच कक्षा में एक छात्र ऐसा भी था, जो चुपचाप और गुमसुम बैठा हुआ था.

प्रोफ़ेसर ने पहले ही दिन उस छात्र को नोटिस कर लिया, लेकिन कुछ नहीं बोले. लेकिन जब ४-५ दिन तक ऐसा ही चला, तो उन्होंने उस छात्र को क्लास के बाद अपने केबिन में बुलवाया और पूछा, “तुम हर समय उदास रहते हो. क्लास में अकेले और चुपचाप बैठे रहते हो. लेक्चर पर भी ध्यान नहीं देते. क्या बात है? कुछ परेशानी है क्या?”

“सर, वो…..” छात्र कुछ हिचकिचाते हुए बोला, “….मेरे अतीत में कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी वजह से मैं परेशान रहता हूँ. समझ नहीं आता क्या करूं?”

प्रोफ़ेसर भले व्यक्ति थे. उन्होंने उस छात्र को शाम को अपने घर पर बुलवाया.

शाम को जब छात्र प्रोफ़ेसर के घर पहुँचा, तो प्रोफ़ेसर ने उसे अंदर बुलाकर बैठाया. फिर स्वयं किचन में चले गये और शिकंजी बनाने लगे. उन्होंने जानबूझकर शिकंजी में ज्यादा नमक डाल दिया.

फिर किचन से बाहर आकर शिकंजी का गिलास छात्र को देकर कहा, “ये लो, शिकंजी पियो.”

छात्र ने गिलास हाथ में लेकर जैसे ही एक घूंट लिया, अधिक नमक के स्वाद के कारण उसका मुँह अजीब सा बन गया. यह देख प्रोफ़ेसर ने पूछा, “क्या हुआ? शिकंजी पसंद नहीं आई?”

“नहीं सर, ऐसी बात नहीं है. बस शिकंजी में नमक थोड़ा ज्यादा है.” छात्र बोला.

“अरे, अब तो ये बेकार हो गया. लाओ गिलास मुझे दो. मैं इसे फेंक देता हूँ.” प्रोफ़ेसर ने छात्र से गिलास लेने के लिए अपना हाथ बढ़ाया. लेकिन छात्र ने मना करते हुए कहा, “नहीं सर, बस नमक ही तो ज्यादा है. थोड़ी चीनी और मिलायेंगे, तो स्वाद ठीक हो जायेगा.”

यह बात सुन प्रोफ़ेसर गंभीर हो गए और बोले, “सही कहा तुमने. अब इसे समझ भी जाओ. ये शिकंजी तुम्हारी जिंदगी है. इसमें घुला अधिक नमक तुम्हारे अतीत के बुरे अनुभव है. जैसे नमक को शिकंजी से बाहर नहीं निकाल सकते, वैसे ही उन बुरे अनुभवों को भी जीवन से अलग नहीं कर सकते. वे बुरे अनुभव भी जीवन का हिस्सा ही हैं. लेकिन जिस तरह हम चीनी घोलकर शिकंजी का स्वाद बदल सकते हैं. वैसे ही बुरे अनुभवों को भूलने के लिए जीवन में मिठास तो घोलनी पड़ेगी ना. इसलिए मैं चाहता हूँ कि तुम अब अपने जीवन में मिठास घोलो.”

प्रोफ़ेसर की बात छात्र समझ गया और उसने निश्चय किया कि अब वह बीती बातों से परेशान नहीं होगा.

सीख – जीवन में अक्सर हम अतीत की बुरी यादों और अनुभवों को याद कर दु:खी होते रहते हैं. इस तरह हम अपने वर्तमान पर ध्यान नहीं दे पाते और कहीं न कहीं अपना भविष्य बिगाड़ लेते हैं. जो हो चुका, उसे सुधारा नहीं जा सकता. लेकिन कम से कम उसे भुलाया तो जा सकता है और उन्हें भुलाने के लिए नई मीठी यादें हमें आज बनानी होगी. जीवन में मीठे और ख़ुशनुमा लम्हों को लाइये, तभी तो जीवन में मिठास आयेगी.  

 

3. हीरे की खान #motivational story in hindi for success in life

 

हीरे की खान #motivational story in hindi for success in life
हीरे की खान #motivational story in hindi for success in life

अफ्रीका महाद्वीप में हीरों की कई खानों की खोज हो चुकी थी, जहाँ से बहुतायत में हीरे प्राप्त हुए थे. वहाँ के एक गाँव में रहने वाला किसान अक्सर उन लोगों की कहानियाँ सुना करता था, जिन्होंने हीरों की खान खोजकर अच्छे पैसे कमाये और अमीर बन गए. वह भी हीरे की खान खोजकर अमीर बनना चाहता था.

एक दिन अमीर बनने के सपने को साकार करने के लिए उसने अपना खेत बेच दिया और हीरों की खान की खोज में निकल पड़ा. अफ्रीका के लगभग सभी स्थान छान मारने के बाद भी उसे हीरों का कुछ पता नहीं चला. समय गुजरने के साथ उसका मनोबल गिरने लगा. उसे अपना अमीर बनने का सपना टूटता दिखाई देने लगा. वह इतना हताश हो गया कि उसके जीने की तमन्ना ही समाप्त हो गई और एक दिन उसने नदी में कूदकर अपनी जान दे दी.

इस दौरान दूसरा किसान, जिसने पहले किसान से उसका खेत खरीदा था, एक दिन उसी खेत के मध्य बहती छोटी नदी पर गया. सहसा उसे नदी के पानी में से इंद्रधनुषी प्रकाश फूटता दिखाई पड़ा. उसने ध्यान से देखा, तो पाया कि नदी के किनारे एक पत्थर पर सूर्य की किरणें पड़ने से वह चमक रहा था. किसान ने झुककर वह पत्थर उठा लिया और घर ले आया.

वह एक ख़ूबसूरत पत्थर था. उसने सोचा कि यह सजावट के काम आएगा और उसने उसे घर पर ही सजा लिया. कई दिनों तक वह पत्थर उसके घर पर सजा रहा. एक दिन उसके घर उसका एक मित्र आया. उसने जब वह पत्थर देखा, तो हैरान रह गया.

उसने किसान से पूछा, “मित्र! तुम इस पत्थर ही कीमत की जानते हो?”

किसान ने जवाब दिया, “नहीं.”

“मेरे ख्याल से ये हीरा है. शायद अब तक खोजे गए हीरों में सबसे बड़ा हीरा.” मित्र बोला.

किसान के लिए इस बात पर यकीन करना मुश्किल था. उसने अपने मित्र को बताया कि उसे यह पत्थर अपने खेत की नदी के किनारे मिला है. वहाँ ऐसे और भी पत्थर हो सकते हैं.”

दोनों खेत पहुँचे और वहाँ से कुछ पत्थर नमूने के तौर पर चुन लिए. फिर उन्हें जाँच के लिए भेज दिया. जब जाँच रिपोर्ट आयी, तो किसान के मित्र की बात सच निकली. वे पत्थर हीरे ही थे. उस खेत में हीरों का भंडार था. वह उस समय तक खोजी गई सबसे कीमती हीरे की खदान थी. उसका खदान का नाम ‘किम्बर्ले डायमंड माइन्स’ है. दूसरा किसान उस खदान की वजह से मालामाल हो गया.

पहला किसान अफ्रीका में दर-दर भटका और अंत में जान दे दी. जबकि हीरे की खान उसके अपने खेत में उसके क़दमों तले थी.

सीख – मित्रों, इस कहानी में हीरे पहले किसान के कदमों तले ही थे, लेकिन वह उन्हें पहचान नहीं पाया और उनकी खोज में भटकता रहा. ठीक वैसे ही हम भी सफलता प्राप्ति के लिए अच्छे अवसरों की तलाश में भटकते रहते हैं. हम उन अवसरों को पहचान नहीं पाते या पहचानकर भी महत्व नहीं देते, जो हमारे आस-पास ही छुपे रहते हैं. जीवन में सफ़ल होना है, तो आवश्यकता है बुद्धिमानी और परख से उन अवसरों को पहचानने की और धैर्य से अनवरत कार्य करने की. सफ़लता निश्चित है.

 

4. आख़री प्रयास #motivational hindi story for success

 

आख़री प्रयास #motivational hindi story for success
आख़री प्रयास #motivational hindi story for success

एक समय की बात है. एक राज्य में एक प्रतापी राजा राज करता था. एक दिन उसके दरबार में एक विदेशी आगंतुक आया और उसने राजा को एक सुंदर पत्थर उपहार स्वरूप प्रदान किया.राजा वह पत्थर देख बहुत प्रसन्न हुआ. उसने उस पत्थर से भगवान विष्णु की प्रतिमा का निर्माण कर उसे राज्य के मंदिर में स्थापित करने का निर्णय लिया और प्रतिमा निर्माण का कार्य राज्य के महामंत्री को सौंप दिया.

महामंत्री गाँव के सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार के पास गया और उसे वह पत्थर देते हुए बोला, “महाराज मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं. सात दिवस के भीतर इस पत्थर से भगवान विष्णु की प्रतिमा तैयार कर राजमहल पहुँचा देना. इसके लिए तुम्हें 50 स्वर्ण मुद्रायें दी जायेंगी.”

50 स्वर्ण मुद्राओं की बात सुनकर मूर्तिकार ख़ुश हो गया और महामंत्री के जाने के उपरांत प्रतिमा का निर्माण कार्य प्रारंभ करने के उद्देश्य से अपने औज़ार निकाल लिए. अपने औज़ारों में से उसने एक हथौड़ा लिया और पत्थर तोड़ने के लिए उस पर हथौड़े से वार करने लगा. किंतु पत्थर जस का तस रहा. मूर्तिकार ने हथौड़े के कई वार पत्थर पर किये. किंतु पत्थर नहीं टूटा.

पचास बार प्रयास करने के उपरांत मूर्तिकार ने अंतिम बार प्रयास करने के उद्देश्य से हथौड़ा उठाया, किंतु यह सोचकर हथौड़े पर प्रहार करने के पूर्व ही उसने हाथ खींच लिया कि जब पचास बार वार करने से पत्थर नहीं टूटा, तो अब क्या टूटेगा.

वह पत्थर लेकर वापस महामंत्री के पास गया और उसे यह कह वापस कर आया कि इस पत्थर को तोड़ना नामुमकिन है. इसलिए इससे भगवान विष्णु की प्रतिमा नहीं बन सकती.

