प्यासी लोमड़ी

प्यासी लोमड़ी

एक बार की बात है:

एक बार एक लोमड़ी अपना  रास्ता भटक गई और वो  चलते-चलते एक रेगिस्तान में जा पहुंची।
धूप सर पे थी तो वो चलते-चलते थक गयी।प्यासी लोमड़ी

इतने में उसे एक कुआं दिखा लोमड़ी कुआं के पास पहूंची, और उसमें झाँक कर देखा और बोला-

आहा इसमे तो पानी है और मुझे प्यास भी बहुत तेज लगी है,
पर कुआं बहुत गहरा है पानी कैसे पिऊ।

वो ये सोच ही रही थी कि उसका पैर फिसला और बह कुए में जा गिरी।
फिर उसने जी भर कर पानी पिया।
लोमड़ी- अरे बाह ये पानी तो बहुत मीठा है, मेरी प्यास तो बुझी पर मैं बाहर कैसे निकलू ।

वो चिल्लाने लगी- बचाओ-बचाओ बचाओ

बहां से एक बकरी गुजर रही थी,
प्यासी लोमड़ी

उसने लोमड़ी की आवाज़ सुनी और वो कुए के पास जा  पहुची।
बकरी बोली- दोस्त तुम अंदर क्या कर रहे हो और तुम कुए में गिरे कैसे।
तब लोमड़ी को एक उपाय सूझा।
उसने कहा बाहर कितनी धूप है और ये पानी कितना ठंडा और मीठा है, तुम भी अंदर आ जाओ और पानी पी लो।

बकरी- फिर तुम बचाओ- बचाओ क्यों चिल्ला रहे थे।
लोमड़ी ने चाल चलते हुए कहा- मैं बचाओ-बचाओ नहीं मैं तो बोल रहा था कोई आओ कोई आओ और ये मीठा और ठंडा पानी पी लो पी लो। तुम ने शायद गलत सुना होगा।
तब बकरी बिना कुछ सोचे समझे बगैर  ही कुए मे कूद गई। फिर उसने  भी पेट भर कर पानी पिया और

बोली- तुम सच कह रहे थे दोस्त !
ये पानी बहुत ठंडा और मीठा है। पर अब हम बाहर कैसे निकलेंगें।
लोमड़ी- मेरे पास एक उपाय है, तुम अगर दीवार के पास खड़े होंगे तो मैं तुम्हारे ऊपर चढ़ कर बाहर कूद जाऊंगी और कुए से बाहर निकल जाऊंगी।

बकरी बिना कुछ सोचे समझे दीवार के पास खड़ी हो गयी।
लोमड़ी बकरी पर चढ़ गयी और एक छलाँग लगाकर बाहर निकल गयी।
तब बकरी ने कहा- दोस्त अब मेरा क्या होगा, मुझे बाहर कौन निकालेगा तुमने तो कहा था उपाय है।

तब लोमड़ी बोली- मैने उपाय निकाला था खुद को बाहर निकालने के लिए, तुम्हे बाहर निकालने के लिए नहीं ।
तुम भी खुद के लिए कोई उपाय सोचो और बाहर निकलो।
ये कह कर लोमड़ी बहाँ से भाग गयी

और बकरी रोती और चिल्लाती रहे गयी।

शिक्षाइसीलिए हमे  जल्दी में कोई भी निर्णय नही लेना चाहिए और किसी पर भी आंख बंद कर के बिस्वास नही करना चाहिए

बहादुर चींटी

बहादुर चीटी

बहुत समय की बात हैं-

एक चीटियों का झुंड एक मिटटी के घर में रहता था।।    झुंड बहुत बड़ा था। कई सौ चीटियों एक साथ खुशी-खुशी झुंड में रहतीं थीं।

वो एक दूसरे की मदद करती थीं इसलिए उनका झुंड और मज़बूत हो रहा था।।                                            और फिर एक दिन बहुत जोर की बारिश हुई,

बारिश का पानी उनके घरों में घुस गया। सभी चींटी घबरा गई थीं और एक दूसरे की मदद करने लगी।।              तभी एक चींटी बोली हम बर्बाद हो गए।

फिर एक चींटी और बोली- हाय मेरे बच्चे!

तभी एक चींटी बोली भाग जाओ।।                          फिर एक चींटी जिसका नाम जॉनी था-

बह उस घर से निकलने की कोसिस कर रही थीं जो पानी से डूब रहा था। चींटी उससे रोकने लगी-

जॉनी वहां मत जाओ यहाँ तक के उसकी माँ भी कहने      लगी- जॉनी मत जाओ बेटे यहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं।

देखो ज़मीन पर पानी ही पानी हैै।                          लेकिन जॉनी ने हार नही मानी और बह घर के ऊपर जाके एक पेड़ पे चढ़ने की कोसिस करती हैं।

लेकिन चढ़ नहीं पाती। वह बहुत कोसिस करने के बाद पेड़ पे चढ़ जाती हैं और एक पत्ते पे बैठ जाती है।

हवा तेज़ चलने की वजह से वो पत्ता टूट गया फिर चींटी हिम्मत बनाये उस पत्ते पर बैठी रही।

