शहरी चूहा और देहाती चूहा।

 

 

 

  शहरी चूहा और देहाती चूहा

बहुत समय की बात है।

दो चूहें थे एक भाई शहर में ओर दूसरा भाई गांव में रहता था। एक दिन शहर वाले चूहे ने गांव वाले भाई के पास जाने का सोचा और वो वहां पहुचा गया। और अपने भाई से बोला _ ओ भाई कैसे हो तुम गांव बाला बोला _ अंदर आ जाओ सच मे मैं तो आपको देख के चौंक गया।

और बताओ शहर में कैसी चल रही हैं ज़िन्दगी ? शहर वाला बोला _ अच्छी बहुत अच्छी चल रहीं हैं। क्या यहां की सड़क ख़राब हो गई हैं यहां की सड़क बहुत छोटी हैं।

गांव वाला चूहा बोला _ ये गांव हैं यहां की सड़क छोटी ही होती हैं। फिर शहर वाला चूहा _ बोला हमारे यहां की कार यहां तो चल भी नहीं पाएगी और वो सड़क पे पड़े पत्थर देखो मेरे पैर में तो छाले पड़ गए हैं।

गांव वाला चूहा बोला _ ओह पहले अंदर तो आओ और पैर धो लो और डिनर कर लो मैं डिनर शुरू ही करने वाला था। तब तक आप आ गए फिर शहर वाला बोला _ क्या तुम मुझे बाथरूम दिखा सकते हो ? ओह रहने दो मुझे दिख गया और वैसे भी ये छोटा सा घर हैं। फिर दोनों साथ डिनर करने के लिए बैठे।

गांव वाला बोला – मुझे बहुत ख़ुसी हुई तुम मेरे घर पे आये उम्मीद हैं। तुम्हें डिनर पसंद आये गांव का सिंपल खाना फिर वह बोला तुम खाना क्यो नहीं खा रहे हो। फिर शहर वाला बोला दरअस्ल मैं सोच रहा था। तुम हर रोज़ दाल और चावल ही खाते हो गांव वाला बोला – यहां तो यही मिलता हैं।

शहर वाला बोला _ वो इसलिए क्योंकि तुम यहां रहना चाहते हो तुम मेरे साथ शहर क्यो नहीं चलते फिर गांव वाला बोला  _ नहीं भाई ये मेरे बस की बात नहीं शहर _वाला क्यू क्या तुम अपनी पूरी ज़िंदगी ये दाल और चावल खाकर ही बिताना चाहते हो ये तो ग़लत बात हैं।

शहर वाला बोला _ तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हें असली ज़िन्दगी दिखाऊंगा गांव वाला बोला _ ठीक है। अगर तुम इतना कह रहे हो तो चलो फिर वो दोनों शहर पहुचा गए।

फिर गांव वाला चूहा बड़ा सा घर देखकर बोला क्या ये तुम्हारा घर हैं। फिर शहर वाला चूहा बोला_ नहीं ये मेरा घर नहीं हैं। ये तो किसी अमीर आदमी का हैं। मैं तो यहां रहता हूं फिर दोंनो अंदर गए अंदर पहुँच कर शहर वाला बोला _ ये हैं मेरा डिनर क्या तुम्हें पसंद आया ?

गांव वाला चूहे ने तरह तरह का ढेर सारा खाना देख के बोला _ क्या तुम इसी तरह रहते हो शहरी चूहा हां बिल्कुल एक राजा की तरह जल्दी करो जो चाहो वो खाओ इससे पहले के अमीर आदमी का परिवार आ जाये।

वो दोनों जल्दी जल्दी खाना खा रहे थें। के एक कुत्ता वहां आ गया। और कुत्ता उन दोनों को देख के भौकने लगा। गांव वाला चूहा बहुत डर गया और बोला_ ये कौन हैं तो शहर वाला चूहा बोला _ ये टॉमी हैं इस घर का कुत्ता और ये बोलकर दोनों वहां से भाग गये।

फिर शहर वाला चूहा बोला तो बताओ कैसा लगा मेरे साथ रहना। हम ऐसा खाना हर रोज़ खा सकते हैं। गांव वाला बोला _  नहीं भाई इतने सारे पकवान एक दिन के लिए तो सही हैं। अगर मैं रोज़ खाऊंगा तो मेरा पेट खराब हो जाएगा।

मेरे भाई मैं अपने गांव का खाना अपने छोटे से घर मे खाना ज्यादा पसन्द करूंगा ना के मौत के मुँह में। मुझे माफ़ कर दो भाई मुझे सीधी साधी ज़िन्दगी पसन्द हैं। फिर मिलेंगें मेरे भाई इतना बोल कर चूहा अपने गांव बापस आ गया। सुकूूू

शिक्षा :- तरह तरह लोग अलग अलग की ज़िन्दगी के लिए ही बने होते हैं। कुछ लोग सुकूूून ज़िन्दगी पसन्द करते हैं। तो कुछ लोग मस्ती भरी ज़िन्दगी पसन्द करते हैं। लेकिन ज़रूरी बात ये हैं के हर किसी को दूसरे की ज़िन्दगी जीने का तरीक़ा स्वीकार करना चाहिए।

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