महामंत्री को राजा का आदेश हर स्थिति में पूर्ण करना था. इसलिए उसने भगवान विष्णु की प्रतिमा निर्मित करने का कार्य गाँव के एक साधारण से मूर्तिकार को सौंप दिया. पत्थर लेकर मूर्तिकार ने महामंत्री के सामने ही उस पर हथौड़े से प्रहार किया और वह पत्थर एक बार में ही टूट गया.

पत्थर टूटने के बाद मूर्तिकार प्रतिमा बनाने में जुट गया. इधर महामंत्री सोचने लगा कि काश, पहले मूर्तिकार ने एक अंतिम प्रयास और किया होता, तो सफ़ल हो गया होता और 50 स्वर्ण मुद्राओं का हक़दार बनता.

सीख – मित्रों, हम भी अपने जीवन में ऐसी परिस्थितियों से दो-चार होते रहते हैं. कई बार किसी कार्य को करने के पूर्व या किसी समस्या के सामने आने पर उसका निराकरण करने के पूर्व ही हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और हम प्रयास किये बिना ही हार मान लेते हैं. कई बार हम एक-दो प्रयास में असफलता मिलने पर आगे प्रयास करना छोड़ देते हैं. जबकि हो सकता है कि कुछ प्रयास और करने पर कार्य पूर्ण हो जाता या समस्या का समाधान हो जाता. यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है, तो बार-बार असफ़ल होने पर भी तब तक प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिये, जब तक सफ़लता नहीं मिल जाती. क्या पता, जिस प्रयास को करने के पूर्व हम हाथ खींच ले, वही हमारा अंतिम प्रयास हो और उसमें हमें कामयाबी प्राप्त हो जाये.

 

 

5. आलस्य को छोड़ो #short motivational story in hindi for success with moral

 

आलस्य को छोड़ो #short motivational story in hindi for success with moral
आलस्य को छोड़ो #short motivational story in hindi for success with moral

पुरानी लोक कथा के अनुसार पुराने समय में एक गरुड़ अपने दो बच्चों को अपनी पीठ पर बैठाकर एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। दोनों बच्चों ने वहां दिनभर दाना चुगते रहे। शाम को गरुड़ ने फिर बच्चों को अपनी पीठ पर बैठाकर अपने घर पहुंचा दिया। रोज यही क्रम चलने लगा। बच्चों ने सोचा कि जब पिताजी पीठ पर बैठाकर ले जाते हैं तो हमें उड़ाने की क्या जरूरत है।

गरुड़ ने समझ लिया कि उसके दोनों बच्चे आलसी हो गए हैं और मेहनत नहीं करना चाहते हैं। इसीलिए उड़ना नहीं सीख रहे हैं। एक दिन सुबह-सुबह गरुड़ ने बच्चों को अपनी पीठ पर बैठाकर ऊंची उड़ान भरी। ऊंचाई पर पहुंचकर गरुड़ ने पीठ पर बैठे दोनों बच्चों को गिरा दिया। अब दोनों बच्चों ने अपने-अपने पंख फड़फड़ाना शुरू कर दिए। उस दिन उन्हें समझ आ गया कि उड़ना सीखना बहुत जरूरी है। किसी तरह दोनों बच्चों ने अपने प्राण बचा लिए।

शाम को घर पहुंचकर दोनों बच्चों ने अपनी माता मादा गरुड़ से कहा कि मां आज हमने पंख न फड़फड़ाए होते तो पिताजी ने मरवा ही दिया था। मादा गरुड़ ने अपने बच्चों से कहा कि जो लोग अपने आप नहीं सीखते हैं, आलस्य नहीं छोड़ते हैं, उन्हें सिखाने का यही नियम है। हमारी पहचान ऊंची उड़ान से होती है, यही हमारी योग्यता है। इसे बढ़ाने के लिए लगातार अभ्यास करते रहने की जरूरत है। बच्चों को अपनी मां की बातें समझ आ गईं, इसके बाद उन्होंने भी आलस्य छोड़कर उड़ना सीखा और लगातार अभ्यास से वे भी काफी ऊंचाई तक उड़ने लगे।

Moral Of The Story : अगर हम सफल होना चाहते हैं तो हमें आलस्य छोड़कर अपनी योग्यता को बढ़ाते रहना चाहिए। किसी भी काम में परफेक्ट होने के लिए लगातार अभ्यास करते रहना चाहिए। इस कहानी में गरुड़ के बच्चे आलसी थे, इस कारण उड़ना नहीं सीख रहे थे। गरुड़ की योग्यता यही है कि वे काफी ऊंचाई तक उड़ सकते हैं। इसके लिए गरुड़ के बच्चों ने आलस्य छोड़कर उड़ना सीख लिया।

 

 

6. बिल गेट्स #motivational real story in hindi for success

 

बिल गेट्स #motivational real story in hindi for success
बिल गेट्स #motivational real story in hindi for success

बिल गेट्स का वास्तविक तथा पूर्ण नाम विलियम हेनरी गेट्स है। इनका जन्म 28 अक्टूबर, 1955 को वाशिंगटन के सिएटल में हुआ। इनके परिवार में इनके अतिरिक्त चार और सदस्य थे – इनके पिता विलियम एच गेट्स जो कि एक मशहूर वकील थे, इनकी माता मैरी मैक्‍सवेल गेट्स जो प्रथम इंटरस्टेट बैंक सिस्टम और यूनाइटेड वे के निदेशक मंडल कि सदस्य थी तथा इनकी दो बहनें जिनका नाम क्रिस्टी और लिब्बी हैं। बिल गेट्स ने अपने बचपन का भी भरपूर आनंद लिया तथा पढ़ाई के साथ वह खेल कूद में भी सक्रिय रूप से भाग लेते रहे।

बिल गेट्स को किसी परिचय कि आवश्यकता नहीं है, वह पूरी दुनिया में अपने कार्यों से जाने जाते हैं। हम सभी यह भली भांति जानते हैं कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ Software Company “Microsoft” की नींव भी बिल गेट्स के द्वारा ही रखी गयी है।

बिल गेट्स का बचपन –
उनके माता – पिता उनके लिए क़ानून में करियर बनाने का स्वप्न लेकर बैठे थे परन्तु उन्हें बचपन से ही कंप्यूटर विज्ञान तथा उसकी प्रोग्रामिंग भाषाओं में रूचि थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लेकसाइड स्कूल में हुई। जब वह आठवीं कक्षा के छात्र थे तब उनके विद्यालय ने ऐएसआर – 33 दूरटंकण टर्मिनल तथा जनरल इलेक्ट्रिक (जी।ई।) कंप्यूटर पर एक कंप्यूटर प्रोग्राम खरीदा जिसमें गेट्स ने रूचि दिखाई। तत्पश्चात मात्र तेरह वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला कंप्यूटर प्रोग्राम लिखा जिसका नाम “टिक-टैक-टो” (tic-tac-toe) तथा इसका प्रयोग कंप्यूटर से खेल खेलने हेतु किया जाता था। बिल गेट्स इस मशीन से बहुत अधिक प्रभावित थे तथा जानने को उत्सुक थे कि यह सॉफ्टवेयर कोड्स किस प्रकार कार्य करते हैं।

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के प्रति बिल गेट्स की लगन –
इसके पश्चात गेट्स डीईसी (DEC), पीडीपी (PDP), मिनी कंप्यूटर नामक सिस्टमों में दिलचस्पी दिखाते रहे, परन्तु उन्हें कंप्यूटर सेंटर कॉरपोरेशन द्वारा ऑपरेटिंग सिस्टम में हो रही खामियों के लिए 1 महीने तक प्रतिबंधित कर दिया गया। इसी समय के दौरान उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर सीसीसी के सॉफ्टवेयर में हो रही कमियों को दूर कर लोगों को प्रभावित किया तथा उसके पश्चात वह सीसीसी के कार्यालय में निरंतर जाकर विभिन्न प्रोग्रामों के लिए सोर्स कोड का अध्ययन करते रहे और यह सिलसिला 1970 तक चलता रहा। इसके पश्चात इन्फोर्मेशन साइंसेस आइएनसी। लेकसाइड के चार छात्रों को जिनमें बिल गेट्स भी शामिल थे, कंप्यूटर समय एवं रॉयल्टी उपलब्ध कराकर कोबोल (COBOL), पर एक पेरोल प्रोग्राम लिखने के लिए किराए पर रख लिया।

इसके पश्चात उन्हें रोकना नामुमकिन था। मात्र 17 वर्ष कि उम्र में उन्होंने अपने मित्र एलन के साथ मिलकर ट्राफ़- ओ- डाटा नामक एक उपक्रम बनाया जो इंटेल 8008 प्रोसेसर (Intel 8008 Processor) पर आधारित यातायात काउनटर (Traffic Counter) बनाने के लिए प्रयोग में लाया गया। 1973 में वह लेकसाइड स्कूल से पास हुए तथा उसके पश्चात बहु- प्रचलित हारवर्ड कॉलेज में उनका दाखिला हुआ।

 

परन्तु उन्होंने 1975 में ही बिना स्नातक किए वहाँ से विदा ले ली जिसका कारण था उस समय उनके जीवन में दिशा का अभाव। उसके पश्चात उन्होंने Intel 8080 चिप बनाया तथा यह उस समय का व्यक्तिगत कंप्यूटर के अन्दर चलने वाला सबसे वहनयोग्य चिप था, जिसके पश्चात बिल गेट्स को यह एहसास हुआ कि समय द्वारा दिया गया यह सबसे उत्तम अवसर है जब उन्हें अपनी स्वयं कि कंपनी का आरम्भ करना चाहिए।

माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का उत्थान –
MITS (Micro Instrumentation and Telemetry Systems) जिन्होंने एक माइक्रो कंप्यूटर का निर्माण किया था, उन्होंने गेट्स को एक प्रदर्शनी में उपस्थित होने कि सहमती दी तथा गेट्स ने उनके लिए अलटेयर एमुलेटर (Emulator) निर्मित किया जो Mini Computer और बाद में इंटरप्रेटर में सक्रिय रूप से कार्य करने लगा। इसके बाद बिल गेट्स व् उनके साथी को MITS के अल्बुकर्क स्थित कार्यालय में काम करने कि अनुमति दी गयी। उन्होंने अपनी जोड़ी का नाम Micro-Soft रखा तथा अपने पहले कार्यालय कि स्थापना अल्बुकर्क में ही की।