फिर बह हवा से दूर जाके गिरती हैं जहां पानी नहीं होता हैं और बोलती हैं अगर मेरे दोस्तों ने हार नही मानी होती तो आज वो मेरे साथ होते।

शिक्षा :- हार मानने से कभी कुछ नहीं होता हैं हमें मरते दम तक कोसिस करना चाहिए।

मेहनत बड़ी या अक्ल

मेहनत बड़ी या अक्ल

एक बार की बात है- अमित और अभिनव नाम के दो दोस्त थे। दोनों की दोस्ती बड़ी पक्की थीं। पढ़ाई खत्म होने के बाद दोनों की एक जगह नौकरी लग गई।

नौकरी लगने के बाद दोनों कैंटीन में एक दूसरे से बात करते हैं।

अमित कहता है- मेहनत करने के बाद नौकरी भी लग गई और यहाँ भी जम के मेहनत करेंगे।

अभिनव बोला- हां बिल्कुल और एक साल के बाद हमें प्रोमोशन भी मिल जाएगा।

अमित बोला- प्रोमोशन तो मिलना ही चाहिए हम मेहनत जो इतनी करते हैं। हमारे बॉस चाह कर भी प्रमोशन रोक नहीं पायेंगे।

अभिनव बोला- चलो लंच भी खत्म हो गया हैं हमें चलना चाहिए।

दोनों लंच होने के बाद अपने अपने काम पर लग जाते हैं एक साल बीत जाता है और प्रोमोशन का भी समय आ गया हैं जिसका दोनों बेसबरी से इंतज़ार कर रहे थे।

अभिनब- मुझे तो लगता हैं इस साल मुझे ही प्रोमोशन मिलेगा तू अगले साल की तैयारी कर ले।।                  फिर अमित बोला- मुझे लगता हैं मुझे ही इस साल प्रोमोशन मिलेगा तू करना अगले साल की तैयारी कर।

इतने में बॉस आ जाते हैं और प्रोमोशन में सिर्फ अमित का नाम लेके चले जाते है।

अभिनव को प्रोमोशन में अपना नाम ना सुनने में झटका लगता हैं और वो बहुत नाराज हो जाता हैं।

तभी अमित उससे बोलता है- कोई नहीं अभिनब ऐसा हो जाता है तुमने भी बहुत मेहनत की है हो सकता हैं हमारे बॉस को कुछ पसंद नहीं आया होगा।

पर तु देखना अगली बार तुझे ज़रूर प्रोमोशन मिलेगा।  बिना कुछ कहे ही अभिनब बहाँ से चला जाता हैं और अपनी सीट पर बैठकर सोचने लगता हैं।

मैंने साल भर मेहनत की लेकिन सिर्फ अमित को ही प्रोमोशन मिला मुझे क्यो नहीं।।                              ऐसा कैसे हो सकता हैं और वह कहता हैं मैं आज ही ये नौकरी छोड़ दूंगा।

अभिनब अपने बॉस के पास जाकर नौकरी छोड़ने की बात कहता है सर मैं ये नौकरी नहीं कर सकता मैं आज ही ये नौकरी छोड़ना चाहता हु।

बॉस बोले- लेकिन क्यू अचानक से तम्हें क्या हो गया अभिनब बोला- मैं भी पिछले एक साल से मेहनत कर रहा हु लेकिन मैं और अमित एक साथ यहां काम करने आये थे प्रोमोशन सिर्फ अमित का ही।

ये तो बिल्कुल गलत हैं सर लगता हैं आप उसी को प्रोमोशन देते जो आपकी चापलूसी करे गुस्से में अभिनब बहुत सी ऐसे गलत बातें बोल जाता हैं जो उससे नहीं बोलना चाहिए थीं।

उसके बॉस उसकी सारी बातें बहुत ध्यान से सुनते हैं और फिर बोलते हैं- देखो अभिनब तुमनें बहुत मेहनत की लेकिन उतना नहीं जितना तुम्हें करना चाहिए थीं।

अभिनब बोला- मुझे पता है मैंने कितनी मेहनत की है   मुझे यहां काम नहीं करना बॉस बोले ठीक है मैं तुम्हें प्रोमोशन भी दे दूंगा। और अमित से अच्छी सेलरी भी पर तुम्हें उसके लिए एक काम करना होगा।

अभिनब बोला- ठीक है मैं करूँगा

बॉस बोले- बाजार जाके पता करो के बहाँ आम कौन कौन बेच रहा हैं थोड़ी देर बाद अभिनब बाजार से बापस आता हैं और कहता हैं सर बाज़ार में सिर्फ एक ही आदमी आम बेच रहा था।

अच्छा तो ठीक है अब जाके ये पता करो के बाज़ार में आम कितने रुपय किलो मिल रहा है।।                      और अभिनब आम के दामो का पता लगा के बापस आता हैं और कहता हैं- सर बाजार में आम पचास रुपए किलो मिल रहे हैं।

ठीक हैं अब मैं यही काम अमित को दूंगा।

बॉस अमित को बुलाते हैं और उससे भी बाज़ार भेज देते हैं सब सुनने के बाद अमित बाजार में आम के दामो का पता लगाता हैं पता करने के बाद अमित बापस अपने बॉस के पास आता हैं।

