दुष्ट सांप और कौआ moral story in hindi

दुष्ट सांप और कौआ

दुष्ट साँप और कौआ बहुत समय पहले-एक महल के पास एक जंगल था उस जंगल मे एक पेड़ पर एक कौए का जोड़ा रहता था।
दुष्ट सांप और कौआ moral story in hindi

और उस पेड़ के नीचे ही एक दुष्ट कोबरा साँप रहता था। ये जानकर भी साँप बहाँ रहता है बे
दोनों कौए खुशी खुशी अपना जीवन जी रहे थे।

बे सुबह को खाने की तलाश में जाते और शाम को बापस आ जाते
दुष्ट सांप और कौआ moral story in hindi
और एक दिन मादा कौए ने अंडे दिए जिससे बे दोनों बहुत खुश थे। रोज की तरह आज भी बे खाने की तलाश में चले गए और जब बे शाम को बापस आए

तो अंडे बहाँ नही थे। जिससे दोनों कौए बहुत दुखी हुए । फिर कुछ दिन सब कुछ ऐसे ही चलता रहा और फिर एक दिन कौए ने फिर अंडे दिए ।

जिससे बे फिर से बहुत खुश हुए और रोज की तरह खाने की तलाश में चले गए।

शाम को जब बे बापस आए तो अंडे फिर से बहाँ नही थे बे दोनों समझ गए कि ये दुष्ट साँप का ही काम है।
दुष्ट सांप और कौआ moral story in hindiअंडे न पाकर मादा कौआ रोने लगता है।

रात को मादा कौआ कहता है- ऐसा कब तक चलेगा, ये दुष्ट साँप हमेशा हमारे अंडे खा जाता है।

नर कौआ बोला- तुम परेशान न हो मैं कुछ उपाय निकालता हूं।
अगले दिन कौआ नजदीक के तालाब के पास पहुचा बहां रानी अपनी दासियो के साथ रोज नहाने आती थी।

बहाँ कौए की नजर रानी के जेवरों पर पड़ी जब कोई नही देख रहा था तब कौए ने रानी का कीमती हार चुरा लिया और अपने घर की तरफ उड़ने लगा।

दासियाँ चिल्लाकर बोली- कौए ने कीमती हार ले लिया।
तभी सभी सैनिक कौए का पीछा करने लगे।

कौए ने उस हार को साँप जिस पेड़ के अंदर रहता था उसमें डाल दिया और उड़ कर अपने घोसले में जाकर बैठ गया।
दुष्ट सांप और कौआ moral story in hindi

फिर जैसे ही सैनिक ने हार निकालने के लिए अपना हाथ बहाँ डाला, हार की जगह उसके हाथ मे अजगर सांप आ गया।
सांप को देखते ही सिपाहियों ने अपने भाले से उसे मार डाला।

सिपाहियों ने अंदर दे हार निकाल लिया और कौए को बिना कुछ किये ही लौट गए।
दोनों कौए उसके बाद खुशी खुशी रहने लगे।

शिक्षा- कमजोर भी बुद्धिमानी से बड़ी से बड़ी परेशानी दूर कर सकते हैं

सबसे बड़ा ज्ञान

सबसे बड़ा ज्ञान

एक बार की बात है-

एक गांव में एक मूर्तिकार रहा करता था। वो काफी खूबसूरत मूर्ति बनाया करता था और इस काम से वो अच्छा कमा लेता था।

उसे एक बेटा हुुआ।

सबसे बड़ा ज्ञान

इस बच्चे ने बचपन से ही मूर्ति बनानी शुरू कर दी और बेटा भी बहुत अच्छी मूर्ति बनाने लगा।

और बाप भी अपने बेटे की मूर्ति देख कर बहुत खुश होता। लेकिन हर बार बेटे की मूर्तियो में कोई न कोई कमी निकाल दिया करता था।

वो कहता था बहुत अच्छा किया है पर अगली बार इस कमी को दूर करने की कोसिस करना।
बेटा भी कोई शिकायत नही करता था। वो अपने बाप की सलाह पर अमल करते हुए अपनी मूर्तियों को और बेहतर करता रहा।

सबसे बड़ा ज्ञान

इस लगातार सुधार की बजह से बेटे की मूर्तियां बाप से अच्छी बनने लगीं। और ऐसा भी समय आ गया लोग बेटे की मूर्तियों को बहुत पैसे देकर खरीद ने लगे।
जबकि बाप की मूर्तियां उसके पहले वाले दाम में ही बिकती रहीं।

लेकिन बाप अभी भी बेटे की मूर्तियो में कमियां निकाल ही देता था। लेकिन बेटे को अब ये अच्छा नही लगता था।

वो बिना मन के अपनी कमियों को मान लेता था।
और सुधार कर देता था।
फिर एक दिन ऐसा भी आया जब बेटे के सब्र ने जवाब दे ही दिया।

बाप जब कमिया निकाल रहा था तब बेटा बोला-
आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे आप बहुत बड़े मूर्तिकार हैं।
अगर आपको इतनी ही समझ होती तो आपकी बनाई हुई मूर्तिया मेरे से महंगी बिकती।

मुझे नहीं लगता की आप की सलाह की मुझे कोई जरूरत है। मेरी मूर्तिया Perfect हैं।
बाप ने बेटे की ये बात सुनी और उसे सलाह देना और उसकी मूर्तियों में कमियां निकालाना बन्द कर दिया।
कुछ महीने तो लड़का खुश रहा फिर उसने ध्यान दिया कि लोग अब उसकी मूर्तियों की उतनी तारीफ नहीं करते जितनी पहले किया करते थे।

और इसकी मूर्तियों के दाम भी गिरने लगे।
शुरू में तो बेटे को कुछ भी समझ नही आया।
लेकिन फिर वो अपने बाप के पास गया। और उसे समस्या के बारे में बताया।

सबसे बड़ा ज्ञान

बाप ने उसे बहुत शान्ति से सुना जैसे उसे पता था कि एक दिन ऐसा भी आएगा।
बेटे ने भी इस बात को notice किया और बोला-
क्या आप जानते थे कि ऐसा होने वाला है?
बाप बोला- हाँ।!
क्योकि अब से कई साल पहले मैं भी ऐसे हालात से टकराया था।
बेटे ने सवाल किया- फिर आपने मुझे समझाया क्यों नही?
बाप ने जवाब दिया- क्योकि तुम समझना नहीं चाहते थे।
मै जानता हूं कि मैं तुम्हारे जितनी अच्छी मूर्ति नही बनाता, ये भी हो सकता है कि मूर्तियों के बारे में मेरी सलाह गलत हो और ऐसा भी नही है कि मेरी सलाह की बजह से तुम्हारी मूर्ति अच्छी बनी हो।

लेकिन जब मैं तुम्हारी मूर्तियों में कमियां दिखाया करता था तब तुम अपनी बनाई हुई मूर्तियों से संतुष्ट(satisfy) नही होते थे। तुम खुद को और भी ज्यादा बेहतर करने की कोशिश करते थे और बही बेहतर होने की कोशिश तुम्हारी कामयाबी का कारण था।