 

26 नवम्बर, 1976 को उन्होंने Microsoft का नाम एक व्यापारिक कंपनी के तौर पर पंजीकृत किया। Microsoft Basic कंप्यूटर के चाहने वालों में सबसे अधिक लोकप्रिय हो गया था। 1976 में ही Microsoft MITS से पूर्णत: स्वतंत्र हो गया तथा Gates और Allen ने मिलकर कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा Software का कार्य जारी रखा।

 

इनसे बाद Microsoft ने अल्बुकर्क में अपना कार्यालय बंद कर बेलेवुए, वाशिंगटन में अपना नया कार्यालय खोला। Microsoft ने उन्नति की ओर बढ़ते हुए प्रारंभिक वर्षों में बहुत मेहनत व् लगन से कार्य किया। गेट्स भी व्यावसायिक विवरण पर भी ध्यान देते थे, कोड लिखने का कार्य भी करते थे तथा अन्य कर्मचारियों द्वारा लिखे गए व् जारी किये गए कोड कि प्रत्येक पंक्ति कि समीक्षा भी वह स्वयं ही करते थे।

 

इसके बाद जानी मानी कंपनी IBM ने Microsoft के साथ काम करने में रूचि दिखाई, उन्होंने Microsoft से अपने पर्सनल कंप्यूटर के लिए बेसिक इंटरप्रेटर बनाने का अनुरोध किया। कई कठिनाइयों से निकलने के बाद गेट्स ने Seattle कंप्यूटर प्रोडक्ट्स के साथ एक समझौता किया जिसके बाद एकीकृत लाइसेंसिंग एजेंट और बाद में 86-DOS के वह पूर्ण आधिकारिक बन गए और बाद में उन्होंने इसे आईबीएम को $80,000 के शुल्क पर PC-DOS के नाम से उपलब्ध कराया। इसके पश्चात Microsoft का उद्योग जगत में बहुत नाम हुआ।

 

1981 में Microsoft को पुनर्गठित कर बिल गेट्स को इसका चेयरमैन व् निदेशक मंडल का अध्यक्ष बनाया गया। जिसके बाद Microsoft ने अपना Microsoft Windows का पहला संस्करण पेश किया। 1975 से लेकर 2006 तक उन्होंने Microsoft के पद पर बहुत ही अदभुत कार्य किया, उन्होंने इस दौरान Microsoft कंपनी के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

बिल गेट्स का विवाह व् आगे का जीवन –
1994 में बिल गेट्स का विवाह फ्रांस में रहने वाली Melinda से हुआ तथा 1996 में इन्होंने जेनिफर कैथेराइन गेट्स को जन्म दिया। इसके बाद मेलिंडा तथा बिल गेट्स के दो और बच्चे हुए जिनके नाम रोरी जॉन गेट्स तथा फोएबे अदेले गेट्स हैं। वर्तमान में बिल गेट्स अपने परिवार के साथ वाशिंगटन स्थित मेडिना में उपस्थित अपने सुन्दर घर में रहते हैं, जिसकी कीमत 1250 लाख डॉलर है।

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन का उदय –
वर्ष 2000 में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशनकी नींव रखी जो कि पारदर्शिता से संचालित होने वाला विश्व का सबसे बड़ा Charitable फाउंडेशन था। उनका यह फाउंडेशन ऐसी समस्याओं के लिए कोष दान में देता था जो सरकार द्वारा नज़रअंदाज़ कर दी जाती थीं जैसे कि कृषि, कम प्रतिनिधित्व वाले अल्पसंख्यक समुदायों के लिये कॉलेज छात्रवृत्तियां, एड्स जैसी बीमारियों के निवारण हेतु, इत्यादि।

परोपकारी कार्य –
सन 2000 में इस फाउंडेशन ने Cambridge University को 210 मिलियन डॉलर गेट्स कैम्ब्रिज छात्रवृत्तियों हेतु दान किये। वर्ष 2000 तक बिल गेट्स ने 29 बिलियन डॉलर केवल परोपकारी कार्यों हेतु दान में दे दिए। लोगों की उनसे बढती हुई उम्मीदों को देखते हुए वर्ष 2006 में उन्होंने यह घोषणा की कि वह अब Microsoft में अंशकालिक रूप से कार्य करेंगे और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में पूर्णकालिक रूप से कार्य करेंगे। वर्ष 2008 में गेट्स ने Microsoft के दैनिक परिचालन प्रबंधन कार्य से पूर्णतया विदा ले ली परन्तु अध्यक्ष और सलाहकार के रूप में वह Microsoft में विद्यमान रहे

 

 

Motivational Stories In Hindi for Success

7- Problems Oriented Vs Solutions Oriented

 

Very Short Motivational Stories in Hindi With Moral
Motivational Stories In Hindi for Success

एक समय की बात है। एक आदमी मज़े से दोपहर में कार से ट्रेवल कर रहा था। वो अपनी धुन में गाड़ी चला रहा था।
आगे एक पुल था जिसके नीचे नदी बह रही थीं।

जब वो पल पार कर रहा था। अचानक से उसको लगा।
गाड़ी चलाने में कुछ दिक्कत हो रही हैं। उसको अंदाज़ा हो गया था गाड़ी का कोई ना कोई टायर तो पंचर हुआ है।
उसने नीचे उतर के देखा गाड़ी का पीछे वाला (Left Side)  का टायर पंचर हो गया है।

अब वो परेशान इतनी तेज़ धूप में टायर बदलना पड़ेगा वह बोला खौर जो भी हैं। टायर तो बदलना ही पड़ेगा।
उसके बाद उसने गाड़ी में से जैक निकाला उसको गाड़ी में फिट किया। टायर के बोल्ट खोले। और चारो बोल्ट को एक सात साइड में रख दिया।

अब वो टायर को निकालने लगा उसने ज़ोर लगाया टायर को झटके से पीछे खींचा इसी दौरान उसका पैर साइड में रखे बोल्ट पे लगा और चारो बोल्ट नदी में गिर गए। अब वो बंदा बहुत ज़्यादा परेशान सोचने लगा अब मैं टायर कैसे बदलूँगा अब क्या होगा

मैं कैसे अपनी मंज़िल पे पहुँचूँगा। पहले से ही इतना लेट हो गया हूं। इतनी गर्मी में दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा है।

किसी से मदद भी नहीं मांग सकता। सिट यार ये मैं कहाँ फस गया। वह आदमी अब निराश होकर खड़ा है।

Very Short Motivational Stories in Hindi With Moral
Motivational Stories In Hindi for Success

उसकी सोच काम नहीं कर रही हैं। अब-जब भी वो सोचने बैठता है। एक ही बात उसके दिमाग में आती हैं चारो बोल्ट नदी में गिर चुके हैं। अब वो आगे नहीं जा सकता।
अब ये बंदा परेशानी में काफ़ी देर हो चुकी हैं।

अब सामने से उसको एक किसान नज़र आता है। वो ये सोच रहा होता हैं। उससे मदद मांगू या नहीं मांगु क्या ये मेरी मदद कर पायेगा या नहीं। अब ये सोच ही रहा होता हैं वो किसान खुद ही आके पूछ लेता हैं। साहब कोई परेशानी है तो बताइये।
क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ।

अब ये आदमी पहले से ही परेशान हैं। गुस्से में हैं।  और बोलता है मेरा टायर पंचर हो गया है। अब स्टेपनी लगा रहा था तो बोल्ट नदी में गिर गए। वह गुस्से से बोला अब तू भी मेरी क्या मदद करेगा ? वो किसान समझ गया ये बंदा गर्मी और परेशानी की वज़ह से ये गुस्से में हैं।

किसान मुस्कुराते हुए बोलता है यहां से (10.Km) की दूरी पे एक मकैनिक हैं उसके पास गाड़ी का  सारा सामान मिल जाता हैं। और वहां जाने के लिए आप एक काम कर सकते हो आप अपनी गाड़ी के बाकी तीन टायरों के एक-एक बोल्ट खोल के इसमें लगा लो  और धीरे-धीरे गाड़ी चला कर वहां चले जाओ। आपका काम हो जाएगा।

वह आदमी हैरान हो जाता हैं। उसका गुस्सा एक दम शांत हो जाता हैं। और कहता है। भाईसाहब मैं इतनी देर से इस परेशानी से लड़ रहा था। इसने ज़रा देर में इसका हल निकाल दिया। उसने किसान से बोला माफ़ करना भाई।

और बोला आपने इतनी जल्दी इस परेशानी का हल कैसे निकाल दिया। क्या ये परेशानी पहले आपके साथ हुई थी ?

किसान मुस्कुराते हुए बोला ऐसा कुछ नहीं है।
सिर्फ एक ही फ़र्क़ हैं। आप उस परिस्थिति में परेशानी के बारे में सोच रहे थे। और मैं उसी परिस्थिति में हल के बारे में सोच रहा था।

सो दोस्तों  आप या तो (Problems Oriented) हो सकते हो या फिर (Solutions  Oriented) हो सकते हो
या तो आप (Problems) आते ही परेशान होने लगोगे (Problems) के अलावा कुछ दिखेगा नहीं।
परेशानी की वज़ह से कुछ कर नहीं पाओगे।

लेकिन आप (Solutions  Oriented) हो तो
आप (Solutions) ढूँढने में ध्यान करोगे आपका दिमाग हल को तलाश करने में चलेगा ना के परेशानी ढूंढने में।

जब महाराणा प्रताप की सेना में।
अकबर की सेना के मुकाबले हाथी कम थे। तो उन्होंने घोड़ो के आगे नकली सूंड लगा दिए। के उनको हाथी अपना साथी समझ के मारे ना।

महाराणा प्रताप ने परेशानी पे ध्यान नहीं दिया के हाथी कम हैं।  उन्होंने हल निकालने में ध्यान दिया। घोड़ो को हाथी बना दिया। 

 

 

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Motivational Stories In Hindi for Success 8- सफलता का रहस्य

 

Very Short Motivational Stories in Hindi With Moral
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एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?

सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो.वो मिले. फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा.और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया. लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा. फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफते-हाँफते तेजी से सांस लेना.

सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?”

लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना”

सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है.