सर बाज़ार में सिर्फ एक ही आदमी हैं जो आम पचास रुपये की कीमत से बेच रहा हैं अगर हम उससे सारे आम ले ले तो वह चालीस रुपए की कीमत से दे देगा।

उसके पास साथ किलो आम हैं अगर हम सारे आम चालीस रुपए में खरीदकर उन आमो को बाज़ार में पचास में बेचे तो हमे बहुत सारा मुनाफ़ा होगा।

अमित की बात सुनकर अभिनब हैरान होता है और उसे अपनी गलती का एहसास हो जाता है और इससे ये पता चल जाता हैं के सिर्फ मेहनत करने से काम नहीं होता हमे अक्ल का इस्तेमाल करना चाहिए।

अभिनब नौकरी छोड़ने की बात अपने मन से निकाल देता है और काम करने का फैसला करता हैं

शिक्षा : – हमें हमेशा काम करते समय अपनी अक्ल इस्तेमाल करना चाहिए जब मेहनत और अक्ल साथ मिलते हैं तो हमेशा काम अच्छा ही होता हैं

जादुई कड़ा और पैसो का पेड़

बहुत समय पहले एक गांव में चम्पू नाम का किसान रहता था।
जादुई कड़ा और पैसो का पेड़चम्पू बहुत गरीब था उसके पास सिर्फ एक गाय ही थी जिसका दूध बेचकर अपना गुजारा करता।

एक बार चम्पू की बीबी बीमार पड़ गयी।
चम्पू के पास उसके इलाज के लिए पैसे नही थे।
इएलिये उसने अपनी गाय बेचने का फैसला किया और बाज़ार की ओर चल पड़ा।

बाज़ार का रास्ता जंगल से होकर जाता था।
रास्ते मे उन्हें एक साधु दिखायी देते हैं।

चम्पू उनसे पूछता है- साधु महाराज आप इस जंगल मे क्या कर रहे हैं।

साधु – मैं दूसरे गांव से आया हु मुझे पास ही के गांव में जाना था पर मैं रास्ता भटक गया हूं और मुझे भूख भी लग रही है।

चम्पू कहता है- साधु बाबा गांव तो बहुत दूर है और मैं अपनी गाय को बाज़ार में बेचने जा रहा पर आप कहे तो मैं आपको गाय का दूध निकाल कर दे सकता हूँ ये मेरी गाय का सौभाग्य होगा।
साधु- ठीक है बेटा।

साधु के कहते ही चम्पू दूध निकाल कर दे देता है जिसे पीकर साधु की भूख शांत हो जाती है और बे चम्पू से पूछते हैं- तुम इस गाय को बेचने क्यों ले जा रहे हो।

चम्पू– बाबा मेरी बीबी की तबियत बहुत खराब है उसके इलाज के लिए मेरे पास पैसे नही हैं, इसीलिए मैं इस गाय को बेचने जा रहा हु ताकि अपनी बीबी का इलाज करा सकूँ।

चम्पू की ये बात सुनकर साधु कहते हैं- बेटा तुमने और तुम्हारी गाय ने मेरी बहुत मदद की है इसलिए तुम्हे इस गाय को बेचने की जरुरत नही है।

इस पर चम्पू कहता है- लेकिन बाबा अगर मैं इसे नही बेचूंगा तो अपनी पत्नी का इलाज कैसे करूंगा?
चम्पू की ये बात सुनकर साधु एक मंत्र पड़ते हैं और उनके हाथ मे एक कड़ा आ जाता है।

साधु वो कड़ा चम्पू को देते हुए बोलते हैं- इस कड़े को तुम अपने हाथ मे पहन लो।

जब तुम इसे अपने माथे से लगाओगे तब तुम्हारे सामने एक पैसो का पेड़ आ जाएगा, तुम का पेड़ से अपनी जरूरत के अनुसार पैसे तोड़ लेना।

फिर बह अपने आप गायब हो जाएगा। पर याद रखना तुम्हारे अलाबा इसे कोई और इस्तेमाल नही कर सकता

और जिसने भी किया वो ना तो जीवन भर बोल पाएगा और न ही चल पाएगा हमेशा बिस्तर पर पड़ा रहेगा।

चम्पू बहुत खुश हो जाता है और कहता है- धन्यवाद बाबा मैं ध्यान रखूँगा और बह अपनी गाय के साथ बापस अपने गांव लौट जाता है।

घर पहुच कर चम्पू अपनी बीबी को सारी बात बताता है उसकी बीबी बहुत खुश हो जाती है। चम्पू कड़े को अपने माथे से लगाता है जिससे उसके सामने पैसो का पेड़ आ जाता है।

अपनी अपनी बीबी के इलाज के अनुसार पैसे तोड़ लेता है फिर पेड़ गायब हो जाता है।

अब चम्पू रोज़ जरूरत के हिसाब से पैसे तोड़ा करता जिससे धीरे धीरे उसकी गरीबी दूर हो गयी और बह गांव के गरीबो की भी मदद करने लगा।

