बगुला और केकड़ा

बगुला और केकड़ा

एक समय की बात हैं- एक तालाब के पास एक बगुला रहता था वो उस तालाब से मछलियां पकड़ के अपना पेट भरता।
हर एक मछली उससे नफरत करती थीं लेकिन उसे मछलियां बहुत पसन्द थीं।

बगुला और केकड़ा

बगुला कभी भी भूखा नहीं रहता वह शिकार करता और मज़े से खाता दिन बीतते गए अब बगुला कमज़ोर और बूढ़ा होने लगा।
वो अब पहले जैसा नहीं था उसकी उड़ान भी धीमी हो गई थी।

जैसे ही वो मछलियां पकड़ने की कोसिस करता मछलियां फिसल जाती थीं बगुला शुस्त हो गया था।

एक मछली बगुले के पास तैर रही थीं फिर उसकी माँ बोली- बहाँ मत जाओ बगुला तुम्हें खा लेगा।
मछली- माँ घबराओं मत वो मुझे पकड़ने की कोसिस बहुत दिनों से कर रहा हैं।

मैं तो उसका मज़ाक भी उड़ाती हु देखो वो हिल भी नहीं पा रहा जैसे ही वो पकड़ने की कोसिस करता हैं मैं छलाँग लगा देती हूँ।

मछली को देखकर बगुला जैसे ही आगे बड़ा वो मुँह के बल गिर गया और मछली तैर के निकल गयी।

मछली आपस में बात करने लगीं- देखा हमें उस बगुले से डरने की जरूरत नहीं है।

वक़्त के साथ साथ वो इतना कमज़ोर हो गया था अब वह शिकार भी नहीं कर पा रहा था।

मछलियां उसके आस पास ही मंडरा रहीं थीं फिर भी वो
पकड़ नहीं पा रहा रहा था।
बगुला- ओ इस बुढ़ापे ने तो मुझे भूखा मार दिया अब मैं क्या खाऊँगा दो दिन से भूखा हु।

एक दिन उसे बहुत भूख लगी उसने कई दिनों से कुछ भी नहीं खाया था अपनी भूख को मिटाने के लिए उसने एक योज़ना बनाई।
वह बोला- मुझे पता है मुझे क्या करना है अपनी योज़ना की शुरुआत करने के लिए वो तालाब के किनारे अपना उदास चेरा लेके आ गया मानो शिकार की कोई मर्ज़ी ही न थी।

मछलियां मेंढक और केकड़े को समझ नहीं आ रहा था के वो शिकार क्यों नहीं कर रहा है। एक बडे से केकड़े ने उदास बगुले से पूछा- क्या हाल भाई क्या बात हैं तुम इतने उदास क्यू हो?

बगुला बोला- क्या बताऊँ इस तालाब के लिए एक बुरी ख़बर है।

केकड़ा- बुरी ख़बर बो भला क्या है?

बगुला बोला- मेरी हिम्मत नहीं हो रहीं हैं तम्हें बताने की।

केकड़ा बोला- अब बताओ भी अगर तालाब की बात हैं तो हमे बताना जरूरी हैं क्योंकि हम सब यही रहते हैं।

बगुला बोला- दरअशल इस तालाब की मछलियां नहीं बचने बालीं।

केकड़ा- क्यू ऐसा क्या होने वाला हैं?

बगुला- मैंने सुना हैं कुछ लोग इस तालाब को मिट्टी से भर देंगे और यहां फसल उगायेगें।

केकड़ा बोला- ये तो बुरी ख़बर हैं मैं सबको बताता हूं।

तालाब के सभी प्राड़ी और मछलियां बगुले की बात सुनकर परेशान हो गए।

मछलियां बोली- पानी के बिना तुम सब तो रह सकते हो लेक़िन हम नहीं बगुला ये सुन कर खुश हो गया और बोला घबराओं मत। मेरे पास एक रास्ता है।
मछलियां- सच मे?

बगुला कहने लगा- मुझे एक तालाब के बारे में पता है जहाँ सभी सुरक्षित रह सकते हैं अगर तुम सबको ये बात मंज़ूर हैं तो।
मैं हर रोज़ एक एक कर के सभी को ले जाऊंगा सभी कहने लगे बगुला भाई हमें बचाओ…
सभी प्राणी बगुले की मदद लेना चाहते थे।
बगुला बोला- मेरी कुछ शर्तें हैं।
सभी बोले क्या शर्त है?
मेरे बुढ़ापे की वजह से मुझे हर यात्रा के दौरान मुझे आराम करना पड़ेगा और एक बार में मैं सिर्फ मछलियों को ही ले जा पाऊँगा।
सभी प्राणी बगुले की शर्त मान कर उसके साथ जाने को तैयार हो गए।

पहली ही यात्रा में बगुले ने कुछ मछलियों को अपनी चोंच में लिया और वो चल पड़ा।
बगुला और केकड़ा

पर वो तालाब पर नहीं गया, बल्कि वो एक पहाड़ पे गया और मछलियों को खा गया। कुछ देर आराम करने के बाद उसे फिर से भूख लगी तो वो फिर से यात्रा पे चल पड़ा।
ऐसा लगातार करने से उसे मछलियां खाने को मिलती वो भी बिना किसी मेहनत के कुछ दिन बाद बगुले की सेहत बिल्कुल ठीक हो गयी और वो पहले जैसा तंदुरुस्त हो गया।

बड़े केकड़े को भी खुद को बचाना था वह बगुले से बोला- मुझे भी उस तालाब के पास ले चलो बगुले ने सोचा थोड़ा हट कर चखने का मज़ा ही कुछ और है।
वह बोला- ठीक है मैं तुम्हें अगली बार अपने साथ ले जाऊंगा।
जब बगुला केकड़े को लेकर उड़ा उसके कुछ देर बाद केकड़ा बोला ये तालाब और कितनी दूर है। ..

बगुले को लगा केकड़ा बहुत ही कमजोर प्राणी हैं।
बह उसका कुछ नही कर पाएगा।
बगुला बोला- मूर्ख! मैं क्या तुम्हारा नौकर हूँ, यहां कोई भी तालाब नहीं हैं।

मैंने ये सारी योज़ना तुम सब को खाने के लिए बनाई थी। अब तुम भी अपनी जान खोने के लिए तैयार हो जाओ।

केकड़े को बगुले की चाल का पता चल गया।
केकड़ा बोला- मैं इतनी आसानी से नहीं मरूँगा सुआर्थी बगुले!
बिना वक़्त गबाये केकड़े ने अपने तेज़ पंजो से बगुले की गर्दन को दबोच लिया।
बगुला- छोड़ो दर्द हो रहा हैं।

पर केकड़े ने बगुले की गर्दन मरोड़ दी जिससे बगुला बहिं मर गया।

केकड़ा बड़ी मुश्किल से तालाब के पास पहुँचा
बगुला और केकड़ाऔर सारा किस्सा तालाब के प्राणियो को सुनाया।
सभी ने उसके बहादुरी की तारीफ़ की।
एक मछली बोली- केकड़े भाई तुम तो बहुत बहादुर हो।

केकड़ा- बगुले ने अपनी जान अपने लालच की वज़ह से गवाई ना के मेरे बहादुरी की वज़ह से।।

शिक्षा : – हमें ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए।

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