 

सो आज से अभी से अपने (Future)  को (Build) करना शुरु कर दो अपने (Future)  की ईंट अच्छे से लगा दे अपने (Hard) (Work) के साथ अपने (Focus) के साथ  (Education) के साथ अपने (Future)  को पेंट करते हैं।

 

Very Short Motivational Stories in Hindi With Moral
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All The Best

 

9.  सफ़ाई कर्मचारी #Motivational Stories In Hindi for Success

 

बहुत बार हमारी ज़िन्दगी में ऐसी परेशानी आती हैं। मुश्किलें आती हैं। के हम समझ ही नहीं पाते ये हमारे साथ ही क्यों हो रहा है।

एक बार एक मंदिर में सफ़ाई करने वाला कर्मचारी भगवान की तरफ़ देखता है। और कहता है। भगवान आप बोर नहीं हो जाते एक ही जगह पे खड़े-खड़े इतनी सालो से एक ही (Position) में खड़े हो।

कर्मचारी-मेरे पास एक आईडिया हैं। क्यो ना हम एक दिन के लिए (Rol Exchange) कर ले ? आप मेरे रूप में एक दिन मेरी ज़िन्दगी जी के देखों और मैं आपके रूप में एक दिन यहाँ खड़े हो जाता हूँ। आप भी एक दिन छुट्टी लो आप भी एक दिन आराम करो।

भगवान आगे से जबाब देते हैं। यहाँ खड़े होना इतना आसान नहीं है। तू अपना काम कर और मुझे अपना काम करने दे। यहाँ खड़े रहना बहुत मुश्किल है। वो सेवक कहता है। नहीं भगवान
आप जैसे बोलोगे मैं वैसा ही करूँगा। जैसे कहोगे वैसे ही खड़ा हो जाऊँगा। लेकिन आप एक दिन के लिए मेरी ज़िन्दगी जी के देखो।

वो भगवान जी कहते हैं मैं रूप तो (Exchange) कर लूंगा तू मेरे रूप में आजा मै तेरे रूप में आ जाऊँगा लेकिन मेरी एक बात याद रखना तुझे मूर्ति बन के खड़े रहना है। लोग कुछ भी कहे कुछ बोले कोई अपने दुःख सुनाए कोई अपनी तख़लीक़ सुनाए या कोई तुझसे कुछ मांगे तुझे बस मूर्ति बन के खड़े रहना है।

सेवक कहता है ठीक है भगवान मुझे मंज़ूर हैं। सेवक मूर्ति बन के खड़ा हो जाता हैं। और भगवान एक दिन की छुट्टी लेके चले जाते हैं। अब ये सेवक भगवान की मूर्ति बन के मंदिर में खड़ा है। मंदिर में पहला भक्त आता है। वो भी (Business Men) और कहता है। हे भगवान मेरी दौलत और बढ़ाना मेरे पैसे और बढ़ाना। मेरी इज़्ज़त और बढ़ाना मैं एक नई फैक्टरी और लगा रहा हूँ। उसपे भी अपनी कृपा बनाये रखना। और आगे माथा टेकता हैं।

और जब उठता है तो अपना (Wallet) वहीं भूल जाता हैं। और वही भूल के वो चला जाता हैं।

ये देखकर मूर्ति के रूप में सेवक को बड़ी घबराहट होती हैं।
के उसका (Wallet) रह गया। उसका मन करता है उसको आवाज़ दे दु तेरा (Wallet) रह गया। लेकिन सेवक वो याद आ जाता है भगवान ने कहा था। तुझे हिलना नहीं है। कुछ नहीं बोलना हैं। जो होना है। बस देखते रहना है।

तो वो सेवक मूर्ति के रूप बिना कुछ बोले खड़ा रहता हैं।
इतने में एक दूसरा भक्त आता हैं। जो एक गरीब आदमी हैं।
वो एक रुपया भगवान के आगे चढ़ाता हैं और कहता हैं हे भगवान मेरे पास सिर्फ़ एक रुपया था वो भी मैंने चढ़ा दिया।

मेरे घर में बहुत परेशानी है। बहुत गरीबी हैं। दवाई की ज़रुरत है। हे भगवान कुछ कृपा कर। वो माथा टेकता हैं। और आंखे खोलता है। उसकी नज़र उस (Wallet) पे पड़ती है जो (Business Man) का रह गया था। वो कहता हैं। हे भगवान तेरा सुक्र हैं। जो तूने मुझे पैसे दे दिए। (Wallet) लेके वो गरीब आदमी चला जाता हैं।

इतने में मूर्ति बने सेवक को और घबराहट होती हैं। वो उसका (Wallet) इसने चोरी कर लिया मैंने तो दिया नहीं।
सेवक को और प्रोब्लम होती हैं। वो कहता हैं यार मैं रोक सकू लेकिन भगवान ने बोला है। तुझे हिलना नहीं है।

वो सेवक अपनी घबराहट को किसी तरीके से रोकता है। और मूर्ति के रूप में खड़े रहता हैं। इतने में तीसरा भक्त आता। वह माथा टेक के कहता है। हे भगवान मैं अपनी समुन्द्र जहाज़ को लेके अगले (15) दिन के लिए काम पे जा रहा हूँ अपनी कृपा मेरे पे बनाये रखना। इतने में वो (Business Men) पुलिस को लेकर आ जाता हैं। जिसका (Wallet) रह गया था।

(Business Men) कहता हैं मेरे बाद यही आया है इसको पकड़ लो। और चोरी के जुर्म में पुलिस उसको पकड़ लेती हैं।

Very Short Motivational Stories in Hindi With Moral
Motivational Stories In Hindi for Success

अब ये देख के सेवक कहता हैं। मुझसे नहीं रोका जाएगा
अगर मेरी जगह भगवान यहाँ होते तो वो भी इतनी ना इंसाफी नहीं देखते अब मुझे बोलना पड़ेगा।

तो वो मूर्ति बना सेवक बोल पड़ता हैं। (Excuse Me) मैं भगवान हु मैंने देखा हैं क्या हुआ है। (Business Men) का

(Wallet) उस ग़रीब आदमी ने चुराया हैं उसको पकड़ो इसमें (Seller) का कोई कसूर नहीं है। इसको छोड़ दो इसे अपने (Business Tour) पे जाना है।

तो पुलिस कहती हैं। भगवान खुद बोल पड़े। पुलिस उस गरीब आदमी को पकड़ लेती हैं। उस (Business Men) का (Wallet) उसे वापस मिल जाता हैं। और जो (Seller) वो अपना जहाज़ लेके जाने के लिए तैयार हो जाता हैं।

Very Short Motivational Stories in Hindi With Moral
Motivational Stories In Hindi for Success

अब सेवक वापस मूर्ति बन के खड़ा हो जाता हैं। फिर शाम हो जाती हैं। अब भगवान वापस आ जाते हैं। सेवक को देख के बोलते हैं और कैसा रहा आज का दिन ?
सेवक- भगवान जी मैं आपको दिन के बारे में बताता हूँ।
आप खुश हो जाओगे मैंने इतना अच्छा काम किया।
पता है कितनी बड़ी न इंसाफी हो रही थीं मैंने रोक ली ?

सेवक उनको अपने पूरे दिन की बात बताता है। तीनों भक्तों की बात बताता हैं कैसे उसने ग़लत चीज़े को सही कर दिया।
भगवान जी उसकी पूरी बात सुन के कहते हैं तूने काम सुधारा नहीं तूने काम और बिगाड़ दिया।

तुझे बोला था तुझे कुछ नहीं बोलना तुझे था मूर्ति बन के खड़े रहना फिर तू क्यो बोला ?
अब सुन मेरी प्लांनिग जो तेरी सोच से भी परे थीं।

जो पहला- भक्त आया था ना (Business Men) उसकी सारी कमाई चोरी की हैं। अगर उसकी थोड़ी सी कमाई उस ग़रीब के पास चली जाती तो (Business Men) का कर्मा कम हो जाता।

और वो ग़रीब हमेशा लोगों की सेवा करता है।
जितने पैसे उसके पास बचते वो सेवा में लग देता था।
उस (Business Men) का पैसा एक सही जगह चला जाता उसके कर्मा कम हो जाते।

(And Most Important) वो जो (Seller) हैं।
वो जिस तरफ़ जा रहा है। उस समुन्द्र में एक बहुत बड़ा तूफ़ान आने वाला है जिसमे वो बचेगा नहीं। अगर वो (Seller) जेल में होता तो मरने से बच जाता। उसके बच्चे अनाथ होने से बच जाते। उसकी पत्नी विधवा होने से बच जाती। और उस (Business Men) का कर्मा भी कम हो जाता।
और उस गरीब के घर में रोटी भी चली जाती।

ऐसा ही हमारी ज़िन्दगी में भी होता हैं हमारी ज़िन्दगी में भी प्रॉब्लम्स आती हैं। हम सोंचते हमारे साथ ही इतना बुरा क्यो हो रहा है। क्योंकि हमारी सोच से भी ऊपर उसकी प्लानिइंग हैं।

 

सो आज के बाद जब भी कोई मुश्किल आये कोई प्रोब्लेम्स आये तो उदास मत होना। इस कहानी को याद करना मुस्कुरानासमझ जाना ज़िन्दगी में जो होता हैं अच्छे के लिए होता है। जो होता है हमारे फ़ायदे के लिए होता हैं।

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10.  Most Powerful Motivational Story – By Sandeep Maheshwari

ये कहानी है (2) बच्चों की जो एक गाँव मे रहते थे।
उनमे से एक (6) साल का था और एक (10) साल का।
दोनो बहुत अच्छे दोस्त थे। बिल्कुल शोले के (Jai) और (Veeru) जैसे। दोनो हमेशा साथ-साथ रहते साथ-साथ खाते-पीते।साथ-साथ खेलते।

तो एक दिन वो दोनों गाँव से थोड़ा दूर निकल गए।
और खेलते-खेलते उन में से जो बड़ा बच्चा था दस साल वाला वो कुआँ में गिर गया। और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ने लगा। क्योंकि उसको तैरना नहीं आता था। अब जो दूसरा बच्चा था (6) साल का उसने अपने आस-पास में देखा उसको कोई नज़र नहीं आया। कोई नहीं दिखा जिसको के वो बुला सके मदद के लिए।

उसको एक बाल्टी दिखी रस्सी से बंधी हुई पास में पड़ी उसने (1) सेकंड भी (Waste) नहीं किया और उस रस्सी को कुआँ में फ़ेक दिया। उसने अपने दोस्त को बोला पकड़ ले इसको उसके दोस्त ने रस्सी को पकड़ा और वो रस्सी को खींचने लगा पूरी ताकत से पागलों की तरह।

रस्सी को वो खींचता रहा अपनी पूरी जान लगा दी उस छोटे से (6)साल के बच्चे ने। और दस साल के बच्चे ने उस रस्सी को पकड़ा हुआ था। और वो छोटा सा बच्चा तब-तक नहीं रुक जब-तक उसने अपने दोस्त को बचा नहीं लिया।

यहाँ तक तो ठीक था यहाँ तक तो ये कहानी समझ आती हैं। लेकिन हुआ क्या ?