जिसे देख कर गांव के लोग हैरान रहे जाते हैं।
उनमे से दो ईर्ष्यालु ब्यक्ति रामु और हरि आपस मे बात करते है

कि चम्पू के पास इतने पैसे आए कहाँ से, हमे चम्पू पर नज़र रखनी चाहिए और बे दोनों अब से चम्पू पर नज़र रखने लगे।

ऐसे ही एक दिन हरि की नज़र चम्पू के घर में जाती है वो देखता है कि चम्पू पेड़ से पैसे तोड़ रहा है वो ये देख कर हक्का बक्का रहे जाता है।

हरि कहता है- अच्छा तो इसके पास ये जादुई पैसो का पेड़ है, इसी पेड़ की बजह से वो इतना धनवान बन गया है और वो ये बात रामु को बता देता है

ये सुनकर रामु को लालच आ जाता है और वो कहता है- हरि जब रात को सब सो जाएंगे तब हम उस पेड़ के सारे पैसे चुरा लेंगे हरि राज़ी हो जाता है।

रात होते है रामु और हरी पेड़ के पैसे चुराने के लिए चम्पू के घर जाते है पर उन्हें वो पेड़ बहाँ नही दिखता।
ये देख कर रामु को हरि पर बहुत गुस्सा आता है और वो कहता है- तुमने मुझे बेबखूफ बनाया ।

हरि उसे समझाने की कोसिस करता है पर रामु उसकी एक नही सुनता और गुस्से से वहां से चला जाता है लेकिन हरि उन पैसो के पेड़ को नही भूल पाता और अगले दिन

हरि फिर से चम्पू के घर के बाहर छिप जाता है और वो बहुत देर तक घर मे झाकता रहता है फिर रोज की तरह चम्पू उस कड़े को माथे से लगाता है तब उसके सामने पैसो का पेड़ आ जाता है

वो उस पेड़ पर से अपनी जरूरत के अनुसार पैसे तोड़ लेता है और पेड़ गायब हो जाता है।

हरि ये देख कर सब समझ जाता है और कहता है- अच्छा तो इस तरह पेड़ को बुलाया जाता है मैं आज रात ही उस जादुई कड़े को चुरा लूंगा और अमीर बन जाऊंगा ऐसा कह कर बहां से चला जाता है

और रात को चुपके से घर के अंदर जाकर किसी तरह चम्पू के हाथ से कड़ा निकाल लेता है और भाग जाता है।
घर आकर कहता है-

अब मैं भी अमीर बन जाऊंगा। मेरे पास भी कभी न खत्म होने वाले पैसे होंगे। हरि कड़े को अपने हाथ में पहन कर जैसे ही अपने माथे से लगाता है उसे एक जोर का झटका लगता है और वो जमीन पर गिर जाता है।

हरि उठने की बहुत कोशिस करता है पर न वो उठ पाता है और न ही बोल पाता है और कुछ देर बाद वो हार मान कर कोशिस करना बंद कर देता है।

अगले दिन जब चम्पू सोकर उठता है तब बह अपने हाथ में कड़ा न पाकर परेशान हो जाता है।

जब चम्पू बाहर जाता है तब उसे हरि की हालत के बारे में पता चलता है तब चम्पू को सारी बात समझ आ जाती है।

और वो तुरंत ही हरि के घर जा पहुचता है और हरी से कहता है- हरि ये कड़ा सिर्फ मेरे ही हाथ मे काम करेगा,

मुझे ये बरदान सादु बाबा ने दिया था और उन्होंने ये भी कहा था की मेरे अलाबा जो भी इस कड़े का इस्तेमाल करेगा वो न तो कभी चल पाएगा।

और न ही कभी बोल पाएगा ये कह कर चम्पू हरि के हाथ से कड़ा ले लेता है और वहां से चला जाता है।

Moral:- हमें कभी भी किसी से भी ईर्ष्या नही करनी चाहिए

झूठी दोस्ती हिरण और कौआ़

झूठी दोस्ती हिरण और कौआ

एक बार की बात है-

एक जंगल में सभी जानवर रहते थे जिनमें से थे दो दोस्त कौआ और हिरण।।                                              दोनों खुशी से जंगल में साथ घूमा करते थे और मज़े करते थे।

जो मन मे आया वो खाते थे और हमेशा तंदरुस्त और सेहतमंद हुआ करते थे। एक दिन जब वो दोनों जंगल मे घूम रहे थे तभी एक चालाक लोमड़ी की नज़र हट्टे कट्टे हिरण पे पड़ी।

और लोमड़ी मन ही मन बोली- अगर मुझे इस हिरण को खाना है तो कोई ना कोई रास्ता तो निकालना होगा।।  अगर मैं इससे दोस्ती कर लूं तो मैं इसे फसा सकता हु।

एक दिन लोमड़ी ने देखा हिरण अकेले घास चर रही हैै।लोमड़ी हिरण के पास जाकर हिरण से बोली-

हे दोस्त कैसी हो लोमड़ी की आवाज़ सुनते ही हिरण थोड़ा शतर्क हो गई और बोली कौन हो तुम?                      और तुम मुझे अपना दोस्त क्यो बुला रहे हो लोमड़ी बोली-क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी?