लेकिन जिस दिन तुम अपने काम से Satisfy हो गए
और तुम ने ये भी मान लिया कि इस काम मे और बेहतर होने की गुंजाइश नही है, तब तुम्हारी Growth(विकाश) भी रुक गयी।

लोग हमेशा तुम से बेहतर की उम्मीद करते हैं और यही कारण हैं की तुम्हारी मूर्तियों की तारीफ नही होती और न ही तुम्हे उनके लिए ज्यादा पैसे मिलते हैं।
बेटा कुछ देर चुप रहा फिर उसने सवाल किया तो अब मुझे क्या करना चाहिए।
बाप ने एक लाइन में जवाब दिया- असंतुष्ट (Un satisfy) होना सीख लो।

सबसे बड़ा ज्ञानऔर मान लो कि तुममे और बेहतर होने की गुंजाइस बाकी है यही एक बार तुम्हे आगे बेहतर होने के लिए प्रेरित ( Inspire) करती रहेगी और तुम्हे हमेशा बेहतर बनाती रहेगी।

शिक्षा- stay hungry stay foolish

Inspire) करती रहेगी और तुम्हे हमेशा बेहतर बनाती रहेगी।

शिक्षा- stay hungry stay foolish

ना उड़ने वाला तोता

ना उड़ने वाला तोता

कुछ समय पहले की बात है_

एक राजा था।
बह अपने आस पास के राज्य में यात्रा करने गया था।

तब एक राज्य के अधिकारी ने राजा को दो तोतो की जोड़ी उपहार में दी।

ना उड़ने वाला तोता

राजा को वो दोनों तोते बहुत पसंद आये।

राजा उन तोतो को महल में लेकर आ गया ।
और राजा ने एक बगीचे में तोतो के रहने की ब्यबस्था करवा दी।
तोते राजा को बहुत प्रिय थे राजा रोज़ उन्हें अपने महल की खिड़की से देखता था।
एक दिन राजा ने तोतो पे गौर किया और देखा एक तोता अपनी जगह से उड़ता हैं फिर बापस बैठ जाता हैं।

पर दूसरा तोता अपनी जगह से हिलता ही नहीं एक ही शाखा पे बैठा रहता हैं।
ना उड़ने वाला तोता
फिर राजा अपने महल के लोगी को ये बात बताता है और दरबारियों से तोते को उड़ाने का तरीका खोजने के लिए कहता है।

महल के सभी लोग तोते को उड़ाने की कोसिस करते हैं लेकिन सभी लोग असफ़ल हो जाते हैं तोता अपनी शाखा से बिल्कुल भी नहीं हटता।
ये देखकर राजा परेशान हो जाता हैं। सब कुछ आजमाने के बाद राजा राज्य में घोषणा करता के जो कोई इस तोते को उड़ना सिखाएगा उससे ईनाम मिलेगा।

ये बात सुनकर एक किसान महल में आता हैं और कहता महराज मुझे आज्ञा दीजिये सायद मैं इस समस्या का समाधान कर सकू।

राजा कहता हैं अबस्य अगले दिन राजा महल की खिड़की से देखता है
के तोता आसमान में ऊंची उड़ान भर रहा है राजा तीते को उड़ते देख सोच में पड़ जाता है।

राजा किसान को मिलने के लिए महल में बुलाता हैं किसान राजा के सामने आकर खड़ा हो जाता है।

राजा कहता है- इतने लोगो के प्रयास के बाद भी तोता अपनी जगह से हिला भी नहीं था लेकिन तुमने ऐसा क्या जादू कर दिया तोता आसमान में ऊंची उड़ान भरने लगा।

किसान ने हाथ जोड़कर राजा से कहा महाराज मैंने कोई जादू नहीं किया ये तो बहुत आसान था।
जिस शाखा पे तोता बैठता था बस मैंने वो शाखा काट दी।

और तोता नीचे गिरने के डर से पंख फड़ फडाने लगा और आसमान में उड़ने लगा राजा ने उस किसान को ईनाम दिया और वह चला गया।

शिक्षा : – हम सभी को अपने जीवन में सफल होने की क्षमता मिली हैं लेकिन फिर भी लोग अपने जीवन मे असफल रहते हैं क्योंकि वो अपना आरामदायक जीवन नहीं छोड़ना चाहते, जिसे हम comfortzone बोलते हैं इसलिए अगर जीवन में सफलता पाना हैं तो हमें अपना comfortzone छोड़ना पड़ेगा।

वफादार कौन?

बफादार कौन

विजयपुर नाम का एक छोटा सा गांव था।
रात का समय था सभी लोग अपने अपने घरों में सो रहे थें तभी एक कुत्ते की भौकने की आवाज़ से गांव वालों की अचानक से आंख  खुल जाती हैं।

वफादार कौन?

 

कुत्ता दिन में भी भौकता ही रहता हैं तो लोग दिन भर की थकान से लोग उस कुत्ते को नज़र अंदाज़ कर के सो जाते हैं।

तभी अगले दिन एक ब्यक्ति दूसरे ब्यक्ति से बोलता है- क्या बात हैं आज बहुत देर हो गयी तुम्हे?

दूसरा ब्यक्ति बोला- हां नींद पूरी नहीं हुई एक पागल कुत्ते ने नींद हराम कर दी वो कुत्ता दूसरे दिन फिर गांव के सभी लोगो को भौकता हैं।
बच्चों के पीछे पीछे भागता हैं बच्चें तो उससे डर गए किसी को कुछ को समझ नहीं आ रहा था।

तभी रामु काका बोले- ये तो हमारे गांव का ही कुत्ता हैं ये तो हमेशा सांत रहता हैं आज इतना भौक क्यू रहा हैं?

फिर लोग उसे खाने को देते हैं हैं लोगो को लगता हैं सायद उसे भूख लगी हो।
कुत्ता फिर भी वो भौकता ही रहता हैं कुछ खाता ही नहीं।

फिर लोग अपने काम पर लग जाते हैं फिर उसके बाद वो कुत्ता लोगो की चीज़ें लेकर भागने लगता हैं और अगर उसे कोई भगाना चाहें तो वो काटने लगता हैं ।

एक औरत बाहर कपड़े सुखा रही होती हैं कुत्ता उसे भी भौकने लगता हैं फिर वो औरत डर के मारे चिल्लाती हैं तो कुत्ता उससे काटने के लिए दौड़ता हैं।

फिर कुत्ता उसकी सुखाई हुई चादर लेकर भाग जाता हैं। गांव वालों को समझ ही नहीं आ रहा था कि ये कुत्ता ऐसा क्यू कर रहा है।

कही ये पागल तो नहीं ही गया हैं फिर एक बच्चा आंगन में खेल रहा होता हैं
तभी कुत्ता उसकी दूध की बोतल लेके भाग जाता है।