जैसे ही ये (2) बच्चे जब दोनों एक हो गए बाहर आ गए और आकर के गले मिल रहे और खुश हो रहे एक तरफ़ से उन्हें डर भी लग रहा था। डर था अब गाँव जायेंगें तो बहुत पिटाई होगी।
जब उनको बतायेंगे हम इस तरह से कुआँ में गिर गए। और ये सब चीज़े हुई।

लेकिन मज़े की बात ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

वो जब गाँव गए उन्होंने अपने घर वालो को बताया गाँव वालों को बताया तो किसी ने विस्वास नहीं किया।
और वो अपनी जगह बिल्कुल ठीक थे। क्योंकि उस बच्चे में इतनी ताक़त भी नहीं थीं। के वो बाल्टी पानी से भरी हुई उठा सके। तो इतने बड़े बच्चे को कुआँ से ऊपर खींचना तो बहुत बड़ी बात है।

लेकिन एक आदमी था उस गाँव मे उसने विस्वास कर लिया।उनको रहीम चाचा कहते थे। उस गाँव के सबसे समझदार बुज़ुर्गो में से एक। और सबको लगा के यार ये कभी झूठ नहीं बोलते अगर ये कह रहे हैं। तो ज़रूर कोई ना कोई बात होगी।
कोई तो वज़ह होगी जिसके वज़ह से ये कह रहे हैं।

और फिर सारे गाँव वाले इकट्ठा होके रहीम चाचा के पास गए।

और जाकर के बोले देखो जी हमें तो के कुछ समझ आ नहीं रहा। आप ही बता दें ऐसा कैसे हो सकता है ?
रहीम चाचा-उनको हँसी आ गई बोले यार मैं क्या बताऊ ? ये बच्चा बता तो रहा है। बाल्टी को उठाकर के कुआँ में फेंका उसके दोस्त ने बाल्टी को पकड़ा उसने रस्सी को खींचा और अपने दोस्त को बचा लिया तो आपको पता तो हैं। ये उसने कैसे किया बच्चा बता तो रहा है। इसमें मैं क्या बताऊँ ?

तो सारे गाँव वाले उनकी सकल देखने लगे। फिर कुछ देर बाद रहीम चाचा बोले सवाल ये नहीं हैं के वो छोटा सा बच्चा ये कैसे कर पाया सवाल ये हैं के वो क्यों कर पाया ?
के उसके अन्दर इतनी ताक़त कहाँ से आई ?

और बोले इसका सिर्फ एक जबाब हैं। जिस वक़्त उस बच्चे ने ये किया उस वक़्त उस टाइम पे उस जगह पे दूर दूर तक कोई नहीं था उस बच्चे को ये बताने वाला के तू ये नहीं कर सकता

 

बोले कोई नहीं था…..कोई नहीं…यहाँ तक के वो खुद भी

May You be Unstoppable By Sandeep Maheshwari

 

 

11.  एक Lady और जीशान अख़्तर #Motivational Stories In Hindi for Success

 

एक बार एक (Lady) अपनी लंबी सी गाड़ी से हाईवे से (City) की ओर जा रही होती हैं। तो अचानक से उसकी गाड़ी ख़राब हो जाती हैं शाम का टाइम होता हैं। और थोड़ी-थोड़ी बारिश हो रही होती हैं। (Lady) कहती हैं। अब क्या करूँ गाड़ी को कैसे सही करूँ ?

 

Very Short Motivational Stories in Hindi With Moral
Motivational Stories In Hindi for Success

 

सड़क की दूसरी ओर ज़ीशान अख़्तर नाम का एक बंदा (Lady) को प्रॉब्लम में देखता है। ज़ीशान सड़क पार करके (Lady) की तरफ़ जाता हैं। (Lady) एक पल के लिए घबरा जाती हैं।
के वो बन्दा मेरी तरफ़ क्यो आ रहा है।
ज़ीशान अख़्तर-मैम मैं चेक करता हूँ आपकी गाड़ी में क्या प्रॉब्लम हैं।

ज़ीशान अख़्तर गाड़ी का बोंनेट खोलता है। (Fauld) को ढूंढ़ता हैं (Fauld) ठीक करता है। और गाड़ी को स्टार्ट कर देता है। वो (Lady) ज़ीशान अख़्तर के लिए बहुत (Thankful) होती। (Lady) (Thanks) बोलती हैं।

और कहती हैं। आपने प्रॉब्लम में मेरी हेल्प की बताइये मैं आपको कितने पैसे दु ? ज़ीशान उस (Lady) को मना कर देता है। कहता है। ये मेरा काम नहीं हैं मैं आपसे पैसे नहीं लूंगा।

लेकिन हाँ मेरी किसी ने मदद की थीं और बोला था तुम भी आगे किसी की मदद कर देना। और इस
(Chain Of Happiness) को आगे बढ़ा देना।

तो मैं भी आपको यही कहूंगा आप भी किसी को प्रॉब्लम में देखों आप भी उसकी मदद करना और इस
(Chain Of Happiness) को आगे बढ़ा देना। वो (Lady) ज़ीशान से काफ़ी इम्प्रेस होती और कहती हैं। मैं भी आगे किसी की मदद ज़रूर करूंगी।

वो (Lady) गाड़ी (Start) करती हैं और चल पड़ती हैं। सिटी की ओर वहाँ पहुँच के वो एक (Coffee Shop) पे रुकती हैं।

(Coffee) पीने के लिए। वो (Lady Coffee Shop) में काम करती हुई एक लड़की को (Observe) करती हैं वो लड़की लड़की (7) महीने की प्रेग्नेंट हैं। फिर भी अच्छे से काम कर रही हैं। और पूरी (Energy) के साथ काम कर रही हैं।
मुँह पे स्माइल हैं अच्छी (Customer Service) दे रही हैं।

(Lady) उस लड़की को (Order) देती हैं। (Coffee Or (Snaks) मंगवाती हैं। (Coffee) ख़त्म कर के विल की अमाउंट रख के चली जाती हैं। पीछे से वो लड़की टेबल साफ़ करने के लिए और विल की अमाउंट उठाने के लिए। आती हैं। तो वो नोटिस करती हैं विल के अलावा भी कुछ और रखा हुआ है।

वो देखती हैं। वहाँ दस हजार रुपये रखे हुए हैं।और साथ में एक नोट लिखा हुआ है।
उस (Lady) ने लिखा हुआ है। तुम करीब (7) महीने प्रेग्नेंट लग रही हो। फिर भी जॉब कर रही हो। मुझे लगता हैं। तुम्हें पैसों की बहुत ज़रूरत है। ये पैसे तुम अपने पास रखो।

किसी ने मेरी मदद की थीं और कहा था। आगे किसी की मदद करना। सो तुम भी अपने तरीक़े से आगे किसी की मदद कर देना। और इस (Chain Of Happiness) को आगे बढ़ाते रहना।

वो लड़की जो (7) महीने से प्रेग्नेंट हैं। वो ये दस हजार रुपये और नोट पड़ के उसकी आँखें नम हो जाती हैं। जब वो लड़की शाम को घर जाती हैं। तो हमेशा की तरह वो ये देखती हैं उसका पति परेशान सा चेरा लेके सो रहा होता हैं। वो अपने सो रहे पति को पीछे से जाके (Hug) कर लेती हैं।

और धीरे से उसके कान में बोलती हैं। अब तुम (Delivery) के (Tension) मत लो अब सब ठीक हो जाएगा। (I Love You My Husband Mrs.) ज़ीशान अख़्तर।

अगर आप किसी की ज़िन्दगी में खुशियों के पल बढ़ाते हो।

चाहे-अपना टाइम देके।

चाहे-उसको पैसे देके।

चाहे- उसको को सुन के।

या फिर उम्मीद की सिर्फ एक स्माइल देके।

तो वो खुशियां आप तक ज़रुर वापस आती हैं। सोचो अगर हम सब एक दूसरे के काम आते हैं। इस (Chain Of Love) को आगे बढ़ाते जाते हैं। सबका फ़ायदा सबकी ख़ुसी।

 

12. बड़ा बनो #Motivational story in hindi for sales team

 

| बड़ा बनो |#Motivational story in hindi for sales team
बड़ा बनो #Motivational story in hindi for sales team

एक बार एक नवयुवक किसी संत के पास पहुँचा. और बोला

“महात्मा जी, मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत परेशान हूँ, कृपया मुझे इस परेशानी से निकलने का उपाय बताएं संत बोले, “पानी के ग्लास में एक मुट्ठी नमक डालो और उसे पीयो.”

युवक ने ऐसा ही किया.

“इसका स्वाद कैसा लगा?”, संत ने पुछा।

“बहुत ही खराब … एकदम खारा.” – युवक थूकते हुए बोला.

संत मुस्कुराते हुए बोले,

“एक बार फिर अपने हाथ में एक मुट्ठी नमक लेलो और मेरे पीछे-पीछे आओ.“ दोनों धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे और थोड़ी दूर जाकर स्वच्छ पानी से बनी एक झील के सामने रुक गए.

“चलो, अब इस नमक को पानी में दाल दो.” संत ने निर्देश दिया।

युवक ने ऐसा ही किया.

“अब इस झील का पानी पियो.”, संत बोले.

युवक पानी पीने लगा …,

एक बार फिर संत ने पूछा,

“बताओ इसका स्वाद कैसा है, क्या अभी भी तुम्हे ये खारा लग रहा है?”

“नहीं, ये तो मीठा है, बहुत अच्छा है”, युवक बोला.

संत युवक के बगल में बैठ गए और उसका हाथ थामते हुए बोले,

“जीवन के दुःख बिलकुल नमक की तरह हैं;

न इससे कम ना ज्यादा. जीवन में दुःख की मात्रा वही रहती है, बिलकुल वही. लेकिन हम कितने दुःख का स्वाद लेते हैं

ये इस पर निर्भर करता है कि हम उसे किस पात्र में डाल रहे हैं .