हिरण– अंजान लोगो से दोस्ती नहीं करना चाहिए मुझे माफ़ करना पर मैं आपकी दोस्त नहीं बन सकती।।  लोमड़ी– मैं इस जंगल में अकेली हु मुझे सारे दोस्तो ने छोड़ दिया है मैं बहुत दुःखी रहती हूं।

और जब मैंने तुमको देखा तो खुश हो गयी थी। अगर तुम मेरी दोस्त बन जाओगी तो मैं बहुत खुश हो जाऊँगी। हिरण ने उसपर तरस खाया और उससे दोस्ती कर ली।

उस दिन से दोनों साथ समय बिताने लगे लोमड़ी बोली- मेरे दोस्त क्या तुम मुझे अपना घर दिखाओगी मैं बहुत उत्सुक हु।

हिरण बोली- हां मेरे दोस्त चल। कौआ़ ने दूर से देखा दोनों साथ चल रहे थे हिरण लोमड़ी को कौआ़ के पास ले आई हिरण बोली- मेरे दोस्त ये लोमड़ी मेरी दोस्त हैं ये बहुत ही अच्छी है इसका कोई दोस्त नहीं है ये अकेला रहता हैं हम इसके दोस्ती बन जाते हैं।

कौआ़ बोला दोस्त बो भी एक लोमड़ी के ये तो ग़लती ही होगी क्या तुम्हें नहीं पता।।                                   वाकी तुम्हारी मर्ज़ी हैं तुम किससे दोस्ती करना चाहती हो ऐसा कह कर कौआ़ चला गया। लेकिन हिरण को लोमड़ी पे बिसवास था।

एक दिन लोमड़ी ने हिरण को बोला- एक जगह ले जायेगा जहां पर उसका मन पसंद खाना मिलेगा। अगले दिन लोमड़ी हिरण को दूर खेत पर ले गई।।                   हिरण इतना खाना देख कर खुस हो गई।

हिरण बोली- मेरे दोस्त तुम नहीं होते तो मुझे इतना खाना मिलता ही नहीं। तुम्हारी वजह से मुझे ये सब खाने को मिल रहा हैं। लोमड़ी मन ही मन हां हां अगर मुझे तुम्हें खाना हैं तो तुम्हें खिला कर मोटा करना है ना।

फिर लोमड़ी हिरण से बोली मुझे लगा तुम्हें ये खाना पसंद आएगा इसलिये मैं तुम्हें यहाँ ले आया दिन बीतते गये हिरण लोमड़ी को इस खेत से खाना खाने की आदत हो गई।

वो दोनों हर रोज़ यहाँ आतें जल्द ही खेत के मालिक को पता चल गया के उसके खेत को कोई खराब कर रहा हैं और उसको पकड़ना चाहता था।

उसने खेत में एक जाल बिछाया जब एक दिन लोमड़ी और हिरण वहां पे आये तो हिरण उस जाल में फस गई। हिरण के फसते ही लोमड़ी वहां से भाग गई और इंतज़ार करने लगी मालिक आये और हिरण को मार दे।

हिरण मदद के लिए चिल्ला रही थीं फिर हिरण को कौआ़ की बाते याद आ गई फिर कुछ देर बाद कौआ़ को हिरण की आवाज़ सुनाई दी उसको लगा वो आवाज़ हिरण की हैं।

कौआ़ हिरण के पास गया हिरण कौआ़ से बोली दोस्त मेरी मदद करो फिर कौआ़ बोला- अगर तुमनें मेरी बात मानी होती तो आज इस परेशानी में ना होती।

हिरण बोली- हां मेरी ग़लती है अब मेरी मदद कर दो। कौआ बोला- एक काम करो तुम जब मालिक आएगा तो तुम मरने का नाटक करो और मैं तुम्हारे पैर को चुभाते रहूंगा।
जल्दी करो मालिक आ रहा हैं हिरण ने मरने का नाटक किया और कौआ़ भी हिरण को अपनी चोंच से चुभाता गया ये देखकर मालिक को लगा हिरण सायद मर गई

उसने जाल को खोल दिया उसी समय मौका देख हिरण वहां से भाग निकली। लोमड़ी दूर खड़े होकर ये सब देख रहीं थीं और हिरण के भाग जाने पर उदास हो गई।

उसको लगा वो हिरण के मज़ेदार मास को खायेगा।। और कौआ़ ने आ कर सब ख़राब कर दिया। हिरण ने कौए का धन्यवाद किया। दोनों ने फिर से दोस्ती कर ली।

और दोनों ने बोला- अब लोमड़ी को सबक सिखाना पड़ेगा हिरण बोली हां मुझे पता है वो कहां रहता हैं ।.        कौआ़ बोला- जैसे उसने तुम्हें फसाया था अब तुम भी उसका विसवास जीतकर उसे फसाओ।

कौआ़ बोला- किसी भी तरह हम उसे खेत के मालिक से पकड़ वाएँगे।। हिरण बोली- बहुत ही अच्छी योजना हैं मेरे दोस्त ।