बच्चा रोने लगता हैं ये देख उसकी माँ घबराती हुई गांव के सरपंच के पास जाकर उनको सारी बात बताती हैं।

गांव के सभी लोग बोलते है ये कुत्ता पागल हो गया हैं काटने को दौड़ता हैं चीज़े लेकर भाग रहा हैं।

सभी लोग सरपंच से बोलते हैं इस कुत्ते से गांव के लोग औऱ बच्चो को खतरा हैं
एक शख्स बोला- उसे सभी लोग मिलकर मार देते हैं। सरपंच बोले- अगर गांव के लोगो को इस कुत्ते से खतरा हैं तो इस कुत्ते को गांव के बाहर भगा दिया जाए।

और सरपंच जी संदेश देते हैं किसी को भी वह कुत्ता दिखाई दे तब उसे तुरंत भगा दिया जाए
सभी लोग कहते हैं ठीक है सरपंच जी तभी वह कुत्ता बहाँ पे आके ज़ोर ज़ोर से भौकने लगता है
गांव के कुछ लोग कुत्ते के पीछे लाठी लेकर भागते हैं

रामू काका बोले- इससे मार देना ही बेहतर हैं नहीं तो ये फिर से बापस आ जायेगा लोग उसका पीछा करते करते खेतो में जा पहुँचते हैं
और कुत्ते को बहुत मारते हैं फिर भी कुत्ता भागने की कोसिस करता है
कुत्ता भागते भागते एक कूड़े के ढ़ेर के पास में जा कर रुक जाता हैं

लोग उसके पीछे उसे मारने के लिए जाते है
तभी उन्हें एक बच्चे की रोने की आवाज़ आती हैं लोग इधर उधर देखते हैं
तभी उन्हें दिखता हैं कि

कूड़े के ढ़ेर के पास एक छोटा सा बच्चा हैं कुत्ता उसे बोतल से दूध पिलाने की कोसिस कर रहा हैं लोग उस बच्चे को उठा लेते हैं।
और वो बेचारा कुत्ता कूड़े के ढेर के पास बैठ जाता हैं लोगो को कुछ समझ नहीं आता के ये बच्चा यहां कौन छोड़ के गया।

लोग परेशान हो जाते हैं उन्हें कुछ समझ नहीं आता हैं फिर वो बच्चे को लेकर सरपंच जी के पास जाते है
फिर सरपंच जी को सारी बात समझ में आती हैं

तभी सरपंच जी कहते हैं-आप लोगो ने बच्चे को तो उठा लिया लेकिन जिसको इसने बचाया हैं उस कुत्ते पे कोई ध्यान नहीं दे रहा हैं ।
सरपंच जी बोले उस कुत्ते को सभी लोग पागल समझ कर मार रहे थे कुत्ते ने ये सारी चीज़ें-

ये बोतल ये चादर उस बच्चे को बचाने के लिए ले जा रहा था उसे हम लोगो की वजह से कितनी चोट आई हैं लेकिन फिर भी वो बच्चे को बचाने की कोसिस करता रहा हमें उसका सुक्रिया अदा करना चाहिए।

किसी भी बात की परवाह किये उसने इस बच्चे की जान बचाई हैं और बो सभी लोगो को यही बात बताने की कोसिस कर रहा था।
लेकिन किसी ने उस पर ध्यान ही नहीं दिया।
जानवर होकर भी उसने वफादारी और इंसानियत दिखाई और कोई इंसान होकर इस बच्चे को छोड़कर चला गया।
सच में कितने वफादार होते हैं जानवर हमें इनसे वफादारी सीखनी चाहिए

शिक्षा : – हम इंसान होकर इंसानियत भूल सकते हैं लेकिन जानवर हमेशा अपनी वफादारी निभाते हैं तो इसलिए जानवरों से हमेशा प्यार करना चाहिए।

शहरी चूहा और देहाती चूहा।

 

 

 

  शहरी चूहा और देहाती चूहा

बहुत समय की बात है।

दो चूहें थे एक भाई शहर में ओर दूसरा भाई गांव में रहता था। एक दिन शहर वाले चूहे ने गांव वाले भाई के पास जाने का सोचा और वो वहां पहुचा गया। और अपने भाई से बोला _ ओ भाई कैसे हो तुम गांव बाला बोला _ अंदर आ जाओ सच मे मैं तो आपको देख के चौंक गया।

और बताओ शहर में कैसी चल रही हैं ज़िन्दगी ? शहर वाला बोला _ अच्छी बहुत अच्छी चल रहीं हैं। क्या यहां की सड़क ख़राब हो गई हैं यहां की सड़क बहुत छोटी हैं।

गांव वाला चूहा बोला _ ये गांव हैं यहां की सड़क छोटी ही होती हैं। फिर शहर वाला चूहा _ बोला हमारे यहां की कार यहां तो चल भी नहीं पाएगी और वो सड़क पे पड़े पत्थर देखो मेरे पैर में तो छाले पड़ गए हैं।

गांव वाला चूहा बोला _ ओह पहले अंदर तो आओ और पैर धो लो और डिनर कर लो मैं डिनर शुरू ही करने वाला था। तब तक आप आ गए फिर शहर वाला बोला _ क्या तुम मुझे बाथरूम दिखा सकते हो ? ओह रहने दो मुझे दिख गया और वैसे भी ये छोटा सा घर हैं। फिर दोनों साथ डिनर करने के लिए बैठे।

गांव वाला बोला – मुझे बहुत ख़ुसी हुई तुम मेरे घर पे आये उम्मीद हैं। तुम्हें डिनर पसंद आये गांव का सिंपल खाना फिर वह बोला तुम खाना क्यो नहीं खा रहे हो। फिर शहर वाला बोला दरअस्ल मैं सोच रहा था। तुम हर रोज़ दाल और चावल ही खाते हो गांव वाला बोला – यहां तो यही मिलता हैं।

शहर वाला बोला _ वो इसलिए क्योंकि तुम यहां रहना चाहते हो तुम मेरे साथ शहर क्यो नहीं चलते फिर गांव वाला बोला  _ नहीं भाई ये मेरे बस की बात नहीं शहर _वाला क्यू क्या तुम अपनी पूरी ज़िंदगी ये दाल और चावल खाकर ही बिताना चाहते हो ये तो ग़लत बात हैं।

शहर वाला बोला _ तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हें असली ज़िन्दगी दिखाऊंगा गांव वाला बोला _ ठीक है। अगर तुम इतना कह रहे हो तो चलो फिर वो दोनों शहर पहुचा गए।

फिर गांव वाला चूहा बड़ा सा घर देखकर बोला क्या ये तुम्हारा घर हैं। फिर शहर वाला चूहा बोला_ नहीं ये मेरा घर नहीं हैं। ये तो किसी अमीर आदमी का हैं। मैं तो यहां रहता हूं फिर दोंनो अंदर गए अंदर पहुँच कर शहर वाला बोला _ ये हैं मेरा डिनर क्या तुम्हें पसंद आया ?

