त्यागी पेड़

त्यागी पेड़

ये कहानी इसी शदी कि है:

एक जंगल मे एक आम का पेड़ था। उस जंगल के पास ही एक छोटा सा गांव था।

उस गांव में एक लड़का रहता था जिसका नाम रामु था।

रामु हमेशा ही उस आम के पेड़ के पास आकर खेला करता था।

वो उस पेड़ पर चढ़ता, आम खाता और फिर आराम से उस पेड़ के नीचे एक झपकी लेता।
त्यागी पेड़

रामु को पेड़ के पास खेलना अच्छा लगता तो उस आम के पेड़ को भी खुशी मिलती।

लेकिन अब रामु ने उस पेड़ के साथ खेलना बंद कर दिया। बह उस पेड़ के साथ नही खेलता ।

लेकिन फिर कुछ दिन बाद रामु उस पेड़ के पास फिर आया, वो बहुत दुखी था।

पेड़ ने कहा- चलो बेटा रामु मेरे साथ खेलो ।

रामु गुुसे से बोला- मैं अब बच्चा नही रहा जो एक पेड़ के साथ खेलु, मुझे अब खिलौने चाहिए और उनके लिए मुझे पैसो की जरूरत है।

पेड़ ने कहा – मुझे माफ़ करो बेटा मेरे पास पैसे नही हैं, परंतु तुम आम तोड़ सकते हो और उनको बाजार में बेचकर खिलोने ले सकते हो।

रामु ये सुन कर बहुत खुश हुआ, उसने आम तोड़े और उन्हें लेकर खुशी- खुशी वहाँ से चला जाता है।
त्यागी पेड़

इसके बाद रामु बहुत दिनों तक उस आम के पेड़ के पास नही आया। जिससे बेचारा आम का पेड़ बहुत दुखी हुआ।

फिर कुछ सालो बाद जब रामु एक जवान लड़का बन गया तब बह फिर पेड़ के पास आया।

तब पेड़ बोला- रामु बेटा आओ और मेरे साथ खेलो।
रामु ने गुस्से से कहा- मुझे तुम्हारे साथ खेलने  का समय नही है, और बैसे भी मैं अब बड़ा हो गया हूं मुझे अपने परिवार के लिए काम करना है, मुझे एक घर चाहिए क्या तुम मुझे दे सकते हो।

पेड़ ने कहा- मुझे माफ कर दो बेटा, मेरे पास तुम्हे देने के लिए घर नही है।

परंतु तुम मेरी शाखाओ को काट कर उनसे अपना घर बना सकते हो।
फिर क्या था ऐसा सुनते ही रामु ने पेड़ की सारी शाखाओ को काट दिया।
त्यागी पेड़

और उन्हें लेकर बहा से खुशी-खुशी चला गया ।
शाखाए टूटने के बाबजूद पेड़ खुश था,

इसके बाद रामु बहुत सालो तक नहीं आया।

फिर कुछ सालों बाद गर्मियों के दिनों में रामु फिर उस पेड़ के पास आया, पेड़ बहुत खुश हुआ।
पेड़ ने कहा – आओ बेटा चलो मेरे साथ खेलो।
रामु ने कहा – नही अब मैं बूढा हो गया हूं, अब मुझे ज़िन्दगी आराम से बिताने के लिए नॉकायन करना है क्या तुम मुझे एक नाव (boat) दे सकते हो ?
त्यागी पेड़
इस पर पेड़ बोला- मेरे तना का इस्तेमाल करो और बोट बनाओ फिर तुम नॉकायन को जा के खुश रहे सकते हो।

फिर क्या था रामु ने उस पेड़ का तना भी काट लिया, और उससे एक बोट बनाई और नॉकयन को चला गया।

फिर बहुत सालों तक बापस नही आया। ऐसे ही कुछ साल बीत गए। और फिर एक दिन रामु बापस आया।
रामु को देख कर पेड़ बोला- मुझे माफ़ करना बेटा मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ नही बचा है। अब मुझ पर आम नही आते हैं।
रामु बोला- कोई बात नही अब मेरे दांत भी तो नहीं हैं आम खाने के लिए।

पेड़- तुम्हारे खेलने के लिए शाखाए भी नही हैं ।

रामु- पर अब मैं बहुत बूढ़ा हो गया हूं पेड़ पर चढ़ने के लिए।
पेड़ फिर रोते हुए बोला – बेटा मेरे पास कुछ नही बचा है तुम्हे देने के लिए बस ये मरने वाली जड़ ही है मेरे पास।
त्यागी पेड़
और पेड़ रोने लगा ।
इस पर रामु ने कहा- अब मुझे किसी भी चीज़ की जरुरत नही है, अब मैं थक गया हूं। बस आराम करना चाहता हु।

आम का पेड़ बोला – तो फिर अच्छा है पेड़ की जड़े आराम करने के लिए सबसे अच्छी जगह होती हैं।

आओ मेरे पास बैठो और आराम करो।
रामु उस पर बैठ गया।

जिससे आम का पेड़ बहुत खुश हुआ और  रोने लगा।

दोस्तों ये कहानी हमारे दिल को छू लेती है, की कैसे एक पेड़ हमारे जीवन मे जीवन भर देता ही रहता है।

और इंसान उस बात की कद्र भी नही करता।
पेड़ हमें छाओ, लकड़ी और फल देते हैं। पर हम इंसान उन्हें बे रहमी से अपने फायदे के लिए काटते हैं और बापस कुछ नही देते। Save Trees.

शिक्षा:- अगर आप पेड़ लगा नहीं सकते, तो कम से कम उन्हें काटो मत।

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