हिरण कौआ़ को लोमड़ी के घर के पास ले गई और कौआ बोला- मैं दूर से सब देखता रहूंगा तुम जाओ लोमड़ी के पास।
फिर लोमड़ी हिरण के पास गई हैं और जाके बोली-

लोमड़ी– तुम मुझसे पहले की तरह बात क्यो नहीं कर रहीं हो?
हिरण– तुम्हें पता है मैं उस दिन खेत के मालिक के जाल में फस गई थीं भगवान की दया से मैं वहां से बच निकली।
लोमड़ी बोली- मैं उस दिन पानी पीने गया था ये सोचकर के तुम थोड़ा खाना खा लोगी मुझे पता ही नहीं था के ये सब हुआ। नहीं तो मैं तुम्हारी मदद ज़रूर करती।

लोमड़ी– चलो जो हुआ सो हुआ बुरा मत मानो मेरे दोस्त। लोमड़ी मन ही मन फिर बोली- इस बार हिरण मेरे पास खुद आई हैं अब तो मुझे इसको खाना ही पड़ेगा।

अब रोज़ की तरह दोनों साथ साथ समय बिताने लगे इसी तरह हिरण ने एक खेत का पता लगाया था जहां खेत का मालिक रोज़ जाल बिछाता था।। फिर हिरण लोमड़ी को उस खेत पे ले गईं और फिर जाल से अंजान लोमड़ी उस जाल में फस गई।

लोमड़ी हिरण से बोली- मेरे दोस्त मुझे इस जाल से बचाओ मैं इसमें फस गयी हूँ।
तुमनें मेरे साथ भी ऐसा ही किया था ना ये कहकर हिरण और कौआ़ वहां से चले गए।
और दूर से लोमड़ी को संघर्ष करते हुए देखते रहे।

इसी दौरान खेत का मालिक वहां आ गया और देखा यही लोमड़ी हैं जो उसकी फ़सल को खा रहा था। तो उसको पकड़ ले गया किसान ने लोमड़ी को एक जगह पे बंद कर दिया।

किसान के जाने के बाद हिरण और कौआ़ उसके पास गए और हिरण बोली तुमने मुझे धोका दिया था अब तुम भुगतो। ऐसा कह कर दोनों वहां से चले गए

शिक्षा :- हमें हर किसी से दोस्ती नहीं करना चाहिए और ना ही हर किसी पे आँख बंद कर के विस्वास करना चाहिए और अपने प्रिय दोस्त की बात मानना चाहिए।।

कौआ और बूढ़ी औरत

कौआ और बूढ़ी औरत

एक बार की बात है-

एक गांव था जिसका नाम झकरकट्टी था।
वहां एक पीपल का पेड़ था जो कौओं के झुंड का घर था।
हमेशा की तरह सभी कौए खाने की तलाश में निकल पड़े।
शिवाय एक कौआ के उसका नाम था जैक

सूरज की किरणें निकल ने तक वो सोता रहा।

कौआ उठा और बोला- सूर्य दय….समय क्या हो रहा हैं ।उसने देखा आठ बज चुके हैं।                                  वह बोला- अब सब जा चुके हैं

अब मुझे अकेले ही जाना होगा।
जैक खाने की तलाश में गाँव की सड़कों की छान मारने लगा।
जैक उड़ते उड़ते थक गया और छत पर जा के बैठ गया
और बोला- मुझे भूख लगी हैं अपनी भुख कैसे मिटाऊँ
जैक ने हर तरफ देखा ये पता करने के खुशबू कहाँ से आ रही।
एक बूढ़ी औरत बड़ा तल रही थी।
बड़े का साइज देख कर जैक के मुंह में पानी आ गया
और तुरंत उसे बड़ा खाने की इच्छा हुई।

तो जैक नीचे उतरा और औरत के पास जाकर बैठ गया।जैक ने देखा उस औरत ने एक कौए को बांध कर रखा हैं।जैक धीरे से उस बड़े के पास गया।

वो औरत बोली- हे क्या तुम बड़ा चुराने आये हो मैं तुम्हें भी बांध दूंगी वह बोला कितनी खतरनाक औरत हैं बड़ा पाना जब ही आसान होगा जब वो यहां नहीं होगी।

जैक को एक तरक़ीब
सूझी जल्दी से वो घर के पीछे चला गया।                  एक बच्चा बोला- दादी माँ जरा इधर आइये बूढ़ी औरत बोली आ रही हु बेटा जैसे ही वो औरत उस बच्चें के पास गई जैक ने वो बड़ा उठा लिया और घर की ओर रवाना हो गया।

जैक बहुत खुश था वो बड़ा खाने ही वाला था एक लोमड़ी
उसके पास से गुज़री।।                                          जैसे ही लोमड़ी ने बडे को देखा वो बड़ा
छीन लेता चाहती थीं।

लोमड़ी बोली- मैं वो बड़ा जैक से लेकर
रहूंगी जैक को झांसा देने के लिए मुझे कुछ सोचना पड़ेगा।
वह बोली- हेलो ब्लैकी यही तुम्हारा नाम हैं ना?