गांव वाला चूहे ने तरह तरह का ढेर सारा खाना देख के बोला _ क्या तुम इसी तरह रहते हो शहरी चूहा हां बिल्कुल एक राजा की तरह जल्दी करो जो चाहो वो खाओ इससे पहले के अमीर आदमी का परिवार आ जाये।

वो दोनों जल्दी जल्दी खाना खा रहे थें। के एक कुत्ता वहां आ गया। और कुत्ता उन दोनों को देख के भौकने लगा। गांव वाला चूहा बहुत डर गया और बोला_ ये कौन हैं तो शहर वाला चूहा बोला _ ये टॉमी हैं इस घर का कुत्ता और ये बोलकर दोनों वहां से भाग गये।

फिर शहर वाला चूहा बोला तो बताओ कैसा लगा मेरे साथ रहना। हम ऐसा खाना हर रोज़ खा सकते हैं। गांव वाला बोला _  नहीं भाई इतने सारे पकवान एक दिन के लिए तो सही हैं। अगर मैं रोज़ खाऊंगा तो मेरा पेट खराब हो जाएगा।

मेरे भाई मैं अपने गांव का खाना अपने छोटे से घर मे खाना ज्यादा पसन्द करूंगा ना के मौत के मुँह में। मुझे माफ़ कर दो भाई मुझे सीधी साधी ज़िन्दगी पसन्द हैं। फिर मिलेंगें मेरे भाई इतना बोल कर चूहा अपने गांव बापस आ गया। सुकूूू

शिक्षा :- तरह तरह लोग अलग अलग की ज़िन्दगी के लिए ही बने होते हैं। कुछ लोग सुकूूून ज़िन्दगी पसन्द करते हैं। तो कुछ लोग मस्ती भरी ज़िन्दगी पसन्द करते हैं। लेकिन ज़रूरी बात ये हैं के हर किसी को दूसरे की ज़िन्दगी जीने का तरीक़ा स्वीकार करना चाहिए।

बंदर और मगरमच्छ

बंदर और मगरमच्छ

एक घने जंगल के बीच एक विशाल नदी बहती थीं।
इस नदी में एक बूढ़ा मगरमच्छ रहता था।
वह बूढ़ा होने की वज़ह से शिकार नहीं कर पाता था।बंदर और मगरमच्छ

एक दिन उससे ज़ोर की भूख लगी
उसने सोचा नदी के बाहर जाकर तो शिकार करना मुश्किल हैं नदी में ही शिकार कर के पेट भर लेता हूं।

जैसे ही वो मछली पकड़ ने लगा मछली उसके हाथ से निकल गई। तो वो भूखा थक हारा जामुन के पेड़ के नीचे आराम करने लगा उस पेड़ पर एक बंदर जामुन खा रहा था
बंदर और मगरमच्छ
मगरमच्छ ने बंदर से पूछा बंदर भाई तुम क्या खा रहे हो
थोड़ा मुझे भी दे दो बहुत भुख लगी हैं भाई
बंदर बोला ये जामुन हैं बहुत मीठा फल हैं ये लो तुम भी खाओ

मगरमच्छ बोला- अरे वाह ये तो सच मुच बहुत मीठे हैं
सुक्रिया मुझे बहुत भूख लगी थीं तुमनें मेरी मदद की तुम बहुत अच्छे हो मुझे बहुत ख़ुसी होगी अगर तुम जैसा भी मेरा कोई दोस्त हो।

बंदर बोला- हां क्यो नहीं आज से तुम मेरे दोस्त हो मैं इसी पेड़ पे रहता हूं अगर तुम्हें जब कभी भूख लगे तुम मुझसे कहना मैं तुम्हें जामुन तोड़ के दे दिया करूँगा।

तो इस तरह मगरमच्छ उस पेड़ के पास आता और बंदर उससे जामुन खिलाता।
दोनों बहुत मस्ती करते वह दोनों दोस्त बन चुके थे कभी
मगरमच्छ पेड़ के पास आकर खेलता तो कभी बंदर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ कर नदी की सैर करता।

और एक दिन मगरमच्छ बोला- बंदर भाई मैं ये जामुन अपनी पत्नी को भी खिलाना चाहता हूं। तुम मुझे थोड़े जामुन तोड़ कर दे दो मैं अपने साथ ले जाऊंगा।

बंदर ने मगरमच्छ को जामुन तोड़ के दे दिए
मगरमच्छ जामुन लेके नदी के दूसरे किनारे पहुँचा जहाँ उसकी पत्नी रहती थीं।

मगरमच्छ- ये देखो मैं तुम्हारे लिये क्या लाया हूं जामुन! ये मेरे दोस्त बंदर ने तुम्हारे लिये भेजें हैं। उसकी पत्नी ने जामुन खाये।
वह बोली- अरे बाह ये जामुन तो बहुत मीठे हैं लेकिन कब तक ये जामुन खा के गुज़ारा करेंगे। ये जामुन तो बहुत मीठे हैं और तुम्हारा दोस्त बंदर तो रोज़ जामुन खाता हैं तो वो कितना मीठा होगा।

मगरमच्छ बोला- वो बहुत अच्छा है खुद भी जामुन खाता हैं और मुझे भी खिलाता हैं।

उसकी पत्नी बोली- मैं सोच रहीं थीं उसका दिल कितना मीठा होगा और वैसे भी बहुत दिनों से मास भी नहीं चखा हैं।
तुम मुझे उसका दिल ला के दे दो ना।
पत्नी की बात सुनकर मगरमच्छ सोच में पड़ गया और अपनी पत्नी से बोला- मैं ऐसा कैसे कर सकता हु बंदर मेरा दोस्त हैं।

और मैं उसके साथ धोखा कैसे कर सकता हु अगर मैं उसका दिल ले आया तो वो मर जायेगा जब मुझे भूख लगी थीं तो उसने मुझे खाना खिलाया था और अब मैं तुम्हारे लिए उसकी जान ले लूँ।

उसकी पत्नी बोली- मुझे कुछ नहीं पता तुम मुझे
उसका दिल ला के दो वरना मैं अपनी जान ले लूंगी।

मगरमच्छ अपनी पत्नी की शर्त पे मजबूर हो गया और दुःखी मन से बंदर के पास पहुचा ताकि वो अपने साथ घर चलने के लिए बंदर को मना सके।

और बोला- बंदर भाई तुम्हारे दिए जामुन से
खुश होकर तुम्हें मेरी पत्नी ने खाने पे बुलाया हैं चलो आज तुम हमारे साथ मिलकर भोजन करना।

बंदर बोला- अरे वाह! तो चलो बंदर ने मगरमच्छ के साथ जाने को हा कर दी और दोनों चल दिये।

दोनों दोस्त रास्ते में मज़े से जा रहे थें तो बंदर ने मगरमच्छ से पूछा वेसे दोस्त तुम्हारी पत्नी खाने में क्या बनाने वाली हैं??