इसलिए जब तुम दुखी हो तो सिर्फ इतना कर सकते हो कि खुद को बड़ा कर लो …ग़्लास मत बने रहो झील बन जाओ.

 

13.  सजा बनी सीख #Business Motivational Story in Hindi

 

सजा बनी सीख |#Business Motivational Story in Hindi
सजा बनी सीख |#Business Motivational Story in Hindi

यह पुराने समय की सनकी राजा की कहानी है | राजा के  उसके जुल्म करने की भी कोई सीमा नहीं थी | अगर उसे किसी आदमी पर गुस्सा आ जाता तो उसे बड़ी अमानवीय सज़ा दिया कर था जैसे की किसी को रात भर बर्फ के पानी के अंदर खड़े रहने की सजा |

एक दिन उसे अपने महामंत्री अरुणेश पर गुस्सा आ गया तो उसने वही तरीका अपनाया और अपने मंत्री को रात भर ठन्डे पानी में खड़े रहने की सज़ा दे दी | अरुणेश बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति था | वह सोचने लगा कि क्या तरीका हो सकता है कि राजा को सबक मिल सके और खुद वो इस सज़ा से भी बच जाये |

अचानक उसके दिमाग में एक युक्ति आ गयी और जब शाम के वक़्त राजा ने अरुणेश को सज़ा देने के लिए बुलाया तो अरुणेश चेहरे पर मुस्कान लिए राजा के पास पहुंचा तो राजा ने उसे ठन्डे पानी में जाने के लिए इशारा किया लेकिन उसने देखा कि महामंत्री के चेहरे पर बिलकुल भी शिकन या भय नहीं है जबकि वो तो ख़ुशी से झूम रहा है जैसे उसके लिए ये कोई अच्छा अवसर हो |

हैरान राजा ने उस से पूछ ही लिया कि तुम इतना प्रसन्न किस वजह से जबकि मेने तुम्हे ये सज़ा दी है क्या तुम्हे डर नहीं लग रहा इस पर महामंत्री ने राजा से कहा इसमें डरने वाली कौनसी बात है मेरे लिए तो ये एक तरह से बहुत अच्छा ही है क्योंकि राज वैध्य ने मुझे बताया है कि जल्दी गुस्सा हो जाने वाले व्यक्ति समय से पहले बुढ़ापा पा लेते है और ठन्डे पानी में खड़े रहना इसका सर्वोत्तम उपाय है  इसलिए मेरे लिए तो ये फायदेमंद ही होगा क्योंकि मैं भी तो बहुत अधिक गुस्सा करता हूँ|

राजा को चिंता हुई उसने सोचा बात तो इसकी भी वाजिब है क्योंकि मैं भी तो बहुत गुस्सा करता हूँ इसलिए उसने महामंत्री को जाने से रोक दिया और कहने लगा तुम नहीं जाओगे मैं आज की रात ये उपचार लूँगा क्योंकि राजा को बुढ़ापे का भय था |

थोडा समय बीता राजा को ठण्ड लगने लगी लेकिन जवानी के लालच में वो खड़ा रहा | लेकिन फिर थोड़ी देर बाद ही उसे ख्याल आया की ठन्डे पानी में खड़े रहकर भला कौनसी जवानी हासिल होती है जबकि व्यक्ति इसमें तो बीमार हो सकता है और अधिक देर तक खड़े रहने के बाद उसकी मौत भी हो सकती है | सहसा उसे अपनी भूल का अहसास हो गया कि मैं भी लोगो को ऐसी सज़ा देता हूँ तो उन्हें भी तो कितनी पीड़ा होती होगी | शायद इसी लिए अरुणेश ने मुझे शिक्षा देने के लिए ये कहा होगा |

राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने महामंत्री को बुलाकर उससे क्षमा मांगी और भविष्य में ऐसे अजब गजब आदेश नहीं देने का वचन भी दिया |

 

14.  बदलाव #Motivational story in hindi for depression

 

बदलाव |#Motivational story in hindi for depression
बदलाव |#Motivational story in hindi for depression

जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते है जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है और सोचते है कि क्या किया जा सकता है क्योंकि इतनी जल्दी तो सब कुछ बदलना संभव नहीं है और क्या पता मेरा ये छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आएगा या नहीं लेकिन मैं आपको बता दूँ हर चीज़ या बदलाव की शुरुआत बहुत ही basic ढंग से होती है | कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़े ही कदम दूर होती है कि हम हार मान लेते है जबकि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी बदलाव छोटा नहीं होता और वो हमारी जिन्दगी में एक नीव का पत्थर भी साबित हो सकता है | चलिए एक कहानी पढ़ते है इसके द्वारा समझने में आसानी होगी कि छोटा बदलाव किस कदर महत्वपूर्ण है |

एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था | वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी | एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |

वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी ! मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और  इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |”  क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचता जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |

यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |

महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया कि भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदल्वाव आयेगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |

 

15.  बुद्धि का फल #top 10 motivational story in hindi

 

बुद्धि का फल |#top 10 motivational story in hindi
बुद्धि का फल |#top 10 motivational story in hindi

एक रोज की बात है कि बादशाह अकबर के दरबार में लंका के राजा का एक दूत पहुँचा | उसने बादशाह अकबर से एक नयी तरह की माँग करते हुए कहा –“ आलमपनाह ! आपके दरबार में एक से बढ़कर एक बुद्धिमान , होशियार तथा बहादुर दरबारी मौजूद हैं | हमारे महाराज ने आपके पास मुझे एक घड़ा भरकर बुद्धि लाने के लिए भेजा है | हमारे महाराज को आप पर पूरा भरोसा है कि आप उसका बन्दोबस्त किसी-न-किसी तरह और जल्दी ही कर देंगे |”

यह सुनकर बादशाह अकबर चकरा गए |

उन्होंने अपने मन में सोंचा – “ क्या बेतुकी माँग है , भला घड़े भर बुद्धि का बन्दोबस्त कैसे किया जा सकता है ? लगता है | लंका का राजा हमारा मजाक बनाना चाहता है , कहीं वह इसमें सफल हो गया तो …?

तभी बादशाह को बीरबल का ध्यान आया , वे सोचने लगे कि शायद यह कार्य बीरबल के वश का भी न हो, मगर उसे बताने में बुराई ही क्या है ?

जब बीरबल को बादशाह के बुलवाने का कारण ज्ञात हुआ तो वह मुस्कराते हुए कहने लगे – “ आलमपनाह ! चिन्ता की कोई बात नहीं , बुद्धि की व्यवस्था हो जाएगी , लेकिन इसमें कुछ हफ्ते का वक़्त लग सकता है |”
बादशाह अकबर बीरबल की इस बात पर कहते भी तो क्या , बीरबल को मुँह माँगा समय दे दिया गया |

बीरबल ने उसी दिन शाम को अपने एक खास नौकर को आदेश दिया – “ छोटे मुँह वाले कुछ मिट्टी के घड़ों की व्यवस्था करो |”

नौकर ने फ़ौरन बीरबल की आज्ञा का पालन किया |

घड़े आते ही बीरबल अपने नौकर को लेकर कददू की एक बेल के पास गए | उन्होंने नौकर से एक घड़ा ले लिया , बीरबल ने घड़े को एक कददू के फूल पर उल्टा लटका दिया , इसके बाद उन्होंने सेवक को आदेश दिया कि बाकि सारे घड़ों को भी इसी तरह कददू के फूल पर उल्टा रख दें |

बीरबल ने इस काम के बाद सेवक को इन घड़ों की देखभाल सावधानीपूर्वक करते रहने का हुक्म दिया और वहाँ से चले गए |

बादशाह अकबर ने कुछ दिन बाद इसके बारें में पूछा , तो बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया – “ आलमपनाह ! इस कार्य को हो चुका समझें , बस दो सप्ताह का समय और चाहिए , उसके बाद पूरा घड़ा बुद्धि से लबालब भर जायेगा |”

बीरबल ने पन्द्रह दिन के बाद घड़ों के स्थान पर जाकर देखा कि कददू के फल घड़े जितने बड़े हो गए हैं , उन्होंने नौकर की प्रशंसा करते हुए कहा – “तुमने अपनी जिम्मेदारी बड़ी कुशलतापूर्वक निभायी है , इसके लिए हम तुम्हे इनाम देंगे |”

इसके बाद बीरबल ने लंका के दूत को बादशाह अकबर के दरबार में बुलाया और उसे बताया कि बुद्धि का घड़ा लगभग तैयार है | और बीरबल ने तुरन्त ताली बजाई , ताली की आवाज सुनकर बीरबल का सेवक एक बड़ी थाली में घड़ा लिए हुए बड़ी शान से दरबार में हाज़िर हुआ |

बीरबल ने घड़ा उठाया और उसे लंका के दूत के हाथ में सौंपते हुए कहा – “ लीजिए श्रीमान आप इसे अपने महाराज को भेंट कर दीजिए , लेकिन एक बात अवश्य ध्यान रखियेगा कि खाली होने पर हमारा यह कीमती बर्तन हमें जैसा-का –तैसा वापस मिल जाना चाहिए | इसमें रखा बुद्धि का फल तभी प्रभावशाली होगा जब इस बर्तन को कोई नुकसान न पहुँचे |

इस पर दूत ने कहा –“ हुजूर ! क्या मैं भी इस बुद्धि के फल को देख सकता हूँ |”
“हाँ ..हाँ जरुर |” बीरबल ने गर्दन हिलाते हुए कहा |

घड़े देखकर परेशान होते हुए दूत ने मन-ही–मन सोंचा –“हमारी भी मति मारी गई है | भला हमें भी क्या सूझी , बीरबल का कोई जवाब नहीं है ….भला ऐसी बात मैंने सोची कैसे ?”

घड़ा लेकर दूत के जाते ही बादशाह अकबर ने भी घड़े को देखने की इच्छा प्रकट की | और बीरबल ने एक घड़ा मँगवा दिया |

जैसे ही उन्होंने घड़े में झाँका उन्हें हँसी आ गयी | वे बीरबल की पीठ ठोकते हुए बोले –“ मान गए भई ! तुमने बुद्धि का क्या शानदार फल पेश किया है , लगता है इसे पाकर लंका के राजा के बुद्धिमान होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी |”

 

16. हाथी और छह अंधे व्यक्ति |#Time Motivational Story in Hindi

 

हाथी और छह अंधे व्यक्ति |#Time Motivational Story in Hindi
हाथी और छह अंधे व्यक्ति |#Time Motivational Story in Hindi

बहुत समय पहले की बात है , किसी गावं में 6 अंधे आदमी रहते थे. एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.” उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था पर कभी छू कर महसूस नहीं किया था. उन्होंने ने निश्चय किया, ” भले ही हम हाथी को देख नहीं सकते , पर आज हम सब चल कर उसे महसूस तो कर सकते हैं ना?” और फिर वो सब उस जगह की तरफ बढ़ चले जहाँ हाथी आया हुआ था.