लोग जो कहते हैं काला यानी खूबसूरत … वाह तुम्हारी आंखें प्यारी और नियारी हैं मेरे दोस्त और तुम्हारे पंख उसके लिए तो शब्द ही
नहीं हैं मेरे दोस्त।

लोमड़ी बोलती ही रही

जैक को अपनी तारीफ़ अच्छी लगी और ये बातें सुन कर फुला नहीं समा रहा था।

लोमड़ी बोली- ऐसे खूबसूरत पंछी की आवाज़ भी खूबसूरत होना चाहिए तुम मेरे लिए एक गाना गाओगे मेरे दोस्त।
जैक पूरी तरह बहक चुका था जैसे ही जैक ने काओ काओ आवाज़ करी बड़ा नीचे गिर गया और लोमड़ी के हाथ लग गया।

लोमड़ी बोली- काम बन गया।

जैसे ही जैक नीचे उतरा लोमड़ी जंगल की ओर भाग गई
जैक बेवकूफ बन मायुस हो गया

और बोला- मुझे उस लोमड़ी की बात नहीं मान नी चाहिए थी

शिक्षा : – जैसे लोमड़ी ने कौआ़ को बेवकूफ बनाया वैसे ही हमें चापलूसी करने वालो से साबधान रहना चाहिए

माली काका

माली काका

एक गांव में एक माली काका रहते थे काका एक दिन बगीचे में पौधा लगा रहे थे।

उसी समय उस नगर का राजा उधर से जा रहा था राजा भेष बदलकर जनता का हाल जानने के लिए निकला था !

राजा ने देखा कि माली काका ने बड़ी लगन से एक पौधा लगाया। काका बूढ़े हो चुके थे फिर भी वो पौधा लगा रहे थे।

ये देखकर राजा को आश्चर्य हुआ मन ही मन राजा सोचने लगा कब ये पौधा बड़ा होगा कब ये फल देगा जब फल देगा तब तक क्या माली जिंदा रहेगा ?

राजा माली काका के पास पहुचा और उनसे पूछा – तुम किस चीज़ का पौधा लगा रहे हो ?”

माली काका ने जबाब दिया “नारियल का”

राजा ने पूछा- इसमे फल कब लगेंगे ?

माली काका ने छोटा सा – उत्तर दिया : पंद्रह बरसो के बाद।

राजा ने पूछा- क्या तुम इतने दिनों तक जीवित रह पाओगे।

काका ने जबाब दिया नही लेकिन मेरे बेटे बेटियां और नाती पोते तो इसके फल खाएँगे। राजा कुछ और पूछता उसके पहले ही माली काका ने हँसकर कहा-

अरे भाई मैं भी तो अब तक अपने बाप दादा के लगाए पेड़ो के फल खा रहा हु वो देखो जो अखरोट का पेड़ हैं उसे मेरे दादा जी ने लगाया था।

राजा मन ही मन खुस होकर लौट गया अगले दिन उसने माली काका को दरबार मे बुलाया और ढेर सारे इनाम दिए

शिक्षा : – जो दूसरों की भलाई के बारे में सोचता हैं वो महान होता हैं।

सुआर्थी दोस्त

सुआर्थी दोस्त

एक बार की बात हैं एक बंदर और ख़रगोश दोस्त हुआ करते थे वह दोनों एक साथ खेलते थे साथ खाते थे बल्कि ही साथ रहते थे सब कुछ अच्छा चल रहा था तभी अचानक बंदर को लगने लगा ख़रगोश बहुत ही सीधा साधा और मासूम हैं।

धीरे धीरे बंदर ने ख़रगोश का फ़ायदा उठाना शुरू कर दिया। बंदर बोला- ख़रगोश क्या तुम मेरे पैर दबा दोगे मेरे पैर बहुत दर्द कर रहे हैं ख़रगोश बोला ठीक है।

बंदर बोला- क्या तुम मेरे लिए गर्मा गर्म शूप भी बना लाओगे?

ख़रगोश बोला- बना दूंगा।  ख़रगोश ने बंदर के पैर दबाए और शूप भी बना के दिया।

फिर एक बिल्ली बहाँ आ गई और बोली ख़रगोश तुमनें बंदर के पैर दबाये और शूप भी बना दिया।

ख़रगोश बोला- कोई बात नहीं वो मेरा दोस्त हैं बिल्ली बोली दोस्त होना अच्छी बात हैं

पर तुम्हें दिखता नहीं बंदर तुम्हारा नाज़ायज़ फ़ायदा उठा रहा हैं।

खरगोश- मुझे तो नहीं लगता बिल्ली।                          ये कह के ख़रगोश बहाँ से चला गया फिर एक दिन बंदर को अकेला देख भेड़िया बोला- बंदर तुम बहुत मज़ेदार हो लगता हैं मेरी दावत होंगी।

बंदर ने मन ही मन सोचा मुझे कुछ सोचना होगा नहीं तो ये भेड़िया मुझे खा जायेगा।                                      बंदर बोला- तुम्हारा खाना बनना मेरे लिए फ़क्र की बात होगी पर ज़रा मुझे देखिये मैं कितना पतला हु मुझे खाकर आपकी भूख भी नहीं मिटेंगी।
भेड़िया बोला- क्या फ़र्क़ पड़ता हैं मैं भूखा हु।            तभी बंदर बोला- रुकिये मेरे पास एक बढ़िया प्लान हैं एक ख़रगोश मेरे घर में रहता हैं और वो बहुत मोटा ताजा हैं और मैंने सुना हैं उसका दिल भी बहुत अच्छा है।