मगरमच्छ बोला- तुम्हें केले बहुत पसंद हैं ना तो वो केले की सब्ज़ी बनायेगी ख़ास तुम्हारे लिए।
बंदर बोला- अरे वाह! आज तो बढ़िया दावत होगी मेरे मुंह में तो अभी से पानी गया।

बंदर की बातें सुनकर मगरमच्छ को लगा अपनी पत्नी की बातें बता देनी चाहिए बेचारा बंदर क्या क्या सपने देख रहा है।

इससे तो पता भी नहीं हैं के मेरी पत्नी इसे ही पका कर खाने वाली हैं। क्या करूं?
मैं बंदर को सारी बात बता देता हूं।

वह बोला- बंदर भाई मैं तुम्हें एक बात बता देना चाहता हु, मेरी पत्नी तुमहारे दिल को खाना चाहती हैं।
अगर उसने तुम्हारा दिल नहीं खाया तो वो मर जायेगी

बंदर ने मगरमच्छ की बात सुनी और एक तरक़ीब सोची
बंदर बोला- पर दोस्त तुमनें ये बात चलने से पहले क्यों नहीं बताई हम बंदर अपना दिल पेड़ पर ही सभाल कर रखते हैं। अब हमें फिर से पेड़ के पास जाना होगा।

मगरमच्छ बोला- ओह! मैं भी कितना पागल हु अच्छा ठीक है चलते हैं चलो और चल के तुम्हारा दिल ले आते हैं।
अगर खाली हाथ गए तो वो मेरा दिल निकाल कर खा जायेगी। मगरमच्छ बंदर को बापस पेड़ तक ले आया।

बंदर जैसे ही उस पेड़ के पास पहुँचा और तुरंत पेड़ पर
चढ़ गया।

और मगरमच्छ से बोला- अरे बेवकूफ़ मैंने तुम्हें अपना दोस्त समझा, मैंने तुम्हारी मदद की तुम्हें खाना खिलाया और तुमनें मेरी दोस्ती का ये सिला दिया अब ना तुम्हें जामुन मिलेंगे और ना ही दिल चल भाग यहाँ से।

शिक्षा : – हमें मुस्किल वक़्त में घबराना नहीं चाहिए बल्कि बंदर की तरह समझदारी से काम लेना चाहिए और कभी किसी मज़बूरी में भी किसी को दोस्त बनाया हो उसके साथ धोखा नहीं करना चाहिए।

 

बगुला और केकड़ा

बगुला और केकड़ा

एक समय की बात हैं- एक तालाब के पास एक बगुला रहता था वो उस तालाब से मछलियां पकड़ के अपना पेट भरता।
हर एक मछली उससे नफरत करती थीं लेकिन उसे मछलियां बहुत पसन्द थीं।

बगुला और केकड़ा

बगुला कभी भी भूखा नहीं रहता वह शिकार करता और मज़े से खाता दिन बीतते गए अब बगुला कमज़ोर और बूढ़ा होने लगा।
वो अब पहले जैसा नहीं था उसकी उड़ान भी धीमी हो गई थी।

जैसे ही वो मछलियां पकड़ने की कोसिस करता मछलियां फिसल जाती थीं बगुला शुस्त हो गया था।

एक मछली बगुले के पास तैर रही थीं फिर उसकी माँ बोली- बहाँ मत जाओ बगुला तुम्हें खा लेगा।
मछली- माँ घबराओं मत वो मुझे पकड़ने की कोसिस बहुत दिनों से कर रहा हैं।

मैं तो उसका मज़ाक भी उड़ाती हु देखो वो हिल भी नहीं पा रहा जैसे ही वो पकड़ने की कोसिस करता हैं मैं छलाँग लगा देती हूँ।

मछली को देखकर बगुला जैसे ही आगे बड़ा वो मुँह के बल गिर गया और मछली तैर के निकल गयी।

मछली आपस में बात करने लगीं- देखा हमें उस बगुले से डरने की जरूरत नहीं है।

वक़्त के साथ साथ वो इतना कमज़ोर हो गया था अब वह शिकार भी नहीं कर पा रहा था।

मछलियां उसके आस पास ही मंडरा रहीं थीं फिर भी वो
पकड़ नहीं पा रहा रहा था।
बगुला- ओ इस बुढ़ापे ने तो मुझे भूखा मार दिया अब मैं क्या खाऊँगा दो दिन से भूखा हु।

एक दिन उसे बहुत भूख लगी उसने कई दिनों से कुछ भी नहीं खाया था अपनी भूख को मिटाने के लिए उसने एक योज़ना बनाई।
वह बोला- मुझे पता है मुझे क्या करना है अपनी योज़ना की शुरुआत करने के लिए वो तालाब के किनारे अपना उदास चेरा लेके आ गया मानो शिकार की कोई मर्ज़ी ही न थी।

मछलियां मेंढक और केकड़े को समझ नहीं आ रहा था के वो शिकार क्यों नहीं कर रहा है। एक बडे से केकड़े ने उदास बगुले से पूछा- क्या हाल भाई क्या बात हैं तुम इतने उदास क्यू हो?

बगुला बोला- क्या बताऊँ इस तालाब के लिए एक बुरी ख़बर है।

केकड़ा- बुरी ख़बर बो भला क्या है?

बगुला बोला- मेरी हिम्मत नहीं हो रहीं हैं तम्हें बताने की।

केकड़ा बोला- अब बताओ भी अगर तालाब की बात हैं तो हमे बताना जरूरी हैं क्योंकि हम सब यही रहते हैं।

बगुला बोला- दरअशल इस तालाब की मछलियां नहीं बचने बालीं।

केकड़ा- क्यू ऐसा क्या होने वाला हैं?

बगुला- मैंने सुना हैं कुछ लोग इस तालाब को मिट्टी से भर देंगे और यहां फसल उगायेगें।

केकड़ा बोला- ये तो बुरी ख़बर हैं मैं सबको बताता हूं।

तालाब के सभी प्राड़ी और मछलियां बगुले की बात सुनकर परेशान हो गए।

मछलियां बोली- पानी के बिना तुम सब तो रह सकते हो लेक़िन हम नहीं बगुला ये सुन कर खुश हो गया और बोला घबराओं मत। मेरे पास एक रास्ता है।
मछलियां- सच मे?