सभी ने हाथी को छूना शुरू किया.

” मैं समझ गया, हाथी एक खम्भे की तरह होता है”, पहले व्यक्ति ने हाथी का पैर छूते हुए कहा.

“अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है.” दूसरे व्यक्ति ने पूँछ पकड़ते हुए कहा.

“मैं बताता हूँ, ये तो पेड़ के तने की तरह है.”, तीसरे व्यक्ति ने सूंढ़ पकड़ते हुए कहा.

” तुम लोग क्या बात कर रहे हो, हाथी एक बड़े हाथ के पंखे की तरह होता है.” , चौथे व्यक्ति ने कान छूते हुए सभी को समझाया.

“नहीं-नहीं , ये तो एक दीवार की तरह है.”, पांचवे व्यक्ति ने पेट पर हाथ रखते हुए कहा.

” ऐसा नहीं है , हाथी तो एक कठोर नली की तरह होता है.”, छठे व्यक्ति ने अपनी बात रखी.

और फिर सभी आपस में बहस करने लगे और खुद को सही साबित करने में लग गए.. ..उनकी बहस तेज होती गयी और ऐसा लगने लगा मानो वो आपस में लड़ ही पड़ेंगे.

तभी वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था. वह रुका और उनसे पूछा,” क्या बात है तुम सब आपस में झगड़ क्यों रहे हो?”

” हम यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर हाथी दीखता कैसा है.” , उन्होंने ने उत्तर दिया.

और फिर बारी बारी से उन्होंने अपनी बात उस व्यक्ति को समझाई.

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी की बात शांति से सुनी और बोला ,” तुम सब अपनी-अपनी जगह सही हो. तुम्हारे वर्णन में अंतर इसलिए है क्योंकि तुम सबने हाथी के अलग-अलग भाग छुए

हैं, पर देखा जाए तो तुम लोगो ने जो कुछ भी बताया वो सभी बाते हाथी के वर्णन के लिए सही बैठती हैं.”

” अच्छा !! ऐसा है.” सभी ने एक साथ उत्तर दिया . उसके बाद कोई विवाद नहीं हुआ ,और सभी खुश हो गए कि वो सभी सच कह रहे थे.

 

11. बुरी आदत #Motivational stories in Hindi for employees

 

11. बुरी आदत |#Motivational stories in Hindi for employees
11. बुरी आदत |#Motivational stories in Hindi for employees

एक अमीर आदमी अपने बेटे की किसी बुरी आदत से बहुत परेशान था. वह जब भी बेटे से आदत छोड़ने को कहते तो एक ही जवाब मिलता , ” अभी मैं इतना छोटा हूँ..धीरे-धीरे ये आदत छोड़ दूंगा !” पर वह कभी भी आदत छोड़ने का प्रयास नहीं करता.

उन्ही दिनों एक महात्मा गाँव में पधारे हुए थे, जब आदमी को उनकी ख्याति के बारे में पता चला तो वह तुरंत उनके पास पहुँचा और अपनी समस्या बताने लगा. महात्मा जी ने उसकी बात सुनी और कहा , ” ठीक है , आप अपने बेटे को कल सुबह बागीचे में लेकर आइये, वहीँ मैं आपको उपाय बताऊंगा. “

अगले दिन सुबह पिता-पुत्र बागीचे में पहुंचे.

महात्मा जी बेटे से बोले , ” आइये हम दोनों बागीचे की सैर करते हैं.” , और वो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे .

चलते-चलते ही महात्मा जी अचानक रुके और बेटे से कहा, ” क्या तुम इस छोटे से पौधे को उखाड़ सकते हो ?”

” जी हाँ, इसमें कौन सी बड़ी बात है .”, और ऐसा कहते हुए बेटे ने आसानी से पौधे को उखाड़ दिया.

फिर वे आगे बढ़ गए और थोड़ी देर बाद महात्मा जी ने थोड़े बड़े पौधे की तरफ इशारा करते हुए कहा, ” क्या तुम इसे भी उखाड़ सकते हो?”

बेटे को तो मानो इन सब में कितना मजा आ रहा हो, वह तुरंत पौधा उखाड़ने में लग गया. इस बार उसे थोड़ी मेहनत लगी पर काफी प्रयत्न के बाद उसने इसे भी उखाड़ दिया .

वे फिर आगे बढ़ गए और कुछ देर बाद पुनः महात्मा जी ने एक गुडहल के पेड़ की तरफ इशारा करते हुए बेटे से इसे उखाड़ने के लिए कहा.

बेटे ने पेड़ का ताना पकड़ा और उसे जोर-जोर से खींचने लगा. पर पेड़ तो हिलने का भी नाम नहीं ले रहा था. जब बहुत प्रयास करने के बाद भी पेड़ टस से मस नहीं हुआ तो बेटा बोला , ” अरे ! ये तो बहुत मजबूत है इसे उखाड़ना असंभव है .”

महात्मा जी ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा , ” बेटा, ठीक ऐसा ही बुरी आदतों के साथ होता है , जब वे नयी होती हैं तो उन्हें छोड़ना आसान होता है, पर वे जैसे जैसे पुरानी होती जाती हैं इन्हें छोड़ना मुशिकल होता जाता है .”

बेटा उनकी बात समझ गया और उसने मन ही मन आज से ही आदत छोड़ने का निश्चय किया.

 

12. उबलते पानी और मेंढक  #मन का डर |Dar Motivational story in Hindi

 

उबलते पानी और मेंढक |#मन का डर |Dar Motivational story in Hindi
उबलते पानी और मेंढक |#मन का डर |Dar Motivational story in Hindi

ये कहानी है एक “मेंढक और उबलते पानी” की । एक बार एक मेंढक के शरीर में बदलाव करने की क्षमता को जाँचने के लिए कुछ वैज्ञानिकों ने उस मेंढक को एक काँच के जार में डाल दिया और उसमे जार की आधी ऊंचाई तक पानी भर दिया । फिर उस जार को धीरे धीरे गर्म किया जाने लगा, जब गर्मी बर्दाश्त से बाहर हो जाये तब मेंढक उस जार से बाहर कूद  सके इसलिए, जार का मुँह ऊपर से खुला रखा गया ।

मेंढक को अपने शरीर में गर्मी महसूस हुई और अपने शरीर की ऊर्जा को उसने अपने आपको बाहर की गर्मी से तालमेल बिठाने में लगाना शुरू किया ! मेंढक के शरीर से पसीना निकलने लगा, वो अपनी ऊर्जा का उपयोग तालमेल बिठाने में लगा रहा था, एक वक़्त ऐसा आया की मेंढक की गर्मी से और लड़ने की क्षमता कम होने लगी, और मेंढक ने जार से बाहर कूदने की कोशिश की, मगर वो बाहर जाने की बजाय पानी में गिर जाया करता और बार बार की कोशिश के बाद भी मेंढक बाहर नही निकल पाया क्यूँकि बाहर कूदने में लगने वाली शक्ति वो गर्मी से लड़ने में पहले ही ज़ाया कर चुका था, तो अगर सही वक़्त पे मेंढक कूदने का फ़ैसला लेता तो शायद उसकी जान बच सकती थी ।

हमें अपने आसपास के माहौल से लड़ना तो ज़रूर है लेकिन सही वक़्त आने और पर्याप्त ऊर्जा रहते उस माहौल से बाहर निकलना भी ज़रूरी है !!

 

13. सक्सेस पानी है तो तोड़िए कम्फर्ट जोन की जंजीरें #Motivational story in Hindi for Class 3

 

सक्सेस पानी है तो तोड़िए कम्फर्ट जोन की जंजीरें!Motivational story in Hindi for Class 3
सक्सेस पानी है तो तोड़िए कम्फर्ट जोन की जंजीरें!Motivational story in Hindi for Class 3

एक कप चाय, मौसम के अनुरूप गर्म या ठंडा कमरा, आरामदेह बिस्तर और कानों में धीमा संगीत। क्या इससे बेहतर जिन्दगी हो सकती है। यकीनन आप का उत्तर होगा, “नहीं”।

अब एक मिनट ठहरिये और सोचिये… अगर हेमशा ऐसा ही रहे तो क्या इससे बद्तर जिंदगी हो सकती है। यकीनन इस बार भी आप का उत्तर होगा, “नहीं” । थोड़ी देर के लिए तो यह सब अच्छा लगता है। पर अगर ऐसे ही रहना पड़े तो यह बहुत दर्दनाक है। क्यों है ना ? हाँ, क्योंकि इस जिंदगी में कोई विकास नहीं है, कोई संभावना नहीं है, कोई ऐडवेंचर नहीं है।

याद है जब हम लोग बचपन में अपने मम्मी – पापा की अँगुली पकड़ कर मेला देखने जाते थे तो रोलर कोस्टर में चढने में बहुत मजा आता था। कभी ऊपर, बहुत ऊपर तो कभी नीचे बहुत नीचे। वो मजा जमीन पर एकसमान चलने में कहाँ। पर बड़े होते ही हम अपने को कटघरे में बंद करना शुरू कर देते हैं-

हमसे ये नहीं हो सकता, हमसे वो नहीं हो सकता। फिर मोनोटोनस जिन्दगी से ऊब कर खामखाँ में ईश्वर को दोष देते रहते हैं। उसने पड़ोसी को सब कुछ दिया है पर हमारे भाग्य में… ?