उसे खाकर आपको मज़ा आ जाएगा। ये सुनकर भेड़िये के मुंह मे पानी आ गया। और बोला- ठीक है तो मुझे उसके पास ले चलो पर कोई चालाकी नहीं। याद रखना।

और बंदर घर पे पहुँच कर बोला- ख़रगोश कहां हो देखो तुमसे कोई मिलने आया है।।   ये सुनकर ख़रगोश बाहर आ गया।

फिर भेड़िया ख़रगोश को देखकर बोला- तुमनें सही बोला था बंदर इसका दिल तो बहुत लज़ीज़ लग रहा है।                            ख़रगोश बोला- मेरा दिल…..

फिर भेड़िया बोला- हां बंदर  मुझे तूूम्हारे दिल के बारे में बताया था मैं वो खाना चाहता हु ख़रगोश बोला ओ मेरा दिल…….. बंदर तुम्हें नहीं पता मैं अपना दिल अलमारी में रखता हूं।

ये सुनकर भेड़िया बोला- अपना दिल बाहर निकालकर कौन रखता हैं।

ख़रगोश बोला- सच्ची सच्ची मेरा यकीन करो मुझे बस एक मिनट दीजिए मैं अभी लेके आता हूं।।            भेड़िया बोला- ठीक है सिर्फ एक मिनट फिर।।        ख़रगोश ये बोलकर अंदर की खीड़की से भाग जाता हैं और बिल्ली के पास पहुँच के सारी बात बताता हैं।      फिर बिल्ली बोलती हैं- तो अब तो तुम्हें सबक मिल ही गया होगा।
फिर ख़रगोश बोला- मैं समझ गया अगर मौका मिले तो कुछ दोस्त तुम्हारा दिल भी खा जायेंगे।

शिक्षा :- कुछ दोस्त सुआर्थी होते हैं हमे हमेशा अच्छे और बुरे में फ़र्क़ समझाना आना चाहिए।

घमंडी शेरनी

बहुत समय पहले की बात है:-एक जंगल मे अपने बच्चो के साथ एक शेरनी रहती थी 
घमंडी शेरनीउसका पति शेर जंगल का राजा था वो बहोत ही दयालु ओर अच्छे ब्यबहार वाला था एक दिन शेरनी जंगल से गुज़र रही थी तो वहाँ एक बंदरो का झुंड था उनमे से एक बंदर बोला- नमस्ते रानी पर शेरनी ने उसकी बात का कोई जबाब ना दिया।

दूसरा बंदर बोला ये इतनी घमंडी क्यों है?
फिर पहला बंदर बोला- बो समझती है हम बहुते छोटे और कमजोर है फिर एक बंदर बोला इससे हमारी मदद की जरूरत होगी हम मदद नही करेंग।

फिर एक दिन शेरनी सो कर उठी तो उसके पास बच्चे नही थे। शेरनी ने सब जगह ढूंडा उसे बच्चे नही मिले। उसकी चिंता बढ़ने लगी बो बंदरो के पेड़ के पास गई। उसने बंदरो से पूछा- क्या तुमने मेरे बच्चो को देखा है।

इतने में एक बंदर बोला- ओ रानी माँ हमको कैसे पता हो सकता है हम तो बहुत छोटे और कमजोर हैं। इतने सोर से और भी जानवर बहाँ आ गए।

शेरनी ने हाथी से कहा- क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?
हाथी बोला- हाथी ने मना कर दिया।

शेरनी भालू से बोली- क्या तुमने मेरी मदद कर सकते हो?
भालू ये कैसे हो सकता है क्या तुमने अपने बच्चों को मना नही किया मेरे जैसे बदसूरत जानवर के साथ रहने को।

शेरनी रोने लगी, कोई मेरी मदद नही कर रहा है ये सब मेरी ही गलती है मैंने तुम लोगो के साथ बहुत बुरा ब्यबहार किया। मैंने ये कभी नही जाना के एक दोस्त का होना बहुत ज़रूरी है।

अपने घमंड के आगे किसी पे भी ध्यान नही दिया। अब कोई भी मेरी मदद नही करेगा।
शेरनी को रोता देख कर सभी जानवरो को बहुत दुःख हुआ फिर भालू बोला चिंता मत करो रानी तुम्हारे बच्चो को ढूंढने में हम सब तुम्हारी मदद करेंगे।

सब जानवरो ने बच्चों को ढूंढना शुरू कर दिया आखिर कार जीराफ़ ने बच्चो को ढूंढ निकाला।
घमंडी शेरनी
वो हिरन के बच्चो के साथ खेलने में मगन थे आखिर कार

माँ और बच्चों का मिलन हो ही गया फिर शेरनी ने उन जानवरो का अपमान नही किया।

शिक्षा : – हमे कभी घमंड नही करना चाइये घमंड खुद के लिए भी हानिकारक है