बगुला कहने लगा- मुझे एक तालाब के बारे में पता है जहाँ सभी सुरक्षित रह सकते हैं अगर तुम सबको ये बात मंज़ूर हैं तो।
मैं हर रोज़ एक एक कर के सभी को ले जाऊंगा सभी कहने लगे बगुला भाई हमें बचाओ…
सभी प्राणी बगुले की मदद लेना चाहते थे।
बगुला बोला- मेरी कुछ शर्तें हैं।
सभी बोले क्या शर्त है?
मेरे बुढ़ापे की वजह से मुझे हर यात्रा के दौरान मुझे आराम करना पड़ेगा और एक बार में मैं सिर्फ मछलियों को ही ले जा पाऊँगा।
सभी प्राणी बगुले की शर्त मान कर उसके साथ जाने को तैयार हो गए।

पहली ही यात्रा में बगुले ने कुछ मछलियों को अपनी चोंच में लिया और वो चल पड़ा।
बगुला और केकड़ा

पर वो तालाब पर नहीं गया, बल्कि वो एक पहाड़ पे गया और मछलियों को खा गया। कुछ देर आराम करने के बाद उसे फिर से भूख लगी तो वो फिर से यात्रा पे चल पड़ा।
ऐसा लगातार करने से उसे मछलियां खाने को मिलती वो भी बिना किसी मेहनत के कुछ दिन बाद बगुले की सेहत बिल्कुल ठीक हो गयी और वो पहले जैसा तंदुरुस्त हो गया।

बड़े केकड़े को भी खुद को बचाना था वह बगुले से बोला- मुझे भी उस तालाब के पास ले चलो बगुले ने सोचा थोड़ा हट कर चखने का मज़ा ही कुछ और है।
वह बोला- ठीक है मैं तुम्हें अगली बार अपने साथ ले जाऊंगा।
जब बगुला केकड़े को लेकर उड़ा उसके कुछ देर बाद केकड़ा बोला ये तालाब और कितनी दूर है। ..

बगुले को लगा केकड़ा बहुत ही कमजोर प्राणी हैं।
बह उसका कुछ नही कर पाएगा।
बगुला बोला- मूर्ख! मैं क्या तुम्हारा नौकर हूँ, यहां कोई भी तालाब नहीं हैं।

मैंने ये सारी योज़ना तुम सब को खाने के लिए बनाई थी। अब तुम भी अपनी जान खोने के लिए तैयार हो जाओ।

केकड़े को बगुले की चाल का पता चल गया।
केकड़ा बोला- मैं इतनी आसानी से नहीं मरूँगा सुआर्थी बगुले!
बिना वक़्त गबाये केकड़े ने अपने तेज़ पंजो से बगुले की गर्दन को दबोच लिया।
बगुला- छोड़ो दर्द हो रहा हैं।

पर केकड़े ने बगुले की गर्दन मरोड़ दी जिससे बगुला बहिं मर गया।

केकड़ा बड़ी मुश्किल से तालाब के पास पहुँचा
बगुला और केकड़ाऔर सारा किस्सा तालाब के प्राणियो को सुनाया।
सभी ने उसके बहादुरी की तारीफ़ की।
एक मछली बोली- केकड़े भाई तुम तो बहुत बहादुर हो।

केकड़ा- बगुले ने अपनी जान अपने लालच की वज़ह से गवाई ना के मेरे बहादुरी की वज़ह से।।

शिक्षा : – हमें ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए।

जैसे को तैसा

जैसे को तैसा

जैसे को तैसा

एक जंगल मे एक ऊठ रहता था वो काफी सीधा साधा था।
एक दिन वो जंगल मे अकेला घास कहा रहा था तभी सियार बहा आता है और ऊठ से बोलता है- ऊठ भाई क्या कर रहे हो।
ऊठ– कुछ नही भाई घास कहा रहा हूँ।

सियार – क्या तुम अकेले रहते हो?
ऊठ– हां भाई मैं अकेला ही रहता हूं और अकेला ही भोजन करता हूँ।

सियार – मित्र मैं भी अकेला हु और मुझे भी एक मित्र की जरुरत है।
जैसे को तैसा
ऊठ खुशी से- सच में !
सियार– हां मित्र क्या तुम मेरे मित्र बनोगे?

ऊठ हाँ बोल देता है और वो मित्र बन जाते हैं।
और अब से बे हमेशा साथ रहने लगे और जहां जाते साथ जाते और इस तरह सियार और ऊठ काफी गहरे मित्र बन जाते हैं।

ऊठ सियार की हर बात मानता था।
और फिर एक दिन सियार ने ऊठ से बोला मित्र यहां भोजन काफी कम मिलता है क्यों न नदी के उस पर जाया जाए।
जैसे को तैसाबहां बहुत से मक्का के खेत हैं आराम से पेट भरकर खाएंगे।

ऊठ मान जाता है और बे दोनों चल देते हैं ।
चलते चलते बे नदी के पास पहुच जाते हैं फिर सियार बोलता है- मित्र मैं नदी पार नही कर पाउँगा मैं बहुत छोटा हूँ। ऐसा करो तुम मुझे अपनी पीठ पे बैठा लो इस तरह हम दोनों आसानी से पार हो जाएंगे।

ऊठ ऐसा ही करता है और बे दोनों नदी पार कर लेते हैं।
और थोड़ी देर चलने के बाद बे मक्का के खेत के पास पहुच जाते हैं।

मक्का का खेत देख कर ऊठ खुश हो जाता है और बोलता है- मित्र कितना हर भरा और सुंदर खेत है मक्का खाने में मज़ा आ जाएगा, आज तो पेट भरकर खाऊंगा।
और दोनों उस खेत पर टूट पड़ते हैं।

थोड़ी देर खाने के बाद ही सियार का पेट छोटे होने के कारण जल्दी भर गया और वो ऊठ से बोला- मित्र अब चलते हैं यहां के किसानों के आने का समय हो गया है और बे आते ही होंगे। यहां से चलो बरना वो हमें पकड़ लेंगे।

चूँकि ऊठ का पेट अभी भरा नहीं था तो वो मना कर देता है। पर सियार के फिर से समझाने के बाद वो मान जाता है और बे उसी तरकीब से नदी पार करके घर बापस आ जाते हैं।
और फिर अगले दिन दोनों फिर से मक्के के खेत की ओर निकल पड़ते हैं और पुरानी तरकीब से नदी पार करके मक्के के खेत के पास पहुच जाते हैं।

फिर ऊठ बोलता है- मित्र इस बार जब तक मेरा पेट नहीं भर जाएगा हम तब तक घर बापस नहीं जाएंगे।
सियार – ठीक है मित्र तुम आराम से खाओ।

दोनों खाने पर टूट पड़ते हैं चूंकि सियार का पेट छोटा था तो जल्दी भर गया और वो ऊठ से बोला मित्र आज बहुत दिन हो गए मैंने Howl Howl Howl नही चिल्लाया।
मेरा बहुत मन कर रहा है चिल्लाने का।

ऊठ समझाते हुए कहता है- भाई अभी मत चिल्लाओ बरना खेत वाले आ जाएंगे और हम मुसीबत में पड़ जाएंगे।

पर सियार ऊठ की एक नहीं सुनता और जोर जोर से howl howl चिल्लाने लगता है।
जैसे को तैसा
उसकी आवाज़ सुन कर किसान वहां आ जाते हैं किसानों को देख सियार छोटा होने का फायदा उठाता है और खेत मे दुबक जाता है पर ऊठ उन्हें आसानी से दिख जाता है।
किसान ऊठ को बहुत बेरहमी से लाठी डंडो से पीटते है।