आपने ये कहावत सुनी होगी, “ऊपर वाला जब भी देता है छप्पर फाड़ कर देता है। ” लेकिन जरा सोचिये कि अगर आप का छप्पर ही छोटा हो तो बेचारे ईश्वर भी क्या कर पायेंगे। यहाँ छप्पर से मेरा तात्पर्य झोपड़ी या महल की छत से नहीं है बल्कि सोच से है। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर आप छोटा सोचते हैं या किसी भी बदलाव से इंकार करते हैं तो आप जीवन में तरक्की नहीं कर पायेंगे।

कहा भी गया है कि “change is the only constant.. केवल परिवर्तन ही अपरिवर्तनशील है “।

फिर भी कई लोग बातें तो बड़ी -बड़ी करेंगें पर अपने जीवन में परिवर्तन जरा सा भी स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसे लोग नयी परिस्तिथियों को स्वीकार न कर पाने की वजह से आने वाले हर मौके को गँवा देते हैं। फिर निराशा और अवसाद से घिर जाते हैं। कभी सोचा है, क्यों होता हैं ऐसा ? इसके पीछे बस एक ही कारण है उनका कम्फर्ट जोन।
क्या है ये कम्फर्ट जोन?

किसी भी इंसान का बदलाव को अस्वीकार करने का सीधा सा अर्थ है कि वो बने –बनाये ढर्रे में चलना चाहता है जिसे हम सामान्यत : कम्फर्ट जोन कहते हैं। हम इसमें जीने की इतनी आदत डाल लेते हैं कि उसके इतर कुछ सोचते ही नहीं। ये कम्फर्ट जोन, सीमित सोच का एक छोटा सा दायरा है जिसे हमने अपने चारों और खींचा हुआ है। इतने संकरे दायरे से हमारा यह लगाव, हमारे संकल्पों में डर की मिलावट कर देता है। हम इस दायरे से बाहर कुछ भी स्वीकार करने से डरते हैं।

वास्तव में देखा जाए तो कम्फर्ट जोन एक ख़ास मानसिक अवस्था है।हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इसमें इतनी बुरी तरह से जकड़े हुए होते हैं कि जब हम इसके अंदर रहते हैं तो हमें किसी एक्साइटमेंट का गहरा अनुभव नहीं होता ….न उत्साह, न जोश, न् जूनून, न ही प्रेम,न ही लगाव,न ही डर, न घबराहट,न दुःख, न सुख। सब कुछ यंत्रवत।

सुबह उठे ब्रश किया,नाश्ता किया ऑफिस गए,रुटीनल काम किया, घर आये खाना खाते हुए टी.वी देखा और सो गए। या यूं कहे जिंदगी एक ढर्रे में कटती है। इसलिए स्ट्रेस लेवल बहुत कम रहता है। क्योंकि जब भी हम कुछ नया सोचते हैं करना चाहते हैं या किसी उपरोक्त भावों में से किसी भाव को गहराई से फील करते हैं तो हमारा स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता है।
कैसे बनती है ये कम्फर्ट जोन?

एक नन्हा सा बच्चा हमेशा कुछ नया करना चाहता है, हर काम अलग –अलग तरीके से करना चाहता है। तुरंत, माता –पिता टोकते हैं नहीं ऐसे नहीं करते। स्कूल जाता हैं टीचर टोकती हैं नहीं ऐसे नहीं करते। बड़े भाई-बहन बताते है उसकी क्या बात सही है क्या गलत है, यह सिलसिला पूरी जिंदगी चलता रहता है। बच्चा वही करने लगता है जो दूसरे कहते हैं क्योंकि उसके अन्दर से डर जाता है कि अगर वो, वो सब नहीं करेगा जो कहा जा रहा है तो समाज में सबसे अलग –थलग, अटपटा सा लगेगा, लोग उसका नकारात्मक मूल्याङ्कन करेंगे। उसे समा द्वारा अस्वीकार किये जाने का भय बैठ जाता है।

कभी –कभी पेरेंट्स और टीचर्स अपनी बात मनवाने के लिए बच्चे को मार कर, सजा देकर उस पर दवाब डालते हैं। धीरे –धीरे बच्चा सोसाइटी के बनाये हुए कानून पर चलने लगता है। कुछ हद तक यह सही भी है कि इस तरह वो एक समाज द्वारा स्वीकृत नागरिक बन जाता है। पर वही बच्चा बड़ा होकर समाज द्वारा अस्वीकृत होने के भय से कुछ भी नया करने से डरता है।

पापा ने कहा है डॉक्टर बनना है…. सो बनना है। भले ही मन आर्टिस्ट बनने का कर रहा हो। शादी मम्मी की पसंद से करनी है।भले ही अपने द्वारा पसंद की गयी लड़की/ लड़के को सारी उम्र के लिए भूलना पड़े।

बड़ी बेरहमी से दबा दी जाती है भावनाएं कुछ नया या अपनी इच्छा से कुछ करने की क्योंकि लोग क्या कहेंगे का भय मन पर हावी रहता है।

क्यों तोडें कम्फर्ट जोन?

क्योंकि तभी आप अपने असली मूल्य का पता लगा सकते हैं… क्योंकि तभी आप अपने अन्दर छिपी आपार सम्भावनाओं को पहचान सकते हैं। जरा सोचिये अगर एक नदी अपने आराम के लिए सिर्फ सीधी रेखा में चलती तो क्या वो कभी सागर तक पहुँच पाती? नहीं, इसीलिए वो जहाँ काट पाए पत्थर को काट देती है,जहाँ पत्थर नहीं कट सका वहाँ धारा की दिशा बदल देती है, कहीं जरूरत समझी तो थोड़ा सा उलटी दिशा में बह कर अनुकूल स्थान देख कर वापस सही दिशा ले लेती है। नदी हमें सीखाती है अपने कम्फर्ट जोन को तोड़कर हर परिस्तिथि में हर तरीके से आगे बढ़ना… अपने लक्ष्य तक पहुंचना।
कम्फर्ट जोन तोड़ने के फायदे
आप के काम की क्षमता बढ़ जाती है।
जीवन में जब कुछ अचानक से नया घट जाता है तो आप उस के साथ आप आसानी से अनुकूलन बिठा लेते हैं।
अगर आप भविष्य में कुछ नया करना चाहते हैं तो आसानी से कर सकते हैं।
आप अपनी रचनात्मकता को आसानी से बढ़ा सकते है।
सबसे ख़ास बात, आप जिंदगी काटते नहीं जीते हैं।

क्यों मुश्किल है कम्फर्ट ज़ोन तोडना : एक महत्वपूर्ण प्रयोग

कम्फर्ट जोन को लेकर एक बड़ा ही प्रसिद्द प्रयोग हुआ। उसमें पाया गया कि जब हम कम्फर्ट जोन में रहते हुए काम करते हैं तो हमारे तनाव का लेवल सामान्य रहता है। इसे मिनिमम एंग्जायटी लेवल भी कह सकते हैं। इसमें हम आराम से जीते हैं। अगर हम इससे बाहर निकलने के लिए स्ट्रेस का लेवल थोड़ा बढ़ा ले तो हमारी परफोर्मेंस में सुधार आता है। यह स्थान हमारे कम्फर्ट जोन के जस्ट बाहर होता है जिसे मैक्सिमम एंग्जायटी लेवल कहते हैं। यानी इतने स्ट्रेस को हमारा शरीर आसानी से बर्दाश्त कर सकता है। इसमें हमारी बेस्ट परफोरमेंस रहती है। इसके बाद अगर स्ट्रेस लेवल बढती है तो परफोर्मेंस कम होती जाती है। एक लेवल के बाद एंग्जायटी बढ़ने पर परफोर्मेंस जीरो हो जाती है।यहां समझने की बात ये है कि हर मनुष्य स्वभावतः जीरो स्ट्रेस लेवल में रहना चाहता है।

अगर आप स्ट्रेस लेवल थोड़ा बढ़ाएंगे तो परफोर्मेंस सुधरेगी व् परिणाम सकारात्मक आयेंगे। लेकिन अगर आप अचानक से स्ट्रेस लेवल ज्यादा बढ़ा देंगे तो परिणाम नकारात्मक आयेंगे। ज्यादातर लोगों के साथ यह होता है कि वो बहुत ऊँचे लक्ष्य बना कर एक साथ अपनी सारी ताकत झोक देते हैं पर इतना स्ट्रेस झेल नहीं पते हैं। फिर वो काम आधा ही छोड़ कर वापस कम्फर्ट जोन में आ जाते हैं। इसीलिए कम्फर्ट जोन तोड़ना बहुत मुश्किल होता है।

कैसे तोड़े कम्फर्ट जोन?

ऊपर के प्रयोग से स्पष्ट है कि अगर आपने जिंदगी को एक ख़ास तरीके से जीने की बहुत गंभीर आदत बना ली है तो इसका सीधा सादा अर्थ हुआ कि आप अपनी कम्फर्ट जोन में कैद हो गए हैं।अगर भाग्य ने करवट बदली और अचानक से आप को जिंदगी में कुछ नया कुछ बेहतर करने का अवसर मिला तो आप कर नहीं पायेंगे। आप का एंग्जायटी लेवल इतना बढ़ जाएगा कि आप स्ट्रेस बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे और वापस अपने कम्फर्ट जोन में आ जायेंगे।

ऐसे उदाहरण आपने देखे होंगे कि कई बार दूसरे शहर में नौकरी मिलने पर घर में पूरी तरह आराम से रहे बच्चे नौकरी छोड़ कर वापस आ जाते हैं, या मायके में नाजो पाली गयी लड़कियाँ ससुराल में काम का प्रेशर बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं। जीवन से अनुकूलन करने के लिए जरूरी
है आप अपनी कम्फर्ट जोन को एक्सटेंड करते रहें । कुछ तरीके हैं जिससे आप आसानी से अपनी कम्फर्ट जोन से बाहर आ सकते हैं। आइये देखते हैं इन्हें:

बढाएं छोटे –छोटे कदम:

जरूरत है बड़े काम को छोटे –छोटे टुकड़ों में बाँट कर धीरे –धीरे स्ट्रेस लेवल बढ़ाते हुए आगे बढ़ा जाए। इससे आप की कम्फर्ट जोन एक्सटेंड होती रहेगी। जैसे कि अगर आप को लोगो से बात करने में झिझक होती है तो पहली बार सिर्फ मिलने पर सिर्फ स्माइल के साथ हेलो कहे,अगली बार एक, दो लाइन की बात करे। कम्फर्ट जोन से बाहर आने के लिए जरूरी है आप अपने डर पहचाने और उन्हें दूर करने की दिशा में रोज़ एक –एक स्टेप बढ़ते जाए।

 

दोस्तों आपको ये Motivational Stories For Success कहानियां कैसी लगी? आप हमें नीचे दिए गए कम्मेंट सेक्शन में ज़रूर बताये।

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