बे ऊठ को मार मार कर बुरा हाल कर देते हैं।
किसानों के जाने के बाद सियार बाहर आता है और बोलता है मित्र चलो चलते हैं।

सियार के इस बर्ताव से ऊठ बहुत दुखी था पर वो कुछ नही बोला और बे दोनों घर की ओर चल दिये।

रास्ते मे जब नदी किनारे पहुचे तब सियार फिर से ऊठ की पीठ पर चढ़ गया। और बे नदी पार करने लगे तभी बीच नदी में पहुचने के बाद ऊठ बोला-मित्र मुझे यहां पानी मे लोटने का मन कर रहा है।

सियार डर जाता है और घबरा कर बोलता है मित्र अभी मत लोटना, पहले मुझे उस पर पहुचा दो फिर तुम आराम से लोटना।

पर ऊठ बोलता हैं- नही मित्र मेरा बहुत ज्यादा ही मन कर रहा है, ये कह कर ऊठ नदी में लोटने लगता है।
जिससे सियार नदी में गिर जाता है और डूब कर मर जाता है और ऊठ बाद में आराम से घर चला जाता है।

शिक्षा :-कभी भी स्वार्थी दोस्तो के साथ मत रहो,जो जैसा करता है बैसा भरता है

त्यागी पेड़

त्यागी पेड़

ये कहानी इसी शदी कि है:

एक जंगल मे एक आम का पेड़ था। उस जंगल के पास ही एक छोटा सा गांव था।

उस गांव में एक लड़का रहता था जिसका नाम रामु था।

रामु हमेशा ही उस आम के पेड़ के पास आकर खेला करता था।

वो उस पेड़ पर चढ़ता, आम खाता और फिर आराम से उस पेड़ के नीचे एक झपकी लेता।
त्यागी पेड़

रामु को पेड़ के पास खेलना अच्छा लगता तो उस आम के पेड़ को भी खुशी मिलती।

लेकिन अब रामु ने उस पेड़ के साथ खेलना बंद कर दिया। बह उस पेड़ के साथ नही खेलता ।

लेकिन फिर कुछ दिन बाद रामु उस पेड़ के पास फिर आया, वो बहुत दुखी था।

पेड़ ने कहा- चलो बेटा रामु मेरे साथ खेलो ।

रामु गुुसे से बोला- मैं अब बच्चा नही रहा जो एक पेड़ के साथ खेलु, मुझे अब खिलौने चाहिए और उनके लिए मुझे पैसो की जरूरत है।

पेड़ ने कहा – मुझे माफ़ करो बेटा मेरे पास पैसे नही हैं, परंतु तुम आम तोड़ सकते हो और उनको बाजार में बेचकर खिलोने ले सकते हो।

रामु ये सुन कर बहुत खुश हुआ, उसने आम तोड़े और उन्हें लेकर खुशी- खुशी वहाँ से चला जाता है।
त्यागी पेड़

इसके बाद रामु बहुत दिनों तक उस आम के पेड़ के पास नही आया। जिससे बेचारा आम का पेड़ बहुत दुखी हुआ।

फिर कुछ सालो बाद जब रामु एक जवान लड़का बन गया तब बह फिर पेड़ के पास आया।

तब पेड़ बोला- रामु बेटा आओ और मेरे साथ खेलो।
रामु ने गुस्से से कहा- मुझे तुम्हारे साथ खेलने  का समय नही है, और बैसे भी मैं अब बड़ा हो गया हूं मुझे अपने परिवार के लिए काम करना है, मुझे एक घर चाहिए क्या तुम मुझे दे सकते हो।

पेड़ ने कहा- मुझे माफ कर दो बेटा, मेरे पास तुम्हे देने के लिए घर नही है।

परंतु तुम मेरी शाखाओ को काट कर उनसे अपना घर बना सकते हो।
फिर क्या था ऐसा सुनते ही रामु ने पेड़ की सारी शाखाओ को काट दिया।
त्यागी पेड़

और उन्हें लेकर बहा से खुशी-खुशी चला गया ।
शाखाए टूटने के बाबजूद पेड़ खुश था,

इसके बाद रामु बहुत सालो तक नहीं आया।

फिर कुछ सालों बाद गर्मियों के दिनों में रामु फिर उस पेड़ के पास आया, पेड़ बहुत खुश हुआ।
पेड़ ने कहा – आओ बेटा चलो मेरे साथ खेलो।
रामु ने कहा – नही अब मैं बूढा हो गया हूं, अब मुझे ज़िन्दगी आराम से बिताने के लिए नॉकायन करना है क्या तुम मुझे एक नाव (boat) दे सकते हो ?
त्यागी पेड़
इस पर पेड़ बोला- मेरे तना का इस्तेमाल करो और बोट बनाओ फिर तुम नॉकायन को जा के खुश रहे सकते हो।

फिर क्या था रामु ने उस पेड़ का तना भी काट लिया, और उससे एक बोट बनाई और नॉकयन को चला गया।

फिर बहुत सालों तक बापस नही आया। ऐसे ही कुछ साल बीत गए। और फिर एक दिन रामु बापस आया।
रामु को देख कर पेड़ बोला- मुझे माफ़ करना बेटा मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ नही बचा है। अब मुझ पर आम नही आते हैं।
रामु बोला- कोई बात नही अब मेरे दांत भी तो नहीं हैं आम खाने के लिए।

पेड़- तुम्हारे खेलने के लिए शाखाए भी नही हैं ।

रामु- पर अब मैं बहुत बूढ़ा हो गया हूं पेड़ पर चढ़ने के लिए।
पेड़ फिर रोते हुए बोला – बेटा मेरे पास कुछ नही बचा है तुम्हे देने के लिए बस ये मरने वाली जड़ ही है मेरे पास।
त्यागी पेड़
और पेड़ रोने लगा ।
इस पर रामु ने कहा- अब मुझे किसी भी चीज़ की जरुरत नही है, अब मैं थक गया हूं। बस आराम करना चाहता हु।

आम का पेड़ बोला – तो फिर अच्छा है पेड़ की जड़े आराम करने के लिए सबसे अच्छी जगह होती हैं।

आओ मेरे पास बैठो और आराम करो।
रामु उस पर बैठ गया।

जिससे आम का पेड़ बहुत खुश हुआ और  रोने लगा।

दोस्तों ये कहानी हमारे दिल को छू लेती है, की कैसे एक पेड़ हमारे जीवन मे जीवन भर देता ही रहता है।

और इंसान उस बात की कद्र भी नही करता।
पेड़ हमें छाओ, लकड़ी और फल देते हैं। पर हम इंसान उन्हें बे रहमी से अपने फायदे के लिए काटते हैं और बापस कुछ नही देते। Save Trees.

शिक्षा:- अगर आप पेड़ लगा नहीं सकते, तो कम से कम उन्हें काटो मत।

फूटा घड़ा

फूटा घड़ा

एक गांव में रामू नाम का एक किसान रहता था-

रामू के पास में एक खेत था। एक दिन रामू बाज़ार में खेत के लिए बीज़ ख़रीद रहा होता था तभी उसकी नज़र दो बड़े और सुन्दर घड़ो पर पड़ती हैं।

फूटा घड़ा

रामू बोला- वाह ये तो बड़े और सुन्दर घड़े हैं

ये तो नदी से पानी भर कर लाने के लिए बिल्कुल सही रहेंगे। रामू बोला वैसे भी घर के छोटे बर्तन में बहुत कम पानी आता हैं।

रामू बीज़ छोड़ कर उन दो घड़ो को ख़रीद लेता हैं और घर की ओर चल देता है।

वह बोला- कल से मैं हर रोज़ इन्हीं घड़ो में पानी भर कर लाया करूँगा। यह सोंचते हुए वह घर आ जाता हैं

अगली सुबह दोनों घडो को रस्सी की मदद से एक डंडे के दोनों ओर बांध देता है। और फिर नदी की तरफ़ चल पड़ता हैं। रास्ते में वो एक कच्चे, टूटे फूटे रास्ते से होते हुए नदी के पास पहुँचता हैं।

वो उन दोनों घड़ो को भर लेता हैं

और कहता है- इतने पानी से तो पूरे दिन का काम हो जाएगा मज़ा आ गया और मुझे दो दिन तक यहाँ आना ही नहीं पड़ेगा। इसी ख़ुसी में रामू  गाना गाता हुआ घर की ओर चलने लगता हैं।

घर पहुँच कर जैसे ही वो घड़ो को जमीन पर रखता हैं। वो देखता हैं एक घड़े में पूरा और दूसरे घड़े में कम पानी हैं।

ये देखकर वो समझ जाता हैं एक घड़ा फूट चुका है। फूटे घड़े को देखकर रामू सोचने लगता हैं-

फूटा हुआ है तो क्या हुआ मेरे पास इसके लिए भी काम हैं। इसके बाद में रामू दोनों घड़ो का पानी मिट्टी के एक बर्तन में पलट देता हैं और खेत मे काम करने चला जाता हैं।

इसी तरह दिन बीतते जाते हैं और रामू हर रोज़ दोनों घड़ो में नदी से पानी लाता रहता हैं।

ये देखकर फूटे घड़े को खुद पर शर्म आने लगती हैं और रोते हुए कहता हैं मैं फूटा हुआ हूं ये बात जानते हुए भी मालिक मुझे अपने साथ रोज़ नदी पे लेकर जाते हैं मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता।

मैं मालिक की मेहनत को बेकार नहीं कर सकता फूटा घड़ा ये सब सोच ही रहा होता हैं, के तभी साबुत घड़ा फूटे से बोलता है-

तुम हर रोज़ आधा पानी रास्ते में ही गिरा आते हो एक मैं हु जो हर रोज़ पूरा पानी घर तक लेके आता हूं मैंने तुम्हारे जैसा बेकार घड़ा आज तक नहीं देखा।

साबुत घड़े की ये बात सुनकर फूटे घड़े को बहुत बुरा लगता हैै  जब रामू घड़ो को उठाने आता हैं तो फूटा घड़ा रोते हुए उससे कहता हैं-

मालिक मैं फूटा घड़ा हु हर रोज़ आधा पानी गिरा देता हूं फिर भी आप मुझे साथ लेकर   जाते हैं  कृप्या आज आप मुझे घर पर ही रहने दे।

घड़े की बात सुनकर रामू उससे अपने हाथ में उठाता है औऱ बोलता हैं-

तुम सिर्फ अपनी बुराई को देख रहे हो मैं तुम्हारी बुराई में छुपी अच्छाई को देख रहा हूँ इसलिए मुझे तुममे कभी भी कोई कमी दिखाई नहीं दी।

फुट घड़ा बोला- मुझ में कोई अच्छाई नहीं है मेरी जगह कोई दूसरा घड़ा ख़रीद लीजिये।

रामू बोला- तो ठीक है आज तुम मेरे साथ चलो और नदी से बापस आते समय बहाँ खिले फूलों को देखना और मुझे भरोसा है उसके बाद तुम अपने आप से प्यार करने लगोगे।

रामू की बात मानकर फूटा घड़ा उसके साथ जाता हैं और नदी से बापस आते समय सब कुछ भूलकर रास्ते में खिले फूलों को देखता रहता हैं।

सुंदर फूलों को देखकर वो बहुत खुश होता हैं लेक़िन घर पहुँच कर अपने अंदर आधा पानी देखकर वो फिर मायुस हो जाता हैं।

और बोलता है- मैंने आपसे कहा था मैं किसी काम का नहीं हूं।

रामू बोला- अभी रास्ते में फूलों को देखकर जब तुम अपनी कमी को भूल गए थे वो फूल किसी और ने नहीं बलके तुमने ही उगाये हैं

हर रोज़ जब हम नदी से बापस आते हैं तो तुम्हारा आधा पानी उस धरती पर गिरता हैं जिससे उन फूलों को उगने में मदद मिलती हैं तो फिर तुम ऐसा कैसे कह सकते हो के तुम किसी काम के नहीं हो।

फूटा घड़ा बोला- सच क्या ये फूल मैने उगाए हैं?

रामू बोला- जब पहले दिन मैंने तुमहारे अंदर आधा पानी देखा मुझे तभी पता चल गया था के तुम फूटे हुए हो।

इसीलिये मैंने उसी शाम बहाँ कुछ फूलों के बीज़ बो दिए थे और तुम रोज़ अपने पानी से उनकी सिंचाई करते रहे देखो आज वो बीज़ कितने सुंदर फूल बन गये हैं।

सिर्फ तुम्हारी वज़ह से आज वो बेजान रास्ता भी ख़ुशनुमा हो गया है और मेरी मदद भी हो गई।

फूटा घड़ा बोला- लेकिन इन सब मे आपकी मदद कैसे हुई

रामू बोला वो ऐसा है कि खेती के साथ साथ मैं उन फूलों को भी बाज़ार में बेचने लगा हु जिससे मेरे पास थोड़ा अधिक धन आ जाता है।

उस धन से मैं खेत के लिए ज़्यादा और अच्छे बीज़ ख़रीद लेता हूं ये सब तुम्हारी वज़ह से ही हो पाया है।

इसलिए आज के बाद तुम खुद को कभी बेकार ना समझना।

रामू बात की सुनकर फूटे घड़े को अपनी अहमियत का ऐहसास हो जाता हैं इसके बाद वो खुद से प्यार करने लगता हैं और फिर कभी खुद को बेकार नहीं समझता है।

शिक्षा: – हमें कभी किसी के हुनर का मज़ाक नहीं उड़ाना
चाहिए, बल्कि उसकी अच्छाई को ढूंढकर उसे और
निखारना चाहिए |